NEET। CBSE। SSC। और आज CUET।
चार परीक्षाएँ। एक करोड़ बच्चे। एक भी ईमानदारी से नहीं हो पाई।
दावे "विश्वगुरु" के, मगर देश में एक परीक्षा नहीं करवा सकते - मोदी जी ने पूरी शिक्षा व्यवस्था तबाह कर दी है।
जिस पीढ़ी का भविष्य आप बर्बाद कर रहे हैं - वही पीढ़ी आपका हिसाब करेगी।
एक भयंकर आर्थिक तूफ़ान सर पर है।
12 साल में मोदी जी ने जो ढाँचा खड़ा किया - वह सिर्फ़ अडानी और अंबानी के लिए था।
और, अब वही ढाँचा भरभराकर ढहने वाला है।
चोट उन्हें नहीं लगेगी - उनके पास निकलने के रास्ते हैं।
चोट आपको लगेगी - युवाओं को, ग़रीबों को, मध्यमवर्ग को, किसानों को, मज़दूरों को, छोटे व्यापारियों को - जो कभी इस ढाँचे का हिस्सा थे ही नहीं।
अपने आसपास देखिए। क्या आप उस ढाँचे का हिस्सा हैं - या उस तूफ़ान का शिकार?
BJP नेता सौभाग्य सिंह ठाकुर मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष बने।
फिर क्या.. भौकाल जमाने के लिए सौभाग्य सिंह ने उज्जैन से भोपाल तक गाड़ियों का लंबा काफिला निकाल दिया।
एक तरफ नरेंद्र मोदी देश को पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करने का ज्ञान देते हैं, दूसरी तरफ उनकी ही पार्टी के नेता अपील की धज्जियां उड़ाते हैं।
ये दिखाता है कि नरेंद्र मोदी को सारा त्याग जनता से ही चाहिए। बाकी सत्ता में बैठे लोग मौज मारें.. इससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता।
चश्मा लगाए इस परेशान शख्स का नाम प्रवीण कुमार है।
इनके साथ बाइक इंश्योरेंस का मामला बिल्कुल एक स्कैम जैसा हो गया है।
इन्होंने 2024 में एक स्कूटी खरीदी थी, जिसका 2 साल का इंश्योरेंस था।
जब इंश्योरेंस खत्म होने वाला था, उसी समय नेशनल इंश्योरेंस वाले एजेंट ने इनसे इंश्योरेंस करने को कहा।
इन्होंने अपनी पूरी स्कूटी का बीमा करवा दिया।
फिर इनका स्कूटी एक्सीडेंट हो गया।
ये इंश्योरेंस वाले के पास गए, तो उसने पूछा कहाँ गिरे, कैसे गिरे? स्टाम्प करवा कर लाओ।
इन्होंने सब किया, तब जाकर सर्वेयर आया यानी चेक करने वाला और वो देख कर गया।
फिर भी तुरंत नहीं बल्कि काफी दिन बाद अप्रूवल मिला।
फिर ये स्कूटी ठीक करवाने गए तो वहां 27,000 का बिल आया।
इन्होंने जब इंश्योरेंस वाले को बताया तो उसने कहा इतना नहीं, बस 15,600 का काम करवाओ, हम इतना ही देंगे।
ये बेचारे फिर भी मान गए।
स्कूटी बन गई और जब पैसे की बारी आई तो इंश्योरेंस वाले ने कहा आप पेमेंट उधर खुद से करो, अपना यही नियम है।
मैं आपके अकाउंट में दूंगा।
इन्होंने खुद से 15600 का पेमेंट किया।
इसके बाद इंश्योरेंस कंपनी से ये रोज पैसे का इंतजार करते रहे पर पैसा नहीं आया।
ये रोज पूछते और हर बार बात को टाल दिया जाता।
करीब 15 दिन के बाद इनके खाते में मात्र 8,238 रुपए आया।
ये जब पूछने गए कि इतना कम क्यों आया, जबकि 15,600 का अप्रूवल था,
तो इसे घुमाने जाने लगा कि इधर बात करो, उधर बात करो।
अब यह आदमी बहुत ही ज्यादा परेशान है।
>नाम अरविंद कुमार शर्मा
>MLC और ऊर्जा मंत्री उत्तर प्रदेश
>पूर्व IAS गुजरात कैडर
>काम : प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था का ख्याल रखना
>असली काम :खराब ऊर्जा व्यवस्था पर सवाल पूछने पर जय बजरंग बली का नारा लगा कर निकल लेना
>इनके आने से प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था बहुत बेहतरीन थी
>ये उत्तर प्रदेश भेजे गए पहले से अच्छी ऊर्जा व्यवस्था को खराब करने
>जबसे ये आएं है तबसे गर्मी आते ही पूरे प्रदेश में बिजली को लेकर हाहाकार मचता है
>पूरे प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर हाहाकार मचा हुआ है
>बिजली के बिल की कीमतें अनायास ही बढ़ गई हैं
>मंत्री जी जनता के लिए काम करते है या किसी व्यापारी के लिए ?
