एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय जी ने देश के सबसे बड़े सच पर बात की है। 150 करोड़ की आबादी वाले भारत पर आज लगभग ₹250 लाख करोड़ का भारी कर्ज है!
इस कर्ज और आर्थिक तंगी का सबसे बड़ा कारण है लोक-लुभावन मुफ्त की रेवड़ियां (Freebies) बांटने का शॉर्ट-टर्म कल्चर।
समाधान क्या है?
फिनलैंड (Finland) और जर्मनी (Germany) जैसे विकसित देशों का मॉडल अपनाना होगा। वहाँ सरकारें मुफ्त कैश या रेवड़ियां नहीं बांटतीं, बल्कि टैक्स के पैसे से 2 बुनियादी चीजों को 100% वर्ल्ड-क्लास और मुफ्त रखती हैं:
1️⃣ बच्चों की बेहतरीन पढ़ाई (Education)
2️⃣ बीमारी का विश्वस्तरीय इलाज (Healthcare)
भारत में भी जिस दिन मिडिल क्लास और गरीब परिवारों की जेब से पढ़ाई और इलाज का यह भारी खर्च हटेगा, लोगों की 'Quality of Life' अपने आप बेस्ट हो जाएगी और देश कर्ज के जाल से भी बाहर निकल पाएगा।चुनाव में मिलने वाले ₹1500 के शॉर्ट-टर्म लालच को छोड़िए, नेताओं से लंबी अवधि के इस बुनियादी विकास पर सवाल पूछिए! @FinMinIndia@NITIAayog@ECISVEEP@AshwiniUpadhyay
करवा देंगे नहीं, करवा दीजिए.
UP के लखीमपुर खीरी में 8वीं के छात्र ने जनसुनवाई में अधिकारियों को सरकारी सिस्टम की सबसे बड़ी बीमारी याद दिला दी!
जब प्रशासनिक अधिकारियों का परमानेंट डायलॉग आया करवा देंगे तो 13 साल के बच्चे ने तुरंत टोक दिया करवा दीजिए! साहब बड़े-बड़े लोग सालों चक्कर काटकर जो बात नहीं समझ पाते वो इस बच्चे ने एक लाइन में समझा दी।
तारीख पर तारीख वाले सिस्टम को ऐसा करारा जवाब देने के लिए गजब का जिगरा चाहिए!
छत्तीसगढ़ में खनन प्रभावितों के फंड में बड़ी गड़बड़ी! #CAG की परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट में
खुलासा:PMKKKY के तहत ₹13,101 करोड़ के फंड में नियमों का उल्लंघन।₹30.73 करोड़ प्रभावित क्षेत्रों के बजाय बगीचे, दफ्तर और वेलकम गेट पर खर्च।
₹10,253 करोड़ खर्च होने के बाद भी 44% सीधे प्रभावित गांव विकास से वंचित।गरीब आदिवासी और खनन प्रभावितों के अधिकार पर यह प्रशासनिक लापरवाही चिंताजनक है।
#Chhattisgarh
#CAGReport
#DMFT
#MiningScam
नमस्कार मैं रवीश कुमार, कहने को तो आज हरियाणा जींद से मोदी जी ने हाइट्रोजन से चलने वाली ट्रेन चला दी है।
उनके लिये शानदार व्यवस्था की गई है रेड कारपेट बिछाया गया है।गोदी मीडिया पर दुनिया भर की तमाम खबरों को छोड़कर बस ये दिखाया जा रहा है।
विज्ञान और देश के लिये ये तरक्की की बात हो सकती है।
लेकिन मानवता के लिये, सवेंदनशीलता के लिये आज का दिन काले दिन के नाम पर दर्ज किया जाएगा।
जब जींद से थोड़ी सी दूर पर मैग्सेसे अवार्ड वाले सोनम जी,
पानी के बिना ,अन्न के बिना रहे थे तड़प रहे थे तब कंही ट्रेन को झंडी दिखाकर तालिया बजवाई जा रही थी।
ट्रेन तो बेजुबान है पानी से बिजली से कैसे भी चलाओ चुप चाप चल पड़ेगी।
लेकिन एक इंसान को खाना ना मिले तो वो कैसे जियेगा।
देश के प्रधानमंत्री के पास विदेश यात्रा के लिये समय है,उद्घाटन के लिये समय है लेकिन दिल्ली की दिल्ली में
सोनम के लिये समय नही है।
देश मे आज के दौर में अंधेर नगरी चौपट राजा का दौर चल रहा है।।
जनता मरी नहीं है अपने आप को शानि समझती है
लेकिन इनको ये नहीं पता नेता तुमसे भी ज्यादा शाने है
जनता को ये समझ नही आ रहा है तुम बेवकूफ हो जो नेताओ की रेलियो में जा कर टाली पिट रहे हो
अगर नेताओ इतनी ही चिंता होती ना देश की तो अभी भ्रष्टाचार पर 1 साल के अंदर मौत की सजा और संपत्ति सील का बिल आ गया होता.
