घोसी लोकसभा के पूर्व बसपा सांसद अतुल राय ने ग़ाज़ीपुर की मोहम्मदाबाद सीट से अपनी सक्रियता तेज कर दी हैं हालांकि अतुल राय लगातार काफ़ी समय से सीट पर क्षेत्र के लोगों के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज करा उनके हर सुख दुख में शामिल हो रहे हैं, माना जा रहा है कि यहाँ उनके कोई परिवार का सदस्य मैदान में उतरने जा रहा है और उन्होंने कहा है कि जो उनकी नेता बहनजी आदेश देंगी उन्हें वो स्वीकार रहेगा।
कल पूर्व सांसद अतुल राय द्वारा मोहम्मदमाबाद में कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें काफ़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और कल की साधारण सी सभा से सपा भाजपा के हाथ पैर फूलने लगे हैं।
आज मीडिया एंकर/पत्रकार चित्रा त्रिपाठी ने एक डिबेट के दौरान राजनीतिक विशेषज्ञ सतीश कुमार से सवाल करते हुए कहा कि मायावती जी ने क्यों नहीं मॉडल यूनिवर्सिटी बनवाए सिर्फ पार्क ही क्यों? चित्रा त्रिपाठी को अच्छे से जानकारी है लेकिन वह जान कर भी अनजान क्यों बन रही हैं यह बहुजन समाज अच्छे से जानता है लेकिन फिर मैं बसपा और बहन कुमारी मायावती जी का सिपाही होने के नाते बता दूँ कि बहन कुमारी मायावती जी ने अपने शासनकाल में ये विश्वविद्यालय बनवाएँ थे जिनके नाम आप के बीच में रख रहा हूँ।
1. गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय
2. मान्यवर कांशीराम उर्दू-अरबी-फारसी विश्वविद्यालय
3. मान्यवर कांशीराम कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय
4. डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय
और भी कई शैक्षिक संस्थान बसपा सरकार में बहन कुमारी मायावती जी ने बनवाए जिनकी जानकारी का अभाव है लेकिन आप गूगल कर लीजिए आपको और विश्वविद्यालयों के नाम मालूम पड़ जाएंगे जो मायावती जी ने बनवाए थे।
बाकी आप अगर आसमान से भी नीचे देखोगे तो आपको बहन मायावती जी के शासनकाल में बने विश्वविद्यालय नज़र आएँगे।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड व पंजाब में विधानसभा का आमचुनाव अब बहुत नज़दीक है और ये तीनों ही राज्य, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के ’बहुजन समाज’ को ’शोषित से शासक वर्ग’ बनने हेतु उनके आत्म-सम्मान एवं स्वाभिमान के कारवाँ को आगे बढ़ाने के लिये बी.एस.पी. पार्टी व बहुजन मूवमेन्ट के लिये अति-महत्वूपर्ण ही नहीं बल्कि बहुत विशेष भी हैं, जिसको ध्यान में रखकर ही बी.एस.पी. के सभी छोटे-बड़े कार्यकर्ता, पदाधिकारी, पार्टी के समर्थक एवं शुभचिन्तक सभी लोग पूरे तन, मन, धन अर्थात हर प्रकार की कुर्बानी देकर पूरे जी-जान से यहाँ सत्ता प्राप्ति का अच्छा रिज़ल्ट लाने की मुहिम/मिशन में डटेे हुये हैं।
2. ऐसे समय में जबकि ख़ासकर विरोधी पार्टियों तथा जातिवादी तत्वों आदि से ’बहुजन समाज’, बी.एस.पी. पार्टी व ’बहुजन मूवमेन्ट’ को, बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के समय जैसा ही ख़ासकर आरक्षण आदि को लेकर कड़े चैलेन्जों का सामना है, देश की सर्वमान्य अम्बेडकरवादी पार्टी बी.एस.पी. को सर्वसमाज के सभी लोगों से सहयोग की अपील है और इस क्रम में ’बहुजन समाज’ के हर अंगों में से ख़ासकर दलित समाज के लोगों को निजी या पारिवारिक स्वार्थ में ऐसा कोई भी कार्य नहीं करना चाहिये जो इसमें बाधा उत्पन्न करे और इतिहास उन्हें माफ ना कर पाये।
3. इसीलिये बी.एस.पी. की शीर्ष नेतृत्व इन बातों का ख़ास ध्यान देते हुये भूले-भटके हुये लोगों को उनके अचार-व्यवहार आदि को ध्यान में रखकर पार्टी में शामिल कर रहा है, और जो लोग इसकी राह में थोड़ा भी रुकावट बनने की कोशिश कर रहे हैं, उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई आदि भी की जा रही है, जिसका चर्चित उदाहरण हैं बी.एस.पी. के राज्यसभा सांसद भी रहे श्री अशोक सिद्धार्थ।
4. पार्टी ने इनको सुधरने का एक नहीं बल्कि कई बार मौक़ा दिया, लेकिन बी.एस.पी. के मिशन से अधिक इन्होंने अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ व महत्वकांक्षा आदि को ज़्यादा महत्व दिया, जिसका ख़ामियाज़ा इनके साथ-साथ इनके दामाद श्री आकाश आनन्द को भी भुगतना पड़ा है।
5. कुल मिलाकर इन्होंने अपने निजी स्वार्थ में श्री आकाश आनन्द व बी.एस.पी. मूवमेन्ट की भी कभी सही से परवाह नहीं की है, जबकि इसके लिये श्री अशोक सिद्धार्थ को औरों से कहीं अधिक बढ़चढ़ कर त्याग-तपस्या व कुर्बानी की मिसाल पार्टी व सामाज के सामने देनी चाहिये थी, किन्तु ऐसा ना होकर ठीक इसके उलटा ही होता रहा है।
6. ऐसे में बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट के हित के साथ-साथ ख़ुद उनके परिवार एवं अपने दामाद श्री आकाश आनन्द के भविष्य को ध्यान में रखकर श्री अशोक सिद्धार्थ के पास अभी भी मौक़ा है कि वे अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षा को त्याग कर व निजी स्वार्थ आदि से ऊपर उठकर राजनीति से पूरी तरह से संन्यास ले लें। तब ऐसी स्थिति में श्री आकाश आनन्द का फ्री होकर पार्टी में काम करना संभव होगा और तभी फिर पार्टी उनको उनकी ज़िम्मेदारियाँ वापस देने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी, ताकि वे पार्टी में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें, ऐसी पार्टी में आम राय है।
बाबू सिंह कुशवाहा और नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने बसपा सरकार रहते गरीबों की नही सुनी थी,
इसलिए आदरणीय बहनजी ने उन्हें निकाल दिया था,
बाद में उन लोगों ने बहनजी पर ही उल्टा आरोप मढ़ने की कोशिश की थी,
बहनजी हमेशा सही होती हैं।
@Mayawati@ramjigautambsp
दो चार पदाधिकारी बेइमानी थे,
परन्तु बहनजी सदैव समाज की हितैषी रही हैं,
वोटर और कार्यकर्ता आज भी बसपा के साथ डटकर खड़ा है, कारण है बहनजी का फर्म कमिटमेंट!
