Retired From All India Radio. 56 years of Outstanding Creativity in ‘Traditional Indian Poetry’
1st Indian author to have written over 6,00,000 ‘dohas’ .
अनुचित हिंसा रोकने, अद्भुत शक्ति प्रयोग।
सत्ता करे विशेषतः, प्रमुदित होंगे लोग।।1।।
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स्वर्ग तुल्य ही देश को,नरक बनाने आज।
तुले हुए भीषण कुटिल, निन्दनीय यह काज।।२।।
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वचनों का ना इन दिनों, ध्यान रख रहे लोग।
धोखा देने का लगा, सबको भीषण रोग।।4।।
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त्यागीं ही अब युवतियाँ, अपना शील,स्वभाव।
विकट दे रहीं देश को, ‘स्वारथ’ हेतु तनाव।।
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डॉ. ओम् जोशी
अनुचित हिंसा रोकने, अद्भुत शक्ति प्रयोग।
सत्ता करे विशेषतः, प्रमुदित होंगे लोग।।1।।
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स्वर्ग तुल्य ही देश को,नरक बनाने आज।
तुले हुए भीषण कुटिल, निन्दनीय यह काज।।२।।
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वचनों का ना इन दिनों, ध्यान रख रहे लोग।
धोखा देने का लगा, सबको भीषण रोग।।4।।
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त्यागीं ही अब युवतियाँ, अपना शील,स्वभाव।
विकट दे रहीं देश को, ‘स्वारथ’ हेतु तनाव।।
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डॉ. ओम् जोशी
अनुचित हिंसा रोकने, अद्भुत शक्ति प्रयोग।
सत्ता करे विशेषतः, प्रमुदित होंगे लोग।।1।।
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स्वर्ग तुल्य ही देश को,नरक बनाने आज।
तुले हुए भीषण कुटिल, निन्दनीय यह काज।।२।।
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वचनों का ना इन दिनों, ध्यान रख रहे लोग।
धोखा देने का लगा, सबको भीषण रोग।।4।।
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त्यागीं ही अब युवतियाँ, अपना शील,स्वभाव।
विकट दे रहीं देश को, ‘स्वारथ’ हेतु तनाव।।
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डॉ. ओम् जोशी
अनुचित हिंसा रोकने, अद्भुत शक्ति प्रयोग।
सत्ता करे विशेषतः, प्रमुदित होंगे लोग।।1।।
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स्वर्ग तुल्य ही देश को,नरक बनाने आज।
तुले हुए भीषण कुटिल, निन्दनीय यह काज।।२।।
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वचनों का ना इन दिनों, ध्यान रख रहे लोग।
धोखा देने का लगा, सबको भीषण रोग।।4।।
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त्यागीं ही अब युवतियाँ, अपना शील,स्वभाव।
विकट दे रहीं देश को, ‘स्वारथ’ हेतु तनाव।।
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डॉ. ओम् जोशी
अनुचित हिंसा रोकने, अद्भुत शक्ति प्रयोग।
सत्ता करे विशेषतः, प्रमुदित होंगे लोग।।1।।
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स्वर्ग तुल्य ही देश को,नरक बनाने आज।
तुले हुए भीषण कुटिल, निन्दनीय यह काज।।२।।
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वचनों का ना इन दिनों, ध्यान रख रहे लोग।
धोखा देने का लगा, सबको भीषण रोग।।4।।
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त्यागीं ही अब युवतियाँ, अपना शील,स्वभाव।
विकट दे रहीं देश को, ‘स्वारथ’ हेतु तनाव।।
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डॉ. ओम् जोशी
अनुचित हिंसा रोकने, अद्भुत शक्ति प्रयोग।
सत्ता करे विशेषतः, प्रमुदित होंगे लोग।।1।।
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स्वर्ग तुल्य ही देश को,नरक बनाने आज।
तुले हुए भीषण कुटिल, निन्दनीय यह काज।।२।।
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जो स्वभावतः सहज ही, जिनके मन में प्यार।
ज्ञानी, दानी तुल्य वे, निश्चित बहुत उदार।।3।।
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वचनों का ना इन दिनों, ध्यान रख रहे लोग।
धोखा देने का लगा, सबको भीषण रोग।।4।।
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त्यागीं ही अब युवतियाँ, अपना शील,स्वभाव।
विकट दे रहीं देश को, ‘स्वारथ’ हेतु तनाव।।
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डॉ. ओम् जोशी
#everyone #followers #youth
@sudhirchaudhary कलुषित, भूखे भेड़िये, ‘सत्ता’ पाने व्यर्थ।
नित्य उपद्रव कर रहे, यह तो घोर अनर्थ।।
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बाँका कर सकता नहीं, इस ‘शासन’ का बाल।
भले प्रदर्शन नित करे, यह विपक्ष विकराल।।
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डॉ. ओम् जोशी
