किसी भी देश में किसी भी धर्म की किताब किसी भगवान ने नहीं लिखी बल्कि मनुष्यों ने लिखी। बाद में उन्हें भगवान की देन बताया गया ताकि लोग डर या आस्था के कारण उन पर सवाल न उठाएँ!!
इतिहास में यह दौर भी दर्ज होगा!
जब छात्रों के न्याय की मांग में दलित धरने पर बैठे थे!!
मुस्लिम खाना खिला रहे थे!
सिख पानी पिला रहे थे!
और खुद को सबसे बड़ा देशभक्त कहने वाले खुलकर उनका विरोध कर रहे थे!!
32 डिग्रियाँ प्राप्त करने वाले और विदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से उच्च शिक्षा लेकर लौटे डॉ. भीमराव अंबेडकर को नफ़रत फैलाने वाले लोग क्या ही समझेंगे!!
ज्ञान की ऊँचाई तक पहुँचने के लिए पूर्वाग्रह नहीं, अध्ययन और विचार चाहिए!!😏😏