उप्र की भाजपा सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार भी एक छलावा है। साढ़े चार साल जिनका हक़ मारा आज उनको प्रतिनिधित्व देने का नाटक रचा जा रहा है। जब तक नये मंत्रियों के नामों की पट्टी का रंग सूखेगा तब तक तो 2022 चुनाव की आचार संहिता लागू हो जाएगी।
भाजपाई नाटक का समापन अंक शुरू हो गया है।
भाजपा सरकार ने लम्बे समय से चली आ रही ‘ओबीसी’ समाज की गणना की माँग को ठुकरा कर साबित कर दिया है कि वो ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ को गिनना नहीं चाहती है क्योंकि वो ओबीसी को जनसंख्या के अनुपात में उनका हक़ नहीं देना चाहती है।
धन-बल की समर्थक भाजपा शुरू से ही सामाजिक न्याय की विरोधी है।
जिस प्रकार किसान और ग्रामीण जनता आवारा पशुओं की समस्या स�� बुरी तरह त्रस्त है उससे तो यही लगता है कि उप्र का अगला चुनाव स्वयंभू-तथाकथित ‘दमदार’ बनाम ‘दुमदार’ की समस्या पर होगा।
#नहीं_चाहिए_भाजपा
चौवन गुज़रे, छह महीने बचे इस दंभी सरकार के किसान, ग़रीब, महिला व युवा पर अत्याचार के बेरोज़गारी, महंगाई, नफ़रत व ठप्प कारोबार के बहकावे, फुसलावेवाली, जुमलेबाज़ सरकार के
नहीं चाहिए ऐसी सरकार, जिसका सच है:
ठगका साथ, ठगका विकास, ठगका विश्वास, ठगका प्रयास
#झूठ_का_फूल
उप्र की भाजपा सरकार ने प्रकाशित किया ‘16 पेज का 16 आने झूठ’!
लगता है कि भाजपा ने अपने ‘अंतरराष्ट्रीय झूठ प्रशिक्षण केंद्र’ की पाठ्यपुस्तिका प्रकाशित करी है परंतु भाजपा के ‘झूठ के दूत’ इसे ऑनलाइन कक्षाओं में ही चला पायेंगे क्योंकि जनता के बीच वो जा नहीं पा रहे हैं।
#भाजपा_ख़त्म