ईरान और इसराइल के बीच दुश्मनी आख़िर शुरू कब हुई और इसके पीछे की वजह क्या है?
(ये रिपोर्ट पहली बार अप्रैल, 2024 को पब्लिश हुई थी.)
रिपोर्ट: गिलर्मो डी ओल्मो
आवाज़: प्रभात पांडेय
एडिट: दीपक जसरोटिया
आज ऊर्जा ऑडिटोरियम में स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित 1224 नवनियुक्त विशेषज्ञों एवं सामान्य चिकित्सा पदाधिकारियों के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में शामिल हुआ। नवनियुक्त विशेषज्ञ एवं सामान्य चिकित्सा पदाधिकारियों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। मेरा विश्वास है कि सभी नवनियुक्त पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का अच्छी तरह से निर्वहन करेंगे।
हमलोग राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। आप सभी के सहयोग एवं ईमानदार प्रयासों से राज्यवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
पूरे देश को लकवाग्रस्त कर दिया है अपनी झूठी शान और बेईमानी से.. इनके लिए सत्ता में बने रहना देश और नागरिकों से सर्वोपरि है.. वैक्सीन को लेकर ज़बरदस्ती किया लोगों के साथ, अब लोग भुगत रहे है, कई आकस्मिक हार्ट अटैक इसके दुष्परिणाम देखे गये है, लेकिन इतने गुनाहों के बाद, देश को खोखला करने के बाद बस यही राष्ट्रभक्त भी बने घूम रहे है और इसे नया भारत बोलते है ये..
नेताओं की सुरक्षा में लगा भारत माता का एक बेटा ज़मीन पर बेहोश हो कर गिर पड़ा लेकिन मंच से भारत माता की जय के नारे लगते रहे! वो भी BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में जो कि देश के स्वास्थ्य मंत्री भी हैं! ये कैसे VVIP ‘प्रोटोकॉल’ है जो इतना असंवेदनशील है?
वेलकम पीके,
वेलकम टू हार्ड रियलिटीज!!
जनसुराज का कैम्पेन इस बार महागठबंधन या एनडीए से ज्यादा फॉलो किया। इसमे कुछ पीके में मेरी रुचि का योगदान था।
और कुछ मीडिया द्वारा बड़े पैमाने पर परोसे गए उनके इंटरव्यूज का भी।
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कैम्पेन दर्शनीय था, श्रवणीय था,
खूबसूरत था।
जो हम सुनना चाहते है- गांधी का नाम, सर्वधर्म समभाव, करप्शन पर वार, वंशवाद का विरोध, रोजगार, आर्थिक प्रश्न, पलायन, शिक्षा स्वास्थ्य.. पीके ने सब कहा।
अकेले लड़े सारी सीटो पर। जनता के बीच से "आम" उम्मीदवार दिए। गोदी मीडिया की ठुकाई कर, खूब तालियां बटोरी। शराबबंदी को स्कैम कहने की हिम्मत की। मय सबूत,विरोधियो को यूं घेरा, कि वे चूं करने की हालत में न थे।
तो पीके ने वैसा चुनाव लड़ा, जो हम जैसे तथाकथित बुद्धिजीवी, कांग्रेस या राजद को लड़ते देखना चाहते है।
रिजल्ट- जीरो बटे सन्नाटा!!
