#संतरामपालजी_का_वरदान
बिधलान गांव को मिली बड़ी राहत
सोनीपत के बिधलान गांव की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या और प्रदूषित तालाब की निकासी का हुआ स्थायी समाधान। ग्राम पंचायत की प्रार्थना के मात्र 12 से 15 घंटे के भीतर संत रामपाल जी महाराज के शुद्ध पेयजल
#शुद्ध_जल_पियेगा_हिंदुस्तान
#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा , बालक बन दिखलाया।
काशी नगर जल कमल पर डेरा तहाँ जुलाहे ने पाया
ऋग्वेद मण्डल 10, सूक्त 4, मंत्र 3 में स्पष्ट उल्लेख हैकि परमात्मा काजन्म नहीं होता वह सशरीर प्रकटहोता है, और वही परमेश्वर कबीर जी हैं
1Day Left Kabir Prakat Diwas
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
सन् 1398, विक्रमी संवत् 1455 में, काशी के पवित्र लहरतारा तालाब में खिले कमल के पुष्प पर शिशु रूप में सशरीर प्रकट हुए थे।
यह कोई जन्म नही प्राकट्य है।
बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज
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#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
जिनका नहीं जन्म का कोई प्रमाण, वह है कबीर भगवान
आज से लगभग 600 वर्ष पहले, काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर परमेश्वर कबीर जी का सशरीर प्राकट्य हुआ था।
इसके जीवंत साक्ष्य आज भी लहरतारा तालाब, काशी में विद्यमान हैं। संत रामपाल जी महाराज की पावन
#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा
♦️ 600 साल पुराना रहस्य, आज भी काशी की धरती गवाह है!
कबीर साहेब वह अविनाशी परमात्मा हैं जो हर युग में जन्म नहीं लेते बल्कि सशरीर प्रकट होते हैं। कलियुग में वे काशी के लहरतारा तालाब में, कमल के फूल पर, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ज्येष्ठ पूर्णिमा को
#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा
संत गरीबदास जी महाराज ने भी अपनी अमरवाणी में स्पष्ट किया है कि जिसके जन्मदाता कोई माता-पिता नहीं हैं और जिसके जन्म का कोई प्रमाण नहीं है वह केवल पूर्ण ब्रह्म कबीर साहेब है।
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#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा
गरीब, साहिब पुरुष कबीर कूँ, जन्म लिया नहीं कोय।
शब्द स्वरूपी रूप है, घट घट बोलै सोय।।
ज्येष्ठ पूर्णिमा, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ब्रह्म मुहूर्त की वह घड़ी जब कबीर परमेश्वर सतलोक से सशरीर चलकर लहरतारा तालाब के कमल पर शिशु रूप में प्रकट हुए।
#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा
वेद कहते हैं, परमात्मा सशरीर आता है!
ऋग्वेद मण्डल 9, सूक्त 93, मंत्र 2 के अनुसार परमात्मा सशरीर पृथ्वी पर आता है, वही साक्षात् रूप कबीर साहेब का है, जिनका जन्म नहीं हुआ बल्कि सशरीर प्राकट्य हुआ।
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जिनका नहीं जन्म का कोई प्रमाण,
वह है कबीर भगवान
आज से लगभग 600 वर्ष पहले, काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर परमेश्वर कबीर जी का सशरीर प्राकट्य हुआ था। इसके जीवंत साक्ष्य आज भी लहरतारा तालाब, काशी में विद्यमान हैं।
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#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
कबीर साहेब प्रकट दिवस वह पावन दिन है ,जब सर्व ब्रह्मांडो के रचनहार स्वयं कबीर परमेश्वर सत्यलोक से चलकर ,हम भटकती हुई जीवात्माओ को तारने के लिए पृथ्वी पर सशरीर अवतरित हुए।
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
क्या वेद बता सकते हैं भगवान कौन है?
जी हाँ, और जवाब है कबीर साहेब!
ऋग्वेद मण्डल 9, सूक्त 93, मंत्र 2 प्रमाणित करता है कि पूर्ण परमात्मा कभी माता के गर्भ से जन्म नहीं लेता,
वह शिशु रूप में प्रकट होता है। वही कबीर साहेब हैं।
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
ज्येष्ठ पूर्णिमा, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की वह पावन ब्रह्म मुहूर्त की घड़ी, जब कबीर परमेश्वर सतलोक से सशरीर चलकर लहरतारा तालाब के कमल पर प्रकट हुए। उस दिव्य क्षण को कोटि-कोटि नमन!
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#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा
कबीर साहेब माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते। वे सन् 1398, विक्रमी संवत् 1455 में, काशी के पवित्र लहरतारा तालाब में खिले कमल के पुष्प पर शिशु रूप में सशरीर प्रकट हुए थे। यह कोई सामान्य जन्म नहीं, बल्कि साक्षात् परमात्मा का प्राकट्य था।
#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा
is the auspicious day when the Sover-eign Creator of all universes, Supreme Lord Kabir, descended in His divine physical form from Satyalok to this Earth, with the purpose of redeeming and liberating all wandering souls.
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#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा
अजन्मा परमेश्वर, जन्म-मृत्यु से परे कबीर साहेब
कबीर साहेब के न कोई माता-पिता हैं, न उनका जन्म-मृत्यु का कोई बंधन है। वे अविनाशी और सर्वशक्तिमान पूर्ण परमात्मा हैं, जो हर युग में जीवों के उद्धार हेतु सशरीर धरती पर प्रकट होते हैं।
ना मेरा जन्म, ना गर्भ ब
संत गरीबदास जी महाराज ने भी अपनी अमरवाणी में स्पष्ट किया है कि जिसके जन्मदाता कोई माता-पिता नहीं हैं और जिसके जन्म का कोई प्रमाण नहीं है वह केवल पूर्ण ब्रह्म कबीर साहेब है।
#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा
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♦️ कबीर साहेब का जन्म माता के गर्भ से नहीं हुआ। वे विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) में काशी के लहरतारा तालाब में कमल पुष्प पर सशरीर प्रकट हुए। यही कारण है कि उन्हें अजन्मा परमात्मा कहा गया है।
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
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