रक्षाबंधन के पवित्र धागे में बहन का स्नेह ही नहीं, बल्कि भाई के निर्मल विवेक, ज्ञान, शांति और सदाचार की मंगलकामना भी जुड़ी है। यही हमारी सनातन संस्कृति की सुंदरता है।
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वैदिक राखी में दूर्वा, अक्षत, केसर, चंदन और सरसों का भावपूर्ण समावेश जीवन के अनेक शुभ संकेत देता है। सद्गुणों की वृद्धि, अखंड श्रद्धा, तेज, शीतलता और दृढ़ता की कामना से जुड़ा Raksha Sutra पर्व को विशेष बनाता है। #VedicRakshaBandhan
अपना शुभ संकल्प , औषधियाँ और शरीर के ढाँचे की व्यवस्था... , इन सब को ध्यान में रखते हुए ये श्रावणी पूनम का "रक्षाबंधन" महोत्सव चल पड़ा। हज़ार साल, दो हज़ार साल, पाँच हज़ार साल, लाख-दो लाख नहीं! करोड़ों वर्ष प्राचीन ये उत्सव है।
लक्ष्मीजी ने बली राजा को बांधी थी राखी। सबकुछ देकर त्रिभुवनपति को अपना द्वारपाल बनाने वाले बली को भी लक्ष्मीजी ने राखी बांधी और राखी बांधने वाली बहन अथवा हितैषी व्यक्ति की आगे कृतज्ञता का भाव व्यक्त होता है..।
तो तुम क्या चाहती हो...? बोले:- "वो जो तुम्हारे बौने, नन्हे-मुन्ने चौकीदार हैं, उनको आप छुटा कर दो।"
विश्वनियंता को छुड़ाने के लिए… भक्त के प्रेम से वश होकर जो द्वारपाल की सेवा करते हैं ; उस द्वारपाल की सेवा की पदवी से भगवान नारायण को छुड़ाने के लिए लक्ष्मीजी ने भी "रक्षाबंधन महोत्सव" का उपयोग किया।
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हजार गंगा नहा लो, हजार एकादशी कर लो, अच्छा है, पुण्य होता है लेकिन सद्गुरु के सत्संग के आगे वह सब छोटा हो जाता है । आत्मवेत्ता गुरु की कृपा और सत्संग सर्वोपरि हैं ।
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"रक्षाबंधन"
बहन भाई की ऐहिक रक्षा का संकल्प करती है और भाई बहन की ऐहिक रक्षा की जिम्मेदारी ले सकता है लेकिन गुरु 84 लाख जन्मों से हमारा रक्षण हो और आपके दैविकार्य में जो विघ्न आते हैं उनसे आपका भी रक्षण हो, इस भाव से गुरु - शिष्य एक दूसरे को शुभ संकल्पों से पुष्ट करते हैं।
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@Asharamjibapu__ राखी का वास्तविक सामर्थ्य धागे में नहीं, उसके पीछे छिपे पवित्र संकल्प में है।
भाई-बहन का यह रिश्ता केवल रक्षा का नहीं, बल्कि चरित्र, मर्यादा और संस्कारों की रक्षा का भी संकल्प है। यही भावना रक्षाबंधन को एक महान भारतीय संस्कार बनाती है।
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राखी का धागा तो छोटा सा होता है, लेकिन बहन का संकल्प उसमें अद्भुत सामर्थ्य भर देता है। मेरा भैया त्रिलोचन हो जाए, इसलिए आज के दिन भैया की रक्षा का संकल्प साकार करने के लिए बहन भाई के घर जाती है। शची ने इंद्र को राखी बांधी थी।
मंत्रों में बड़ी शक्ति होती है। संकल्प में बड़ी शक्ति होती है। दैत्य हार गए। देवताओं की विजय हुई और शुक्राचार्य कहते हैं कि इस समय तुम समझौता करके वर्ष भर शांति रखो क्योंकि इंद्र के हाथ में शची ने राखी बांध रखी है। बहन को भी अब विशाल हृदय करना चाहिए और भाइयों को भी अपने जीवन में विशालता लानी चाहिए। अपनी बहन तो बहन है, लेकिन पड़ोस की बहन भी, हमारी नजर अगर इधर उधर गिरती है तो पड़ोस की बहन को कह दे कि बहन मेरे हाथ में राखी बांध दे, मेरे विचारों की रक्षा हो। पड़ोस की बहन भी अपने भाई से निर्भीक, अपने पड़ोस के युवान को भाई कहने में संकोच ना करें। अगर मन इधर उधर जाता है तो पड़ोस के भाई को राखी बांधकर एक दूसरे से आध्यात्मिक भाई बहन का पवित्र नाता जोड़कर अपने विकारों में बहते-गिरते जीवन को थामने का अवसर ये भारतीय परंपरा ने दिया है।
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@Asharamjibapu__ जीवन में संयम, सहजता और आंतरिक शांति लाने वाला अत्यंत पावन संदेश। गुरु पूनम का यह आध्यात्मिक मार्गदर्शन जीवन को सही दिशा देता है। 🙏✨
Sant Shri Asharamji Bapu
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@Asharamjibapu__ गुरु का प्रकाश जीवन को केवल दिशा नहीं देता, जीवन जीने की कला भी सिखाता है।
संयम से शक्ति, शांति से स्थिरता और मधुरता से जीवन में आनंद आता है। गुरुकृपा से यही गुण साधना बनकर जीवन को सार्थक करते हैं। #AsharamjiBapuQuotes