'अक्षरा'
हृदय पटल पर-
अक्षरों से कुछ बनाती हूँ...
सँजोती हूँ ...
मिटा देती हूँ !
कुछ नया बनाने के लिये !!
कुछ-कुछ समझने लगी हूँ
तुम्हें ओ 'त्रिजननी'!!!
#दीप्ति_मिश्र@Dipti1511
(FB वॉल से साभार)
चैन
तुम्हें पाना नहीं है
न तुमसे कुछ पाना है
फिर किस लिए
हर वक़्त
हर जगह
हर तरफ़
तुम्हें ढूँढती फिरती हूँ
....
कुछ है जो अधूरा है
कुछ है जो होना है
शायद
कुछ उधार है मुझ पर !
चुका दूँ
तो चैन मिले !!
~दीप्ति मिश्र
#diptimisra
(एफ बी वॉल से साभार)
सोचती हूँ कि मैं सोचना छोड़ दूँ
या तो फिर सोच की सब हदें तोड़ दूँ
जिस तरफ़ एक तूफ़ान उठने को है
उस तरफ़ अपनी कश्ती का रुख मोड़ दूँ
गर मुहब्बत न रिश्तों की मोहताज हो
सारे रिश्ते यहीं-के-यहीं तोड़ दूँ
#दीप्ति_मिश्रा
(FB वॉल से साभार)↕️
अभी-अभी
अनवरत
सुनती नहीं,पीती हूँ मैं
ओक में भर,घूँट-घूँट
तुम्हारी वाणी को !
....
तृप्त होने से ठीक पहले
बन्द कर लेती हूँ अपने कान
ताकि अतृप्ति बनी रहे !
सिलसिला चलता रहे !!
#दीप्ति_मिश्र
(#diptimisra)
@Dipti1511
उसका ग़म तो उसका है,हमको उसके ग़म से क्या
फिर ये बेचैनी कैसी,रब्त है उसका हमसे क्या
दिल तो दिल है टूटेगा,आज मिला कल छूटेगा
जीवन भर की आस लगा बैठे हो तुम हमसे क्या
हमको हम ही रहना है,सच को सच ही कहना है
चाहे जितने ढ़ाओ सितम,हम डरते हैं ग़म से क्या
#दीप्ति_मिश्रा ↕️
(FBसे साभार)
मेरे दरमियाँ, मेरे चार-सू
कोई हू रहे, कहे तू ही तू
तेरी चाह में,तेरी राह में रहूँ
दर-ब-दर, फिरूँ कू-ब-कू
मुझे आजकल यही काम है
तेरी आरज़ू, तेरी जुस्तजू
तुझे देख कर,ये लगा मुझे
मैं खड़ी हूँ अपने ही रू-ब-रू
तुझे मिलके भी न मिलूँ कभी
तेरा अक्स हूँ मैं भी हू-ब-हू
#दीप्ति_मिश्र ↕️
•अभय•
कितने सारे इन्द्र बिठा रखे हैं
तुमने अपनी सभा में!
मेरे पाँव धरते ही-
सबके सिंहासन डोलने लगते हैं
भयमुक्त करो
अपने सभी देवी-देवताओं को
और बता दो
हमारा मिलना-बिछड़ना
देह के बंधन से मुक्त है !!
~दीप्ति मिश्र
#diptimisra@Dipti1511
(FB वाल से साभार)