UPSSSC से अनुरोध है कि OTP एवं Website की तकनीकी समस्या का तत्काल समाधान किया जाए और अभ्यर्थियों के हित में आवेदन की अंतिम तिथि को पर्याप्त समय के लिए विस्तारित किया जाए।
अभ्यर्थियों को तकनीकी समस्या के कारण आवेदन के अवसर से वंचित न किया जाए।
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@UpssscOfficial1 महोदय आप की वेबसाइट क्यों नहीं चल रही है वेबसाइट न चलने के कारण बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है
कृपया कर समस्या का समाधान करे
@myogiadityanath@myogioffice
श्री चिराग पासवान जी, आपने कहा आरक्षण पर समीक्षा तो छोड़िए, चर्चा भी नहीं होगी। यदि ऐसा हुआ को इतने लोग सड़कों पर आ जाएँगे कि सँभालना कठिन हो जाएगा।
मुझे नहीं लगता कि आपको ‘चर्चा’ और ‘समीक्षा’ का अर्थ भी पता है। नौ बार के सांसद और विधायक पिता के पुत्र, आज भी आरक्षित सीट से राजनीति कर रहे हैं। और दुर्भाग्य कि आज भी अपने समर्थकों को आप आगजनी-दंगा करने वाले गुंडों की तरह ही देखते हैं कि इन्हें सँभालना मुश्किल हो जाएगा।
आप ऑप्रेस्ड हैं, दलित हैं, पीड़ित हैं और आप सड़कों पर आने की धमकी भी दे देते हैं, ये विरोधाभास कैसे बाँच लेते हैं आप?
और हाँ, आपके चाहने, न चाहने से कुछ नहीं होता। घर में टीवी है तो एकाध बार डिबेट देखिए कि ‘चर्चा’ किस विषय पर हो रही है। और @JPNadda जी आरक्षण पर सोच रहे हैं या नहीं, यह भी आपको पता चल जाएगा।
वैसे यह भी ठीक है कि जब आपको ही ‘चर्चा’ और ‘समीक्षा’ का नहीं पता, तो जिन्हें आप सड़कों पर लाना चाह रहे हैं, वो कितना ही समझ पाएँगे। आपकी जाति SC का सबसे बड़ा हिस्सा ले जाती है। पासवान, चमार, धोबी और पासी 95% आरक्षण ले रहे हैं।
तो देखिए, युवा बिहारी @iChiragPaswan जी, चर्चा तो आरंभ हो चुकी है और @BJP4India ने एक कदम आधिकारिक रूप में बढ़ाया है, एक कदम अनाधिकारिक रूप से अन्य लोगों से रीच आउट कर के।
आप ‘बिहारी फर्स्ट’ की बात करते थे, ये अचानक से माफिया की भाषा क्यों बोल रहे हैं। आप तो मोदी जी के हनुमान हैं, मोदी जी पर विश्वास रखिए। वो चर्चा करवा रहे हैं, वरना आपको लगता है कि अनिल बेलूनी जी की कृपादृष्टि के बिना कोई भी टॉपिक चर्चा में आ सकता है?
गेम समझिए। परिस्थिति बदल रही है। महबूबा ने भी धमकी दी थी। वीपी सिंह को भी लगा था कि वो अनंत काल पीएम रहेगा। जनता से उसी पार्टी को चुना जिसके नेता ने संसद में खड़े हो कर ओबीसी आरक्षण का विरोध किया था।
नेहरू ने OBC को 1955 में ही कोटा देने का विरोध किया था। 1961 में मुख्यमंत्रियों को लिखे पत्र में नेहरू ने आरक्षण का विरोध किया था। पर वो लगातार चुनाव जीतते रहे। तो ऐसा तो है नहीं कि यदि @narendramodi आज इस पर समीक्षा करें, और वह चुनाव हार जाएँगे!
संभव है कि सवर्ण और अनरिप्रेजेंटेड ओबीसी, एससी एकमुश्त वोट दे दे! इसीलिए, चर्चा और समीक्षा दोनों हो रही है, और हम रिफॉर्म भी करवा लेंगे।
जो वकील अपने चैंबर में जज बनाने के लिए कुख्यात है, वो भोंसड़ीवाला भी मर्यादा पर ज्ञान चोद रहा है। लाल जंघिए में आर्गुमेंट करने वाले लोग, जिनके इनकम टैक्स के पेपर दीमक चर जाते हैं, वो साले मोरेलिटी का हमें ज्ञान देंगे?
साले सही पैसे दूँ तो रिरियाता हुआ ‘जी सर’ बोल कर तू मुझे डिफेंड करने आ जाएगा।
पुनः कहूँगा, जिन हराम के पिल्लों को लगता है कि मेरी (या किसी भी व्यक्ति की) माँ-बहन किसी अनपढ़-गँवार-जातिवादी कीड़े के डिजिटल भोग की विषयवस्तु है, मैं उनकी पिछवाड़े में बाँस डाल कर खड़ा कर दूँगा।
मेरे लिए मेरे परिजनों का सम्मान सर्वोपरि है, और उस पर कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं। चाहे वो भारत का प्रधानमंत्री हो या अमेरिका का राष्ट्रपति, मुझे झाँट भर फर्क नहीं पड़ता तुम्हारी पहचान क्या है।
मैं अपने प्रत्युत्तर में तीक्ष्ण, तीव्र और डिस्प्रपॉर्शनेट ही रहूँगा।