"हम देखेंगे
लाज़िम है कि हम भी देखेंगे
वो दिन कि जिस का वादा है
जो लौह-ए-अज़ल में लिख्खा है
जब ज़ुल्म-ओ-सितम के कोह-ए-गिराँ
रूई की तरह उड़ जाएँगे
हम महकूमों के पाँव-तले
जब धरती धड़-धड़ धड़केगी
और अहल-ए-हकम के सर-ऊपर
जब बिजली कड़-कड़ कड़केगी
जब अर्ज़-ए-ख़ुदा के काबे से
सब बुत उठवाए जाएँगे
हम अहल-ए-सफ़ा मरदूद-ए-हरम
मसनद पे बिठाए जाएँगे
सब ताज उछाले जाएँगे
सब तख़्त गिराए जाएँगे
बस नाम रहेगा अल्लाह का
जो ग़ाएब भी है हाज़िर भी
जो मंज़र भी है नाज़िर भी
उट्ठेगा अनल-हक़ का नारा
जो मैं भी हूँ और तुम भी हो
और राज करेगी ख़ल्क़-ए-ख़ुदा
जो मैं भी हूँ और तुम भी हो"
--फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
बड़ी ख़बर 🔥
अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटियां बज रही हैं...
भारत की 47 सबसे चुनिंदा कंपनियों का 49 लाख करोड़ शेयर बाजार में इस वित्त वर्ष में भस्म हो गया है।
ये सभी निफ़्टी 50 की कंपनियां हैं, ये देश की प्रीमियम कॉर्पोरेट कंपनियां हैं। इनमें TCS जैसी भीमकाय कंपनी भी शामिल है, जिसके अकेले 8 लाख करोड़ डूबे हैं।
देश की सबसे ज्यादा रुतबे वाली कंपनियों का यह हाल है, बाकी का हाल और हश्र क्या होगा, सोचिए।
क्या यह शेयर बाजार के साथ-साथ अर्थव्यवस्था के लिए खतरे का संकेत है?
हर सेगमेंट की कंपनियां मात खा रही हैं... टेक हो या बैंक, FMCG हो या पेट्रोलियम कंपनी।
जब तक ये टॉप 50 कंपनियां अच्छा परफॉर्मेंस नहीं करतीं, विदेशी निवेशक निवेश नहीं करेंगे।
दिल्ली NCR महिलाओं के लिए इतना असुरक्षित हो चुका है कि एक नाबालिग बच्ची के साथ एक स्लीपर बस में 47 किलोमीटर तक गैंगरेप हुआ - ग्रेटर नोएडा से दिल्ली तक।
हैरानी की बात है कि पूरी दिल्ली या नोएडा पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। यह बस नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, दिल्ली का रिंग रोड, बॉर्डर - सब पार कर गई, बिना एक भी चेकपोस्ट पर रोके गए।
बस की सीटों पर पर्दे लगे थे, ताकि अंदर क्या हो रहा है कोई देख न सके। और अपराधियों में प्रशासन का कोई डर भी नहीं।
निर्भया के बाद इतने सालों में, इतनी घटनाओं के बाद भी ऐसी बसों की जाँच और निगरानी के नियमों का पालन क्यों नहीं हो रहा?
पर्दे सिर्फ़ उस बस में नहीं डाले गए थे - साल दर साल सरकार द्वारा प्रशासन की नाकामियों पर डाले गए पर्दों का नतीजा है कि देश की राजधानी में भी महिलाएं एक सुरक्षित सफर नहीं कर सकतीं।
और कितनी महिलाओं और बच्चियों के साथ ऐसा होना बाक़ी है, तब जाकर केंद्र और राज्य सरकारें इस व्यवस्था को ठीक करेंगी?
क्या अमित शाह के अधीन दिल्ली पुलिस और आदित्यनाथ के अधीन UP पुलिस की जवाबदेही तय की जाएगी? कोई गुंजाइश ही नहीं - इस अपराध पर भी एक पर्दा डाल दिया जाएगा।
जनता की आवाज उठाने पर पहले पुलिस द्वारा रास्ता रोका गया, फिर मुझे नेम किया और अब मेरे खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव..!
