गुजरात की आर्थिक राजधानी कर्णावती (अमदावत) में मराठी भाषा बोलने वाले हिन्दू लोग कितनी शान से रहते है देखिए 👇🏻
उनका बोर्ड भी मराठी में उनकी सोसाइटी और मंदिर का नाम सब कुछ मराठी में ही है लेकिन कभी किसी गुजराती ने प्रश्न नहीं पूछा कि मराठी में क्यों 💯👇🏻
@abpmajhatv जैन समाजाची जी काही एक-दोन टक्के मतं त्याला मिळत होती, ती सुद्धा निघून गेली. असंच चालू राहिलं तर राजूला राजकारण सोडून पेंटिंगचा व्यवसाय सुरू करावा लागेल.
आज हमारी शोध निरंतर चल रही है। माननीय सीताराम गोयल जी का शोध अत्यंत विस्तृत और गहन रहा है, जिसके लिए उन्हें नमन; और यदि कुछ तथ्य छूट गए हैं, तो उन्हें भी हम वापस लेंगे —जिसकी शुरुआत राम मंदिर से हुई है।
राम मंदिर मामले में जस्टिस एस. यू. खान ने कहा था कि कभी मुसलमान इस देश के शासक थे और आज स्वयं को 'जूनियर पार्टनर' मानते हैं। परंतु संघर्ष किसी धर्म से नहीं, बल्कि ऐसी मानसिकता से है।