लगे रहो अपने चहीते नेता को नाराज़ मत करना इसकी मांग करके .
History is made! 🇮🇳
Massive congratulations to @SkyrootA for the successful orbit of #Vikram1. This milestone makes India only the third country globally with a private orbital launch capability, alongside US & China.
भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स का दम देखकर आज हर देशवासी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है।
#SkyrootAerospace #Vikram1 #NewIndia #SpaceExploration #ProudIndian
India's space ambition reaches new horizon.
Heartiest congratulations to @SkyrootA Aerospace on the successful launch of Vikram-1, India's first privately developed launch vehicle. A firm step towards realizing Modi Ji's vision of making space more accessible, this innovation will further strengthen India's space sector elevating its stature as a global leader.
#IndiaWithVikram1
Spoke to the team of Skyroot Aerospace and congratulated them on the successful launch of Vikram-1.
This is a defining moment in India’s space journey. The growing participation of our private sector is opening new frontiers and accelerating innovation.
This achievement will encourage countless youngsters to dream bigger and innovate fearlessly.
@SkyrootA
I.N.D.I.A गठबंधन पर सवाल (Political Irony)गठबंधन की प्राथमिकता: जब चुनाव जीतने या सत्ता में आने के लिए देश की दर्जनों विपक्षी पार्टियां मतभेद भुलाकर I.N.D.I.A (Indian National Developmental Inclusive Alliance) गठबंधन बना सकती हैं, तो वे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक 'साझा एजेंडा' या 'साझा ड्राफ्ट बिल' क्यों नहीं तैयार करतीं?
विरोधाभास: इस गठबंधन में शामिल कई पार्टियों के शीर्ष नेताओं पर खुद भ्रष्टाचार और घोटालों के गंभीर कानूनी मामले चल रहे हैं। ऐसे में विपक्ष द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ सामूहिक रूप से कोई सख्त कानून लाने की मांग करना व्यावहारिक रूप से उनके अपने ही गठबंधन के सहयोगियों के खिलाफ जाता है।
🤣🤣🤣
भारत की जनता के इतने बुरे हाल हैं जो खुद भ्रष्ट हैं बहि जनता को ज्ञान दे रहे हैं
जनता तुम ताली बजाते रहो तालियों में कोई कमी नहीं होनी चाहिए
एक बात याद रखना सब नेता मिलकर काम करते हैं भारत में इतना भ्रष्टाचार है सुना किसी के मुंह से भ्रष्टाचार पर 1 साल के अंदर मौत की सजा और संपत्ति सील करने का बिल का
मुझे एक चीज़ बताओ ये तेरा पप्पू जिसको तुम LOP बोलते हो काहे का LOP है ये जनता को बेवकूफ बनाना बंद करो अगर इसको इतनी ही चिंता है तो भ्रष्टाचार पर मौत की सजा और 1 साल के अंदर संपत्ति सील बिल लेकर क्यों नहीं आता तेरा शहजादा?
जनता को देख कर तो हंसी आती पागल दिमाग हिलाओ ये नेता मिलकर काम करते हैं खुद सोचो सत्ता पक्ष हो या विपक्ष कोई भी ऐसा कोई बिल क्यों नहीं लेकर आता 🤔
@RahulGandhi अबे तो इतना डिंडोरा पिटने की क्या ज़रूरत है विपक्ष में है ना 20 को मानसून सत्र शुरू हो रहा है भ्रष्टाचार पे मौत की सज़ा और संपत्ति सील एक साल के अंदर बिल ले आयो.
जनता को बेवकूफ बनाते रहो और जनता भी बन रही है बहुत बढ़िया चल रहा है तुम भाषण देते रहो और जनता ताली बजाती रहेगी
🤨
स्मार्टफोन रखने वाला हर शख्स खुद को पत्रकार मान रहा है...दिल्ली हाईकोर्ट की यह टिप्पणी आज के डिजिटल युग का एक कड़वा सच बयां करती है।इस मुद्दे के दोनों पहलुओं को समझना बेहद जरूरी है:
1️⃣ जवाबदेही जरूरी: बिना ट्रेनिंग और बिना किसी नैतिक जिम्मेदारी के सिर्फ व्यूज के लिए सनसनी फैलाना और लोगों पर मानसिक दबाव बनाना पत्रकारिता नहीं है। फेक न्यूज और ब्लैकमेलिंग रोकने के लिए एक Regulatory Framework समय की मांग है।
2️⃣ सिटिजन जर्नलिज्म की ताकत: डिजिटल मीडिया ने आम जनता और जमीनी स्तर की उन आवाजों को मंच दिया है, जिन्हें मुख्यधारा का मीडिया अक्सर छोड़ देता है।समाधान: डिजिटल मीडिया पर पाबंदी लगाना रास्ता नहीं है, बल्कि एक पारदर्शी नियामक ढांचा (Regulatory Framework) तैयार करना होगा जिससे प्रेस की आज़ादी भी बची रहे और फेक पत्रकारों की जवाबदेही भी तय हो।
@MLJ_GoI@MIB_India