@news24tvchannel@varunjournalist@NagarAdditi कलुषित, भूखे भेड़िये, ‘सत्ता’ पाने व्यर्थ।
नित्य उपद्रव कर रहे, यह तो घोर अनर्थ।।
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बाँका कर सकता नहीं, इस ‘शासन’ का बाल।
भले प्रदर्शन नित करे, यह विपक्ष विकराल।।
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डॉ. ओम् जोशी
कॉकरोचों का पर्दाफाश! 🪳❌
आंदोलन की आड़ में अराजकता और संवैधानिक संस्थाओं पर कीचड़ उछालने वालों को जनता अब करारा जवाब दे रही है। विकास और राष्ट्रवाद के सामने इनकी विघटनकारी राजनीति नहीं टिकेगी! ⬇️
@capt_mishra कलुषित, भूखे भेड़िये, ‘सत्ता’ पाने व्यर्थ।
नित्य उपद्रव कर रहे, यह तो घोर अनर्थ।।
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बाँका कर सकता नहीं, इस ‘शासन’ का बाल।
भले प्रदर्शन नित करे, यह विपक्ष विकराल।।
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डॉ. ओम् जोशी
@sanjaykedia@AshokShrivasta6@DDNewslive@DDNewsHindi कलुषित, भूखे भेड़िये, ‘सत्ता’ पाने व्यर्थ।
नित्य उपद्रव कर रहे, यह तो घोर अनर्थ।।
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बाँका कर सकता नहीं, इस ‘शासन’ का बाल।
भले प्रदर्शन नित करे, यह विपक्ष विकराल।।
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डॉ. ओम् जोशी
@PNRai1 कलुषित, भूखे भेड़िये, ‘सत्ता’ पाने व्यर्थ।
नित्य उपद्रव कर रहे, यह तो घोर अनर्थ।।
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बाँका कर सकता नहीं, इस ‘शासन’ का बाल।
भले प्रदर्शन नित करे, यह विपक्ष विकराल।।
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डॉ. ओम् जोशी
@aajtak कलुषित, भूखे भेड़िये, ‘सत्ता’ पाने व्यर्थ।
नित्य उपद्रव कर रहे, यह तो घोर अनर्थ।।
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बाँका कर सकता नहीं, इस ‘शासन’ का बाल।
भले प्रदर्शन नित करे, यह विपक्ष विकराल।।
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डॉ. ओम् जोशी
जो कृतज्ञ स्वीकारते, मन से ही उपकार।
वे निश्चित ही वस्तुतः, निर्मल, गुणी, उदार।।
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जिनका मन, भीषण कुटिल, प्रतिपल ही प्रतिकूल।
उनके जीवन में नहीं, खिलने सुख के फूल।।
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डॉ. ओम् जोशी
कलुषित, भूखे भेड़िये, ‘सत्ता’ पाने व्यर्थ।
नित्य उपद्रव कर रहे, यह तो घोर अनर्थ।।
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बाँका कर सकता नहीं, इस ‘शासन’ का बाल।
भले प्रदर्शन नित करे, यह विपक्ष विकराल।।
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डॉ. ओम् जोशी
@anantvijay दिव्य, विश्वख्यात ही, अनुपम भारतवर्ष।
ना रुक पाएगा कभी, अब इसका उत्कर्ष।।
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कोकरोच भारी बढ़े, छिपकलियों के संग।
सत्ता, जनता, पुलिस से, उनकी क्षीण उमंग।।
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सत्य कबीरा ने कहा - ‘लालच बुरी बलाय’।।
ठगबन्धन में नित मची, अब ‘सत्ता’ की हाय।।
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डॉ. ओम् जोशी
@OfficeofSSC दिव्य, विश्वख्यात ही, अनुपम भारतवर्ष।
ना रुक पाएगा कभी, अब इसका उत्कर्ष।।
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कोकरोच भारी बढ़े, छिपकलियों के संग।
सत्ता, जनता, पुलिस से, उनकी क्षीण उमंग।।
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सत्य कबीरा ने कहा - ‘लालच बुरी बलाय’।।
ठगबन्धन में नित मची, अब ‘सत्ता’ की हाय।।
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डॉ. ओम् जोशी
@KirenRijiju दिव्य, विश्वख्यात ही, अनुपम भारतवर्ष।
ना रुक पाएगा कभी, अब इसका उत्कर्ष।।
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कोकरोच भारी बढ़े, छिपकलियों के संग।
सत्ता, जनता, पुलिस से, उनकी क्षीण उमंग।।
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सत्य कबीरा ने कहा - ‘लालच बुरी बलाय’।।
ठगबन्धन में नित मची, अब ‘सत्ता’ की हाय।।
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डॉ. ओम् जोशी
@news24tvchannel दिव्य, विश्वख्यात ही, अनुपम भारतवर्ष।
ना रुक पाएगा कभी, अब इसका उत्कर्ष।।
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कोकरोच भारी बढ़े, छिपकलियों के संग।
सत्ता, जनता, पुलिस से, उनकी क्षीण उमंग।।
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सत्य कबीरा ने कहा - ‘लालच बुरी बलाय’।।
ठगबन्धन में नित मची, अब ‘सत्ता’ की हाय।।
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डॉ. ओम् जोशी