गांवों में कहावत है, सांप के फन पर पैर रख दो तो वह और बिलबिला कर डसने आता है।
वही हाल इन कुकुरमुत्ते की तरह उगे कोचिंग संस्थानों का हो गया है। एक सवाल क्या उठाया, ये लोग रील्स पर रील्स बनाने लगे।
अंजना ओम कश्यप ने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाला है और कोचिंग माफिया उनके पीछे हाथ धोकर पड़े हैं। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि अंजना ने झूठ क्या बोला?
जरा ये सोशल मीडिया के 'महान' खान सर और विकास दिव्यकीर्ति जैसे लोग पिछले 5 साल का अपना वास्तविक, ऑन-पेपर डेटा दुनिया के सामने रखें। छाती ठोककर बताएं कि वाकई कितने IAS, IPS और PCS उनकी 'दुकानों' से पढ़कर निकले हैं?
सच्चाई ये है कि इतिहास और ज्ञान पढ़ाने के नाम पर हजारों बच्चों को चुटकुले, लच्छेदार बातें और रील्स का कंटेंट परोसा जा रहा है। धरातल पर 'जीरो' और यूट्यूब पर 'हीरो' बनने का खेल चल रहा है।
सोशल मीडिया और यूट्यूब के फेम के दम पर अरबों का धंधा चमकाया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत खोखली है। जब ढांचा ही मार्केटिंग पर टिका हो, तो सच का आईना देखते ही मिर्ची लगना स्वाभाविक है।
अंजना ओम कश्यप ने कोचिंग माफिया के इस साम्राज्य पर पत्थर मारा है। अब तिलमिलाए हुए दलाल और अंधभक्त सोशल मीडिया पर शोर तो मचाएंगे ही।
गरीब और मध्यमवर्गीय बच्चों के सपनों का सौदा करने वाले इन 'माफिया यूट्यूबर्स' से अब देश का युवा जवाब मांग रहा है कि आखिर कब तक लूट की ये दुकानें चलाओगे?
जरा इन यू-ट्यूबर टीचर्स के कोई भी वीडियो उठाकर देख लीजिए, क्या सच पढ़ाते हैं और क्या झूठ?
@BhaiPreetSingh@gupta_rekha@MCD_Delhi@DCP_SHAHDARA@CPDelhi@HMOIndia दिल्ली में भी योगी आदित्यनाथ जी जैसा मुख्यमंत्री चाहिए, नहीं तो भाजपा अगली बार सत्ता में फिर से नहीं आएगी, केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, शहर में सरकार सब पर शासन दें दिया जनता ने तब भी नहीं सम्हाल पा रहे अब क्या करें जनता सत्ता से बेदखल करना ही विकल्प बनता है।