पर्दे लगाकर ये कर रही थी दिल्ली पुलिस।
20 दिन से अनशन पर बैठे इंसान को स्ट्रेचर पर नहीं घसीट कर ले जाया गया।
मोदी जी इस पाप के लिए ये देश आपको कभी माफ नहीं करेगा।
અમદાવાદના રામોલમાં ફટાકડાની ફેક્ટરીમાં સર્જાયેલી દુર્ઘટનાના સમાચાર અત્યંત દુઃખદ છે. આ અકસ્માતમાં જીવ ગુમાવનારા મૃતકોના આત્માને પ્રભુ શાંતિ અર્પે તેવી પ્રાર્થના કરું છું અને આ દુઃખના સમયમાં તેમના પરિવારજનો પ્રત્યે મારી ઊંડી સંવેદના વ્યક્ત કરું છું.
આ દુર્ઘટનામાં ઈજાગ્રસ્ત થયેલા નાગરિકો ઝડપથી સ્વસ્થ થાય તે માટે પ્રભુને પ્રાર્થના.
સરકારને હું વિનંતી કરું છું કે મૃતકોના પરિવારોને ₹50 લાખ રૂપિયાની સહાય આપવામાં આવે.
ગુજરાતમાં આગળ આવી કોઈ ઘટના ના બને તેની જવાબદારી સરકારની છે તેથી હું સરકારને વિનંતી કરું છું કે આ બાબતે યોગ્ય પગલાં લેવામાં આવે.
इतना अहंकार ठीक नहीं है।
उन्हें जबरन उठाने की बजाय, मोदी सरकार को सोनम वांगचुक से बात करनी चाहिए थी।
कॉकरोच आंदोलन को कुचलने की बजाय, देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था सुधारो
सोनम वांगचुक के साथ ज़बरदस्ती मोदी सरकार की हार है।
तो पेपर लीक का ये समाधान दिया है मोदी जी आपने… पेपर लीक के ख़िलाफ़ जो आवाज़ उठाए उसे गुंडे भेजकर पिटवाओ और आवाज़ उठाने ही मत दो।
ये राजनीति नहीं कायरता है।
ग़ज़ब का गुंडाराज है..
पेपर लीक के खिलाफ चल रहे Sonam Wangchuk जी के शांतिपूर्ण अनशन को खत्म करने के लिए सरकार ने बातचीत का रास्ता नहीं चुना, बल्कि जबरदस्ती और गुंडागर्दी का सहारा लिया।
यह साफ दिखाता है कि सरकार छात्रों की आवाज़ से डर गई है।
हमने सुना था कि मुग़ल तानाशाह सत्ता से सवाल पूछने वालों पर कोड़े बरसाते थे…
हमने सुना था कि अंग्रेज़ों की पुलिस देश की आवाज़ दबाने के लिए अपना विरोध दर्ज करा रहे आम लोगों पर लाठियाँ बरसाती थी…
पर नरेंद्र मोदी की पुलिस तो आज़ाद भारत की पुलिस है।
फिर वह युवाओं की आवाज़ को इतनी बेरहमी से क्यों दबा रही है?
आज सोनम वांगचुक, अभिजीत दीपके और ये सारे युवा आपके बच्चों के भविष्य के लिए लड़ रहे हैं।
अब घर बैठने से काम नहीं चलेगा। अब सबको एक होकर सड़कों पर उतरना होगा। तभी इस देश में कुछ बदलेगा।
उठो, चलो जंतर मंतर।
'जनता की शिकायत पेटी' 🚨
दिल्ली के तमाम इलाकों से लगातार हर रोज गंदे पानी की शिकायतें मिल रही हैं लेकिन भाजपा सरकार में कोई सुनवाई नहीं है।
ये है दिल्ली का मौजपुर – यहां के लोग काले पानी की सजा भुगत रहे हैं...