>मंत्री जी केवल ब्राह्मण सभाएं आयोजित करवाते हैं
>मंचो पर चढ़कर लंबी लंबी बातें फेंकते हैं
>मंत्री जी एकदम बेहतरीन उदाहरण पेश करते हैं कि एक ब्यूरोक्रेट को मंत्री विधायक या सांसद क्यों नहीं होना चाहिए
>मंत्री जी के सर पर राज्य से ज्यादा केंद्र का हांथ है
>तभी तो इतनी शिकायतें होने के बाद भी सरकार में बने हुए हैं
>जनता त्राहि त्राहि कर रही , मंत्री जी मस्त शर्मा की चाय समोसा खाकर लुत्फ उठा रहे , ये कर सको समझो राजा हो।
मैं उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जी को चैलेंज देता हूँ कि आप आम आदमी बनकर प्रदेश के किसी भी बड़े अस्पताल में बिना सोर्स सिफारिश के पेशेंट को एडमिट करके दिखा दीजिए,
मैं आपके पूरे दिन का डीज़ल और खाने पीने का खर्चा उठाने के लिए तैयार हूं।
जस्टिस स्वर्णकान्ता शर्मा जी से न्याय मिलने की मेरी उम्मीद टूट चुकी है।
अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनते हुए, गांधी जी के सिद्धांतो को मानते हुए और सत्याग्रह की भावना के साथ, मैंने फ़ैसला किया है कि मैं इस केस में उनके सामने पेश नहीं हूंगा और कोई दलील भी नहीं रखूँगा।
मेरठ में होमगार्ड का एग्जाम देकर लौट रहे युवक का हेलमेट चोरी हो गया वह पहली बार मेरठ आया था इसलिए रास्ता भटककर दिल्ली-मेरठ बाईपास पर पहुंच गया
विनोद कुमार दरोगा जितेंद्र सिंह ने बिना किसी कारण के युवक को थप्पड़ मारे, गालियां दीं और बाइक का चालान काटते हुए ₹5000 भी छीन लिए
52 वेबसाइटें जो ज़्यादातर कॉलेज डिग्रियों से ज़्यादा कीमती हैं:
1. Coursera. org – यूनिवर्सिटी के कोर्स, जिन्हें आप पूरी तरह से मुफ़्त में देख सकते हैं
2. Brilliant. org – मैथ और साइंस सीखने का इंटरैक्टिव तरीका
3. Wolfram Alpha – किसी भी मैथ या फ़ैक्ट से जुड़े सवाल का जवाब देता है
4. GitHub. com – असल दुनिया के प्रोजेक्ट्स से कोडिंग सीखें
5. Investopedia. com – फ़ाइनेंस और इन्वेस्टिंग को आसान भाषा में समझाता है
6. Archive. org – लाखों मुफ़्त किताबें और पुरानी वेबसाइटें देखें
7. Project Gutenberg – 70,000 मुफ़्त क्लासिक किताबें
8. Duolingo. com – कोई भी भाषा मुफ़्त में सीखें
9. Notion. so – अपनी पूरी ज़िंदगी और पढ़ाई को व्यवस्थित करें
10. Our World in Data – दुनिया के हर आँकड़े को विज़ुअलाइज़ करके दिखाता है
11. Statista. com – हर चीज़ पर डेटा और आँकड़े
12. OpenLibrary. org – लाखों किताबें ऑनलाइन मुफ़्त में उधार लें
13. Hemingwayapp. com – तुरंत ज़्यादा साफ़ और आसान भाषा में लिखें
14. NASA. gov – स्पेस साइंस और रिसर्च मुफ़्त में
15. PubMed. gov – असली साइंटिफ़िक रिसर्च पेपर्स देखें
16. Edx. org – Harvard, MIT और दूसरी जगहों के मुफ़्त कोर्स
17. TED. com – दुनिया के सबसे बेहतरीन विचारकों के सबसे अच्छे आइडिया
18. Anki – अब तक बनाया गया सबसे दमदार मेमोरी टूल
19. Canva. com – डिज़ाइनर न होते हुए भी कुछ भी डिज़ाइन करें
20. Skillshare. com – क्रिएटिव और प्रैक्टिकल स्किल्स सीखें
21. Readwise. io – आपने जो कुछ भी पढ़ा है, वह सब याद रखें
22. Google Scholar – असली एकेडमिक पेपर्स खोजें
23. Codecademy. com – कोडिंग करना पूरी तरह से मुफ़्त में सीखें
24. ChatGPT – AI ट्यूटर जो दिन के 24 घंटे उपलब्ध है
25. Figma. com – प्रोफ़ेशनल डिज़ाइन मुफ़्त में सीखें
26. Replit. com – अपने ब्राउज़र से कुछ भी कोड करें
27. Huberman Lab Podcast – साइंस पर आधारित हेल्थ एजुकेशन
28. Mindmeister. com – बेहतर सोच के लिए माइंड मैपिंग
29. NerdWallet. com – पर्सनल फ़ाइनेंस को आसान बनाता है
