हम भारत के लोग, ये प्रण करें- हमारे लिए देशहित से बड़ा और कोई हित कभी नहीं होगा।
हम भारत के लोग, ये प्रण करें- हमारे लिए देश की चिंता, अपनी खुद की चिंता से बढ़कर होगी।
हम भारत के लोग, ये प्रण करें- हमारे लिए देश की एकता, अखंडता से बढ़कर कुछ नहीं होगा: PM
@Anamika12411925 @parulkotharii अंदर का सुख इतना सहज है, मजेदार है... उसे पाने के बाद जब दुसरो को देखता हूँ तड़पते हुए... वो भी अकारण तो बस सहज प्रेम वश ऐसे खोजियों से सम्पर्क हो जाता है चाहे माध्यम कोई भी हो डिजिटल या पर्सनल
@vikky_j02@parulkotharii जी जो कह रहे है... वो सत्य है मैंने स्वयं अनुभव किया है। आप उनसे पूछिये वो सब जानते है। आप जहां हो वंही पर आपको सत्य की अनुभूति करा देंगे। यदि आप वास्तव में प्यासे हो तो तर्क छोड़ थोड़ा साहस करिए और अपने अंदर ही अपनी आत्मा में उतरने का।
@vikky_j02@parulkotharii आपका प्रश्न सही है . लेकिन मैं भी जैन धर्म को बचपन से बहुत मानता आया हु और आज मुझे सही मायनो में उन principles पर चलाने वाला मिला है . बचपन से जो दुविधा और कन्फ़्यूज़न create हो गए थे वोह आज ख़त्म हो गए है . सही अर्थों में मुक्ति और मोक्ष की राह उस परमात्मा के सानिध्य में मिली
माननीय प्रधानमंत्री श्रीमान नरेंद्र मोदी जी के आत्मनिर्भर अभियान को शक्ति देने के लिए स्वदेशी अपनाएं और भारत को आत्मनिर्भर बने ज्यादा से ज्यादा भारत के सामान को खरीदें ,भारत में लघु उद्योगों की पुनः स्थापना हो और भारत आत्मनिर्भर बने #अब_चीनी_बंद
" हे जीव" जिस प्रकार जिह्वा के स्वादके आकर्षण से मुक्त होने मात्रसे शर���र को वो भोजन प्राप्त होने लगता है जो शरीर के पोषण और स्वास्थ्य केलिए आवश्यक है। उसी प्रकार मन रूपी स्वादके आकर्षण से मुक्त होने पर आत्मा को परमात्मा रूपी पोषण व स्वास्थ्य और आनन्द सहज ही प्राप्त होने लगता है।
"मैंने परमात्मा दर्शन का निमंत्रण दिया है प्रदर्शन का नहीं"
जीवन दर्शन में उतरो, जल्दबाजी में प्रभू के दर्शन करना चाहते हो, तो यह दर्शन नही प्रदर्शन होगा।
@Uma_Dutt_Mishra उस परमात्मा की भक्ति और शरण ग्रहण कीजिये। कोई भी देवी देवता कर्मकांड परमात्मा के विधान में हस्तक्षेप नही कर सकता। मृत्युलोक में जो कोई भी कुछ पाता है उसकी कीमत चुकाता है। जिसे आनंद की कमना हो वो ईश्वर की भक्ति करे। सद्गुरु की खोज करे और अपने आत्मा को जागृत करे।
क्या करोगे पितरों, भूत प्रेतों, देवी देवताओं की सवारी बुलाकर या पूजा करके... क्या मिल जाएगा? अंत मे दुःख ही हाँथ लगेगा ।
सच्चा सुख, आनंद और समस्त दुःखो से मुक्ति चाहते हो तो अपने परमात्मा के शरण मे आओ अपनी आत्मा को जागृत करो।
ये तंत्र, मन्त्र, ज्योतिष, कर्मकांड ये सभी विषय मन के छलावे हैं। यह आपको न आनंद दे सकते हैं न ये आपको दुःखो से मुक्ति दे सकते है। जो समस्त दुःखो से आपको मुक्त कर सकता है... वो आत्मा आपके अंदर ही विराजित है। वही आनंद मिलेगा। अपनी आत्मा को जागृत करो।
काम, क्रोध, लोभ, मोह भी मच्छर हीहै यह आपकी साधनासे प्राप्त पुण्य रूपी खूनको चूस कर आपको निस्तेज करदेते हैं।
अतः मन रूपी मच्छर से दूर अपनी आत्माके शरणमे आओ, उसकी सुरक्षामें आओ, तुम्हारी आत्मा सीधे उस परमात्मा से जुड़ीहै। परमात्मा तुम्हारे लिए ऐसे सहज और सरल हैं जैसे कि सांस लेना
कुरबतो का मुकाम है रूबरू हो मिलन में,
इनायत क��� मुकाम है कुबूल हो जाने में,
इश्क का मुकाम है इकरार से लूट जाने में,
प्रभु आप से अनुराग का मुकाम है, आप में घुल जाने में!
सानीका🙏🏻🙏🏻🙏🏻
इंसानों को हमेशा इंसानों सेही खतरा है. इसलिए हमेशा प्रभू भक्ति की नौका पर बैठेरहो. मृत्यू किसी की भी कभी हो सकती है. अगले क्षण का कोई भरोसा नही. मृत्यू सिर्फ किसी वायरस के भरोसे थोड़े न बैठाह���! इसलिए जितना भी समय जीवन का मिलाहै ईश्वरको धन्यवाद करतेहुए आत्मजागरण व आत्मकल्याण कर लो
सुनिये इस छोटी बच्ची की अनुभूति... जिसने साक्षात उस प्रभु, उस परमात्मा का दर्शन और उसकी करुणा की अनुभूति किया है। और जिसने भी उस परमात्मा को जान है वो भी इसके भांति ही निडर व बेहिचक कह सकते है कि..."हाँ मैंने उसे जाना है... तुम चाहो तो तुमको भी उस परमात्मा के दर्शन करवा सकते है"