अगर अरावली में सब सुरक्षित है,
तो परिभाषा बदलने की ज़रूरत क्यों पड़ी❓️
फ़ैसले संरक्षण के लिए नहीं,
ब्लकि अनुमति देने के लिए गए मोदीजी।😡
#SaveAravali#SaveAravaliHills
मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) पर एक बार फिर भ्रष्टाचार और लापरवाही का गंभीर आरोप लगा है। Group-2, Sub Group-4 (2022) भर्ती परीक्षा में योग्य अभ्यर्थियों को ‘अपात्र’ कर दिया गया, जबकि मेरिट लिस्ट में अयोग्य उम्मीदवार शामिल कर दिए गए। यह न केवल मध्यप्रदेश कनिष्ठ सेवा नियम 2013 का उल्लंघन है बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य के साथ क्रूर मज़ाक भी है।
2017 में भी यही खेल खेला गया था, जहाँ 64 में से 63 पद खाली रह गए थे। 2022 में भी वही गलती दोहराई गई और परिणाम यह हुआ कि 4337 सफल अभ्यर्थियों के बावजूद 88% पद रिक्त रह गए। हैरानी की बात तो यह है कि बिना योग्यता वाले उम्मीदवारों को तो ज्वाइनिंग तक दे दी गई, लेकिन योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर दिया गया।
यह केवल भर्ती घोटाला नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी के सपनों का कत्ल है। जिन युवाओं ने सालों मेहनत की, उनकी उम्र और करियर दोनों बर्बाद कर दिए गए। सवाल यह है कि बार-बार हुई इस गड़बड़ी पर सरकार और मंडल क्यों चुप हैं? क्या नौकरियों के नाम पर युवाओं को सिर्फ छलने की परंपरा ही अब व्यवस्था बन चुकी है?
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