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उन्हें 3% वोट मिलने की खबर है। 99% उम्मीदवारो की जमानत जप्त हो गयी।
पॉलीटकल कंसल्टेंट के तौर पर जो रणनीतियां औरो के लिए कारगर रहीं, वही खुद उनको परिणाम न दे सकी। अब यहाँ हार्डकोर सँगठन और, दबंग कमीनो को साथ रखने की औरो की मजबूरी समझ आती है।
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हम अभी भी मध्ययुगीन फ़्यूडल सोसायटी हैं। शक्तिशाली से डरने, प्रेम करने, उसे समर्पण और समर्थन देने की आदत है। अपना घोड़ा जीतते देखना चाहते है, और जीतने वाले को अपना घोड़ा घोषित करते हैं।
यहां विजन, समाज या आर्थिकी, विचार बिंदु नही- बरियारी है। हिन्दू को मुसलमान पर, ब्राह्मण को हिन्दुओ पर, ठाकुर को वैश्य शूद्र पर, और शूद्र को अपने से नीचे वाले शूद्र पर वर्चस्व चाहिए।
देशव्यापी बीमारी है ये। वोक्कालिगा को लिंगायत और लिंगायत को वोक्कालिगा पर प्रभुत्व चाहिए। नगा को कुकी पर, कुकी को मैतेई पर चाहिए। भारत मूलतः शिक्षित, सूटबूट में लैपटॉप पकड़ा हुआ एक कबीलाई समाज है।
हम इसे प्रोग्रेसिव समझने की भूल करते हैं।
भाजपा नही करती।
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वो समाज की सच्चाई जानती है, उसे यूज करती है। फॉल्ट लाइन को गहरा करते हुए वोट लेना, और चुनाव जीतना आसान है। लेकिन जोड़ने की कोशिश, एक लंबा, दुखदाई और अक्सर निष्फल प्रयास है।
100 साल पहले, उस महात्मा ने, जो अक्सर पीके के पीछे तस्वीर में लगे दिखते है, इस सच्चाई को स्वीकारने से मना कर दिया था।
वे स्वप्न देखते थे।
जमीनी सच्चाइयों से अलहदा स्वप्न..
- ये देश एक है।
- हिन्दू मुसलमान एक है।
- सब जातियां, सब इंसान बराबर है।
- सबको यहां इज्जत से रहने का हक है।
ये झूठ था। पर गांधी ने मानने से मना कर दिया। जमीनी सचाइयां मानने से इनकार करना, जमीन से कटना कह सकते हैं। लेकिन गांधी ने, इन मायनो में जमीन से कटना ही पसन्द किया। लीडर जनता की कुंठाओ से रोशनी नही लेते।
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उनने अपनी रौशनी से इस कुंठित सोसायटी को रौशन किया। नेहरू, मौलाना, सुभाष, शास्त्री और तमाम चेले भी, उन्ही की तरह इस रियलिटी को स्वीकारने से इनकार करते रहे।
वतो गांधी सपने की तरफ .. मंथर ही सही, स्थिर गति से बढ़ता रहा। वो सपना, पूरा नही, अधूरा सही, सच हुआ। एक सम्विधान बना। देश ने अंगीकार किया।
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दूसरी धारा ने सामाजिक सच्चाइयों को स्वीकार किया। मिटती दरारों को खोजा। उसे उंगली डालकर चौड़ा किया। नफरत की खरपतवार उगाई। खूब खाद पानी डाला, और अब खरपतवार ही मुख्य फसल हो गयी है।
पीके, या दूसरे जो भी इन रियल्टीज को डिनाय करना चाहते है, मिटाना या घटाना चाहते है। प्रबुद्ध मुद्दों पर बात करते है- वे मौजूदा राजनीति के खेत मे खरपतवार हैं।
हंसी के पात्र हैं। अर्श से बेहद दूर, पीके को इस फर्श से, फिर शुरुआत करनी है।
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यह पेड वर्कर्स, मीडिया मैनेजमेंट, फंड मैनेजमेंट, स्ट्रेटजी मैनेजमेंट से नही होगा। पहले अपने अन्तस् की पूंजी चाहिए। आशा है कि उनमे होगी।
मैं उनकी सफलता, उनका सर्वाइवल चाहता हूँ। वे साहसी शख्स है, धारा से विपरीत चलने का माद्दा है। नया सोचने की बुद्धि है। पर शुभेच्छा तब तक, जब तक इसी धारा में-- भले 10 चुनाव हारकर--लगातार चलते रहे।
वे इस जाति धर्म की वास्तविकताओ से कटे रहें।
स्वप्न देखे। यक़ीन दिलाएं।
आइडिया ऑफ इंडिया के लिए लड़ें।
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पीके की पराजय यह भी बताती है कि टेक्स्टबुक शैली का राजनीतिक प्रयास काफी नही।
सामने वे लोग है, जो जनता की कुंठाओ से फ्यूल लेते है।सत्ता में है, संसाधन से लैस औऱ सिस्टम के किले में सुरक्षित..
