प्रधानमंत्री जी ने सही कहा है -
लाल टोपी लाल निशान यही है समाजवादी गुंडों की पहचान..
देखिए किस प्रकार रायबरेली में लाल टोपी वाले गुंडें एक राहगीर को निर्मम तरीके से पीट रहे हैं!
चलो विदा लेते हैं अब, अपनी उन स्मृतियों से
दाहक बनके जिनने जीवन भस्म किया है सदियों से
कबतक ऐसे अरण्यरुदन कर, स्वयं को पीड़ा देंगे हम
चलो डोर तज दें जीवन की, कबतक बन्ध ये कसेंगे हम।।
#विदा
हे पुत्र जग में गीदड़ों की पूछ बढ़ी है ये न सोचो
गीदड़ हैं फिरते पहन के चोला सिंह का अबतो।।
सिंह-पुत्र हो,पग चिन्ह तुम्हारे सम्मुख देखो
पुरखे सिंह थे,तुम भी स्वयं को अबतो निरखो
हिन्द तुम्हारा, आर्य-रक्त है तुममें बहता
सत्य-सनातन, हिन्दू हो, जग है कहता
#हिदं_तुम्हारा
कब्रिस्तान जिस नाम पर सार्वजनिक भूखण्डों को सुन्नी वक्फ बोर्ड नाम करते है मस्जिद जहां बम और आतंकि मिला करते है।चर्च जो अंग्रेजो के शाशन काल स��� भूखण्ड का स्वामित्व बना बैठा इनका क्या।
#Temple_Loot
विभाजन के समय देश को जो पीड़ा हुई उसे भुलाया नहीं जा सकता। यह पीड़ा तभी खत्म होगी जब विभाजन निरस्त होगा।- डॉ.मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
आ��� छठ का दूसरा दिन है। इस दिन व्रती पूरा दिन व्रत रखते हैं और शाम को मिट्टी के चूल्हे पर चना के दाल, अरवाचावल गुड़ के खीर का प्रसाद बनाते हैं. शाम को पूजा संपन्न होने के बाद इस चना के दाल अरवाचावल ,गुड़ की खीर के प्रसाद का वितरण होता है। सभी व्रतियों को ��रना कीअनंत शुभकामनाएं
राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी की 152वीं जयंती पर
आज लखीसराय नगर परिषद से सुभाष चौक तक पद यात्रा की गई।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनकी जन्म-जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि। पूज्य बापू का जीवन और आदर्श देश की हर पीढ़ी को कर्तव्य पथ ��र चलने के लिए प्रेरित करता रहेगा।
बिहार भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री @mangalpandeybjp जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाये माता आदिशक्ति रोगमुक्त चिरायु बनाये 🎂🎂🎂
संत कबीर दास जी को उनकी जयंती पर शत-शत नमन। उन्होंने न केवल सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया, बल्कि दुनिया को मानवता और प्रेम का संदेश दिया। उनका दिखाया मार्ग हर पीढ़ी को भाईचारा और सद्भावना के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहेगा।
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के शिल्पी डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी मातृभाषा को शिक्षा का माध्यम बनाने के पक्षधर थे। वें मानते थे कि विकास में जनभागीदारी के बिना कोई भी देश प्रगति नहीं कर सकता। उन्होंने सत्ता की लालसा नहीं बल्कि राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के ध्येय को लेकर जनसंघ की स्थापना की।