@AamAadmiParty अपनी चिंता करो बेटा, तुम्हें तो पंजाब की जनता बहुत पहले ही नकार चुकी है।चुनाव प्रचार के समय जनता के हाथों हल्का प्रत्याशी जूतों का हार पहनने के लिए तैयार रहे।
@NCIBHQ आपका एक एक शब्द सच है।निजी बैंक की तुलना में सरकारी बैंक की सर्विस बहुत ही घटिया है।मैंने इसी से तंग आकर 15 साल पहले सरकारी बैंक का खाता बंद कर दिया था।निजी बैंक में आपको बैंक जाने की जरूरत ही नहीं होती।
बैंक वाले फिर हड़ताल पर हैं।
माँग क्या है? सप्ताह में 2 दिन अवकाश चाहिए।
सुबह 10 बजे बैंक आना –
चाय-पानी के बाद काम शुरू करना, दोपहर में 45 मिनट से 1 घंटे का लंच ब्रेक और फिर शाम होते-होते घर जाने की तैयारी।
त्योहारों की छुट्टियाँ अलग, बीमारी की छुट्टियाँ अलग और अब सप्ताह में दो दिन की छुट्टी भी चाहिए।
वेतन और सुविधाएँ भी कम नहीं हैं –
सवाल यह है कि जब बैंकिंग व्यवस्था का सीधा संबंध आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरतों से है, तो क्या काम के दिनों और छुट्टियों में बदलाव के साथ ग्राहक सेवा की गुणवत्ता और जवाबदेही पर भी उतना ही ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए?
पब्लिक सेक्टर के तुलना में प्राइवेट बैंक के कर्मचारी अक्सर कम वेतन और संसाधनों में भी ज्यादा ग्राहक संभालते दिखाई देते हैं। वहाँ ग्राहक सेवा, समयबद्ध काम और प्रतिस्पर्धा का दबाव काफी अधिक होता है।
वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कई ग्राहकों की शिकायत रहती है कि एक छोटे से काम के लिए भी उन्हें कई बार बैंक के चक्कर लगाने पड़ते हैं। पासबुक प्रिंट से लेकर छोटे-छोटे अपडेट तक के लिए कभी एक काउंटर तो कभी दूसरे काउंटर भेज दिया जाता है। घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी काम न हो पाए तो ग्राहक की परेशानी स्वाभाविक है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक आखिरकार आम आदमी की बैंकिंग जरूरतों को ध्यान में रखकर खड़े किए गए थे। गाँव-गाँव बैंकिंग पहुँचाने, छोटे किसानों, छोटे कारोबारियों और जरूरतमंद लोगों तक वित्तीय सेवाएँ पहुँचाने के उद्देश्य से।
आज जरूरत इस बात की है कि,
बैंक कर्मचारियों के अधिकारों और सुविधाओं के साथ-साथ ग्राहकों के समय, सम्मान और सुविधाजनक बैंकिंग के अधिकार को भी उतनी ही गंभीरता से देखा जाए।
@OfficeOfNG@dtptraffic@CPDelhi महोदय धारा 66/192 परमिट की शर्तों का उल्लंघन के अंतर्गत क्या पर्यटक वाहन के चालक का बिना यूनिफॉर्म चालान काटा जा सकता है या बिना यूनिफॉर्म के लिए किसी और धारा का प्रावधान है। अवगत करवाने की कृपा करें।
@Chandra30441109@DriverRajdhani@PMOIndia@nitin_gadkari तेज़ सड़कें बनाने की स्पीड का क्या फायदा जब ड्राइविंग स्मूथ ही न हो? KMP Expressway का हाल बहुत खराब है अनबैलेंस रोड, जॉइंट्स और गड्ढे! टोल चार्जेस तो बढ़ रहे हैं, लेकिन क्या यात्रियों को वैसी क्वालिटी और सेटिस्फेक्शन मिल
साथी सारथियों की आवाज़ — अब चुप नहीं बैठेंगे!
सीएनजी, पेट्रोल और डीज़ल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, महंगाई बढ़ रही है, लेकिन ऑटो-टैक्सी-कैब का किराया सालों से उसी जगह खड़ा है।
@CMODelhi
@chandigarh_admn@OfficeOfNG महोदय चंडीगढ़ प्रशासन जो कि नम्बर1 माना जाता है भारत देश में और उसकी तरफ से इतनी घोर लापरवाही19अगस्त से पहले वाहन निरीक्षक अधिकारी सेवानिवृत्त हो जाने के बाद आज तक नए अधिकारी की नियुक्ति नहीं और वाहन चालक घर बैठने पर मजबूर हैं
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@TransportDelhi@MORTHIndia@gupta_rekha@LtGovDelhi@FinancialXpress
टिप का विकल्प ऐप पर दिखा तो खबर बन गई, सुर्खियां बन गईं—क्योंकि इससे सरकार और कंपनियों पर सवाल उठते हैं।
लेकिन वर्षों से ड्राइवर कह रहे हैं कि मौजूदा किराया उनकी लागत से कम है, सोशल मीडिया पर लागत और कमाई के आंकड़े रख रहे हैं, सरकार और कंपनियों से सवाल पूछ रहे हैं—उसकी खबर कब बनेगी?
टिप जरूरी नहीं, यह बात सही है।
लेकिन क्या ड्राइवर की उचित कमाई भी जरूरी नहीं?
मीडिया से भी सवाल है—टिप दिखाई देती है, तो ड्राइवर की लागत क्यों नहीं दिखाई देती?
खबर वही क्यों जो सुर्खी बनाए, वह क्यों नहीं जो समस्या का समाधान मांगे?
विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश में चालक साथी के साथ हुई मारपीट की घटना निंदनीय है। संबंधित अधिकारी के विरुद्ध निष्पक्ष जांच कर कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। ड्राइवर का सम्मान और सुरक्षा सर्वोपरि है।
@NDUFCIndia #DriverJustice#DriverSafety
ADATTCU_ NDUFC _एवं राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा समिति के नेतृत्व में 23 फरवरी 2026 को परिवहन विभाग मुख्यालय राजपुरा रोड सिविल लाइंस दिल्ली सुबह 10:00 बजे का प्रदर्शन ऑटो टैक्सी चालकों के हितों के लिए किया जा रहा है जिसकी सूचना आपको दी जा रही है। @HMOIndia@LtGovDelhi@CPDelhi@ANI
मान्यवर ये घटना नियर सेक्टर 7 सोनीपत हरियाणा की है जहां पर अवैध रूप से कार्य होते हैं सरकारी काम करने वालों की पूरी वर्दी नहीं हैं लेकिन दूसरा पूरे नियम में होना चाहिए...इस पर संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई की जाए नहीं तो सारे आरोप आप पर होंगे कि ये अपराध आपके संज्ञान में हो रहे हैं।
रतन रंजन जी ब्लू टिक लिए घूम रहे हो और बात अज्ञानी वाली करते हो।खबरों को थोड़ा पढ़ा करो।जी एस टी टेट्रा पैक पर कम हुआ है पोली पैक नहीं।अब इन दोनों का फर्क समझे या वो भी समझायें।
GST reform से पहले भी अमूल दूध 500ml 35रुपए थे GST reform के बाद भी 500ml दूध 35 रुपए के फिर कौन सा GST reform में दूध सस्ता हुआ।
गाय भैंस पालने वाले किसान से जो दूध कंपनियां खरीदेगी वह दूध सस्ता हुआ क्या??