और जो जनता की कुंठाओ से लड़कर, उसे नई राह दिखाना चाहते है, उन सबको एक संयुक्त सामाजिक अभियान की जरूरत है। जो आम जन को एजुकेट करे, उसे उसके भय और कुंठाओ में ऊपर उठाएं।
ये काम पीके के अकेले बस का नही। उन्हें दायरा बढाना होगा। विद्वान, प्रबंधक और बेहतर ज्ञान होने के अहंकार से बाहर आना होगा।
वेलकम पीके,
वेलकम टू हार्ड रियलिटीज!
दिल्ली की देशद्रोही जनता हमारी BJP सरकार से एयर पॉल्यूशन को लेकर कुछ ठोस करने की मांग कर रही थी.
हमारी BJP सरकार ने इनका सही से इलाज कराया. क्रांतिकारी बनने का भूत उतार दिया.
देशहित में कुछ दिन ज़हरीली हवा नहीं झेल सकते.. देशद्रोही कहीं के.
आपका दिन कैसा जाएगा ये एक हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी सुबह कैसी होती है और आप सुबह उठकर क्या करते हैं. अगर आप सुबह खाली पेट चाय कॉफ़ी पीते हैं, मोबाइल चेक करते हैं, नाश्ता नहीं करते या हर दिन अलग समय पर सोते और उठते हैं, तो फ़िट ज़िंदगी का ये एपिसोड आपके लिए है.
वीडियो: सुमिरन प्रीत कौर और देवाशीष कुमार
मुंबई अपहरण मामले के बंधकों का सेवन हिल्स अस्पताल में मेडिकल परीक्षण चल रहा है। बंधकों में एक वरिष्ठ नागरिक और एक नागरिक सहित कुल 17 लोग शामिल थे। सूत्रों के अनुसार, किसी को चोट नहीं आई है और प्रारंभिक परीक्षण और बयान के बाद उन्हें छुट्टी दे दी जाएगी
#ReporterDiary | @ritvick_ab
मध्य प्रदेश –
मंदसौर के कॉलेज में युवा उत्सव समारोह में आई छात्राओं के कपड़े बदलते हुए 4 छात्रों ने मोबाइल से फोटो खींचे।
ABVP के नगर मंत्री उमेश जोशी, नगर सह महाविद्यालय प्रमुख अजय गौड़ और हिमांशु बैरागी गिरफ्तार, जेल भेजे गए !!
अमरीका के राष्ट्रपति को तो नोबल नहीं मिला लेकिन वेनेजुएला में अमरीकी हितों के लिए काम करने वाली विपक्षी नेता María Corina Machado को नोबल मिल गया है शांति के लिए।
ह्यूगो शावेज से लेकर निकोलाई मादुरो तक अमरीकी आँखों को लगातार चुभने वाले नेताओं के समक्ष मारिया ने लगातार विपक्ष का प्रतिनिधित्व किया है।
ट्रम्प दुखी होंगे लेकिन अमरीकी डीप स्टेट खुश होगा।
बिहार SIR पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। चुनाव आयोग ने सुनवाई से एक दिन पहले अधिसूचना जारी कर दी! अधिसूचना जारी होते ही, मामला खत्म!
क्योंकि अधिसूचना जारी होने के बाद कोई अदालत चुनावी प्रक्रिया में दखल नहीं दे सकती ! #BiharSIR#BiharElections2025
▪️हाल ही में राजस्थान के सीकर, जयपुर, झुंझुनू, भरतपुर और बांसवाड़ा जिलों में खांसी की दवा पीने से दो बच्चों की मौत हो गई थी
▪️कुछ बच्चे और एक डॉक्टर गंभीर रूप से बीमार भी पड़े, किडनी तक फेल होने की खबर थी
▪️अब पता चला है कि केयसंस फार्मा कंपनी का कफ सिरप ‘डेक्स्ट्रोमेथोर्फन हाइड्रोब्रोमाइड’ ब्लैकलिस्टेड होने के बावजूद सरकारी अस्पतालों में ‘मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना’ के तहत धड़ल्ले से दिया जा रहा था
▪️2 साल में 40 बार इस कंपनी की दवा के सैंपल फेल हुए थे
👉बच्चों की जान नहीं बख्शने वाले दरिंदे हैं