हरियाणा विधानसभा के इतिहास में यह पहला ऐसा अवसर है, जब सोशल मीडिया पर कही गई किसी बात को आधार बनाकर सदन के अंदर विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाया गया है। ऐसा उदाहरण हरियाणा विधानसभा के इतिहास में पहले कभी देखने को नहीं मिला।
कांग्रेस के युवा विधायकों की आवाज दबाने और उन्हें डराने के लिए भाजपा सरकार हर तरह के हथकंडे अपना रही है। लेकिन मैं साफ कहना चाहता हूं, मैं इस तानाशाही और दमन की राजनीति से डरने वाला नहीं हूं।
मैं नारनौंद विधानसभा के सवा दो लाख लोगों का प्रतिनिधित्व हरियाणा विधानसभा में करता हूं।
जब हमें और चुने हुए विपक्षी सदस्यों को विधानसभा के गेट पर रोका गया और नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा जी के साथ पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार किया गया, तब मैंने इस पूरे घटनाक्रम के साथ-साथ, अपने क्षेत्र और प्रदेश की जनता के हक की आवाज मजबूती से सदन में उठाई तो जब सरकार के पास मेरे सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं था, तो पहले मुझे सदन में नेम किया गया और अब मेरे खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पास किया गया।
जिस विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव का कोई औचित्य ही नहीं है, उसके जरिए सरकार विपक्ष के चुने हुए जनप्रतिनिधियों को डराने और उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।
लेकिन सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि विधायक की आवाज उसकी अपनी नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों की आवाज होती है, जिन्होंने उसे चुनकर विधानसभा भेजा है।
नारनौंद की जनता के हक की लड़ाई पहले भी मजबूती से लड़ी है और आगे भी पूरी ताकत के साथ लड़ता रहूंगा।
न डरेंगे, न झुकेंगे, जनता की आवाज बनकर सदन में लड़ते रहेंगे।
#नारनौंद_का_जस्सी
#जस्सी_का_नारनौंद
#HaryanaVidhanSabha
#jassipetwar
@BhupinderShooda@DeependerSHooda@INCHaryana
सरकार मोदी की पर उम्मीद सिर्फ राहुल गांधी से ही है इस बहन की।
बहन बनकर रक्षा बंधन पर गायक अंकित बालियान की पत्नी की भाई राहुल गांधी जी से गुहार।
ज्ञात हो प्रसिद्ध गायक अंकित बालियान की हत्या उत्तर प्रदेश में कर दी गई है।
ये वीडियो दिल्ली बीजेपी के हैंडल से जारी किया गया है। साथ में कहा गया है कि पांच सितंबर की सीजेपी की रैली के लिए ये दिल्ली पुलिस की तैयारी है।
ये मार्च में हिस्सा लेने की सोच रहे लोगों को सीधी धमकी है। बीजेपी की कोशिश है कि नौजवान डर कर आएं ही न और प्रदर्शन फ्लॉप हो जाए।
लेकिन सबसे ज़्यादा आपत्तिजनक और निंदनीय खुल्लमखुल्ला हिंसा के प्रयोग की वकालत है। नोट कीजिए, सत्तारूढ़ पार्टी में सब कर रही है।
छह साल का एक बिहारी बालक हुकूमत के ख़िलाफ़ विद्रोह पर है ! 15साल की एक बच्ची दिल्ली में मोदी को कायर बताकर चुनौती दे रही है ! 5 सितं.को कॉकरोच फिर सड़कों पर उतरने वाले हैं !विदेश यात्रा में इंडियन डायस्पोरा के सामने मुस्कुराते मोदी क्या वाक़ई उतने निश्चिंत हैं जितने नज़र आते हैं?
देश के हर दलित व्यक्ति का जन्म से मृत्यु तक, हर जगह, हर कदम अपमान किया जाता है।
उनकी जितनी बुलंद आवाज़ होती है, उनपर उतना तेज़ हमला होता है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी के साथ हल्द्वानी में जो भी हुआ वो "शुद्धिकरण" का नाम दे कर उनके खिलाफ़ छुआछूत है - और छुआछूत भारत के संविधान के अनुसार दंडनीय अपराध है।
इस बात को 20 दिन हो गए - मगर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई, कोई FIR दर्ज नहीं हुई।
नरेंद्र मोदी जी, देश के हर दलित व्यक्ति को आपकी यह दलित विरोधी विचारधारा साफ़ दिखाई दे रही है।
अब गेंद BJP के पाले में है - जल्द से जल्द SC-ST क़ानून के तहत FIR दर्ज हो, कार्रवाई हो और न्याय हो - वरना कांग्रेस पार्टी न्याय हासिल करना अच्छे से जानती है।
ये भयानक है।
बीजेपी और भी हिंसक हो गई है। जेन ज़ी के क़त्लेआम करने वाले संदेश दे रही है।
ठीक है कि घबराई हुई है और जेन ज़ी के मीम्स और रीव्स का जवाब आक्रामकता के साथ देना चाहती है,मगर क्या अपने ही हमवतनों के साथ इस वीडियो जैसा सलूक करेगी?