30. Quizlet. com – फ़्लैशकार्ड्स की मदद से ज़्यादा स्मार्ट तरीके से पढ़ाई करें
31. Gapminder. org – दुनिया की असली हालत देखें
32. PhET Simulations – ऑनलाइन इंटरैक्टिव साइंस एक्सपेरिमेंट
33. Numbeo. com – धरती के हर शहर के लिए रहने-सहने के खर्च का डेटा
34. 23andMe. com – अपनी खुद की जेनेटिक्स को समझें
35. Zapier. com – बिना कोडिंग के अपने काम को ऑटोमेट करें
36. Lesswrong. com – गहरी तार्किक सोच और फ़ैसले लेना
37. Documentaryheaven. com – हज़ारों मुफ़्त डॉक्यूमेंट्री
38. Trading Economics – हर देश के लिए आर्थिक डेटा
39. Perplexity. ai – AI से चलने वाला रिसर्च टूल
40. Stanford Encyclopedia of Philosophy – हर दार्शनिक विचार को समझाया गया है
41. Librivox. org – क्लासिक साहित्य की मुफ़्त ऑडियोबुक
42. Zooniverse. org – असली वैज्ञानिक रिसर्च में हिस्सा लें
43. Futurelearn. com – टॉप यूनिवर्सिटी से मुफ़्त छोटे कोर्स
44. Typing. com – सही तरीके से और तेज़ी से टाइप करना सीखें
45. Drawabox. com – बिल्कुल शुरू से चित्र बनाना सीखें
46. Grammarly. com – हर स्थिति में बेहतर लिखें
47. Khanacademy. org – हर किसी के लिए मुफ़्त, विश्व-स्तरीय शिक्षा
48. Desmos. com – सबसे शक्तिशाली मुफ़्त ग्राफ़िंग कैलकुलेटर
49. Stellarium. org – अपनी स्क्रीन से रात के आसमान को देखें
50. Psychologytoday. com – मानसिक स्वास्थ्य और मनोविज्ञान को समझाया गया है
51. Worldometers. info – हर चीज़ पर रियल-टाइम वैश्विक आँकड़े
52. Notion. so/ templates – अपनी पूरी ज़िंदगी को व्यवस्थित करने के लिए मुफ़्त टेम्प्लेट...
संसद में Private Hospitals और Insurance Companies के बीच की साँठगाँठ को Expose किया।
लाखों परिवार हर साल मेडिकल इमरजेंसी के चलते क़र्ज़दार बन जाते हैं। उस मुश्किल वक़्त में एक आम आदमी इन कंपनियों और अस्पताल के बीच एक टेनिस बॉल बन जाता है।
>स्टीमर डूबने के बाद पता चलता है कि सवारी ने लाइफ़ जैकेट नहीं पहने थे,
>बस जलने के बाद पता चलता है कि उसमें इमर्जेंसी एग्जिट डोर तो था ही नहीं,
>ट्रॉली पलटने के बाद पता चलता है कि ट्रॉली में सवारी बैठाना मना है,
>ट्रक पलटने के बाद पता चलता है कि वो ओवरलोडेड था।
>1000 करोड़ की संपत्ति बना लेके बाद पता चलता है कि ऑफिसर भ्रष्ट था
> मरीजों के मरने के बाद पता चलता है कि हॉस्पिटल के पास लाइसेंस नहीं था
>लोगों के मरने के बाद पता चलता है कि खाना एक्सपायर्ड था
>दस्त लगने के बाद पता चलता है कि दूध में यूरिया मिला था।
"दरअसल इन सबके बारे में सिस्टम को पता होता है, बस भ्रष्टाचार की वजह से चलता रहता है।
जब पकड़े जाते हैं तब सबकुछ सामने आता है।
मोदी जी ने कहा था - LPG Gas Crisis को COVID की तरह हैंडल करेंगे।
और सच में वही किया।
बिल्कुल COVID के जैसे ही - नीति शून्य, घोषणा बड़ी, और बोझ गरीबों पर।
₹500-800 की दिहाड़ी कमाने वाले प्रवासी मज़दूरों के लिए रसोई गैस पहुंच से बाहर हो गई है। रात को घर लौटते मज़दूर के पास चूल्हे जलाने तक के पैसे नहीं। नतीजा - शहर छोड़ो, गाँव भागो।
जो मज़दूर textile mills और factories की रीढ़ हैं - आज वही टूट रहे हैं।
Textile sector पहले से ICU में है। Manufacturing दम तोड़ रही है। और यह संकट आया कहाँ से? कूटनीति की मेज़ पर हुई उस चूक से जिसे सरकार आज तक स्वीकार नहीं करती।
जब अहंकार नीति बन जाए - अर्थव्यवस्था चरमराती है, मज़दूर पलायन करते हैं, उद्योग बर्बाद होते हैं और देश दशकों पीछे धकेल दिया जाता है।
सवाल एक ही है - हर संकट में सबसे पहले गरीब क्यों मरता है? चुप मत रहो। यह सिर्फ़ गरीब का नहीं, हम सबका सवाल है।