मोदी मंडली को एक बार ठहरकर सोचना चाहिए कि वे करने क्या जा रहे हैं। क्या वे अवाम को डराना चाहते हैं? अगर हां तो अगर वे न डरे तब क्या होगा? अगर उसने भी उसी की भाषा में जवाब दिया तो देश में क्या गृहयुद्ध नहीं छिड़ जाएगा? कहीं वह यही तो नहीं करना चाहती?
NCLT - “नेता-कंपनी लूट ट्रिब्यूनल”
किसान 50 हज़ार न चुकाए तो ज़मीन नीलाम हो जाती है। Salaried एक EMI न भर पाएं तो घर पर बैंक के गुंडे पहुंच जाते हैं। गरीब छात्रों को तो शिक्षा तक के लिए लोन नहीं मिलता।
मगर, चुनिंदा "मित्रों" के लिए बैंक का पैसा निजी संपत्ति है - कितना भी निकालो, जो मर्ज़ी चुकाओ।
मोदी सरकार ने देश में दो व्यवस्थाएं बना रखी हैं - एक चंद अरबपतियों के लिए, दूसरी बाक़ी सबके लिए।
हाल के सारे छात्र आंदोलन अगर बुद्धिजीवियों, मीडियाकर्मियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, माओवादियों और बॉलीवुड,आदि का ‘हिंदुत्व’ के ख़िलाफ़ ‘गठजोड़’ है ; ज़्यादा पढ़े-लिखे दिमाग़ी नक्सल हैं; तो देश में आने वाले दिन किस तरह के होने वाले हैं ?श्रवण गर्ग की बातचीत : https://t.co/LRIHgioRRe
शामली के ग्राम बंतीखेड़ा पहुंचकर स्व. अंकित बालियान के शोकाकुल परिजनों से मुलाक़ात कर उनकी पीड़ा सुनी और हर संभव सहयोग व न्याय का भरोसा दिलाया।
साथ ही राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी से अंकित के पिता जी की फोन पर वार्ता कराई। अध्यक्ष जी ने भरोसा दिलाया कि इंसाफ़ की इस लड़ाई में समाजवादी पार्टी पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है और उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।
महाराष्ट्र के छात्रों ने एक लड़ाई जीत ली है।
MPSC की ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा और पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द हुई - यह सरकार की मेहरबानी नहीं, उन छात्रों की जीत है जो मार्च में ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा के पेपर लीक के बाद से डटे रहे।
दबाव झेला, तानें सुने, महीनों इंतज़ार किया - पर आवाज़ उठाना नहीं छोड़ा। आप सब पर गर्व है।
पर याद रखिए - एक परीक्षा रद्द होना जीत है, न्याय नहीं। जब तक लीक कराने वालों को सज़ा नहीं मिलती, यह लड़ाई अधूरी है।
आगे और लड़ाइयां हैं। और हर एक में मैं आपके साथ हूं।
हमें इस पूरे system को ठीक करना है - ताकि हर बच्चे के लिए शिक्षा बेहतर हो, और मेहनत का दाम हर किसी को मिले।
#ChhatronKiGoonj
AMIT, IT’S DONE BRO. IT'S TIME TO GO! 👋
✊ SIGN THE PETITION TO DEMAND AMIT SHAH’S RESIGNATION FOR THE 20th JULY BRUTALITY ON STUDENTS‼️
📲 Scan the QR code or Visit 🌐 https://t.co/nikkx4XB06
लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष श्री @RahulGandhi और मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को संयुक्त पत्र लिखकर जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है।
Open-ended सवालों के जरिए जातियों की सही गिनती संभव नहीं है। एक ही जाति अलग-अलग नामों और उपजातियों में दर्ज हुई तो आंकड़े बिखरेंगे और सबसे बड़ा नुकसान OBC, अति पिछड़े और वंचित समुदायों को होगा।
हमारी मांग स्पष्ट है - मौजूदा प्रश्नावली रद्द हो, जातियों की प्रमाणित सूची के आधार पर नई प्रश्नावली बने और राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों व जनता से व्यापक परामर्श किया जाए।
तेलंगाना और बिहार के जाति सर्वेक्षणों की तरह, पहले से तैयार और प्रमाणित जाति सूची के आधार पर गणना इसका व्यावहारिक समाधान है।
जाति जनगणना सिर्फ होनी नहीं चाहिए,
सही भी होनी चाहिए।
🚨Protest brewing here in the US ahead of RSS chief Mohan Bhagwat’s visit.
US-based groups are mobilising against his August 29 New York event, demanding action over the RSS’s record on religious freedom.
The opposition is growing. 🇺🇸
#MohanBhagwat#RSS