गुलाब सिंह प्रजापति जी की बात बहनजी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी मेरी,
@Mayawati
कांग्रेस का टिकिट फार्मूला शुरू हुआ है जिसमे उम्मीदवार के बैंक खाते में 20 लाख रुपए होना अनिवार्य और दो लाख रुपए पार्टी फण्ड में जमा कराने होंगे तब जाकर टिकिट मिलेगा।
ये खबर उन लोगों के मुँह पर दे मारो जो कहते है कि बसपा टिकिट के बदले पैसे लेती हैं।
चुप कर मूर्ख। 😡
ये सब तेरे ओरिजनल पोस्ट हैं। अभी भी पोस्ट पड़े हुए हैं। कुछ व्यूज और अपनी राजनीतिक दुकान चलाने के लिए कब तक अपनी ही नन्ही बच्ची का इस्तेमाल करोगे?
बेशक, निशु के मामले में हम लफंगे स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ हैं, लेकिन बतौर पिता तुम एक घटिया इंसान हो।
एक फोटो में बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष है वही दूसरी फोटो में समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष है
फर्क इतना है की बसपा के प्रदेश अध्यक्ष समाजवादी पार्टी से पहले ही कौशांबी के पीड़ित परिवार से मिले और पार्टी की तरफ से परिवार को आर्थिक सहयोग भी किया
वही बसपा के जाने के बाद समाज वादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मिलने गए और फोटो बाजी की परिवार को 2 लाख दिए और फोटोबाजी की समाज वादी समर्थक 2 लाख रूपये के गुण गान गा रहे!
यही फर्क है बसपा को सपा में बहुजन समाज पार्टी दिखावा नहीं करती कार्य करती है
वही सपाक के लोग कही जाती है तो पहले फोटो सूट..
जब पत्नी घर पर बैठे-बैठे पति की कमाई खर्च करे, यह “नॉर्मल” है। लेकिन जब पत्नी कमाए और पति किसी वजह से न कमा पाए तो तुरंत उंगली उठी।
फेमिनिस्ट सालों से कहते हैं कि roles reverse हो सकते हैं, पति घर संभाले, पत्नी कमाए।
लेकिन जब सच में role reverse हुआ, तब दिक्कत कहाँ से आ गई? तो क्या हुआ वो बिना कमाए फुटबॉल खेलता था, यह तो कमा रहीं थीं।
सीधी बात—समाज पुरुष से कमाने की अनिवार्यता चाहता है।चाहे उसके हाथ में पैसा हो या न हो, उसे “कमाने वाली मशीन” ही बने रहना है।
और जब वह कमाने की जगह घर संभाले, तो वही लोग उसे निकम्मा कहने लगते हैं।
फिर बराबरी का ढोंग किसलिए?
Role reversal तभी तक ठीक है, जब तक वो सिर्फ़ किताबों और बहसों में रहता है।
सीधा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित कर सवाल पूछते हुए किसी टीवी एंकर को लंबे अरसे बाद सुन रहा हूँ। सहसा भरोसा नहीं हो रहा! ये Arnab Intelligence है या Artificial Intelligence! 🫣
आज की पढ़ी-लिखी पीढ़ी का अनपढ़ सच!
इस तस्वीर को देखकर रोना आ रहा है। एक मासूम बच्ची अपने स्कूल टूर के साथ वृद्धाश्रम (Old Age Home) गई थी, यह सोचकर कि वहां अजनबियों की मदद करेगी। लेकिन वहां उसे अपनी ही 'दादी' मिल गईं!
घरवालों ने बच्ची से झूठ बोला था कि दादी गाँव/रिश्तेदार के घर गई हैं, जबकि असल में उन्हें घर से निकाल दिया गया था। दादी को देखते ही बच्ची उनसे लिपट गई और आंसुओं का सैलाब फूट पड़ा।
उस बेटे-बहू को शर्म आनी चाहिए जिन्होंने अपनी 'जन्नत' को घर से बेघर कर दिया।
याद रखना, बच्चे सब देख रहे हैं... कल जो आप कर रहे हैं, वही आपके साथ भी होगा।
बुजुर्ग बोझ नहीं, धरोहर हैं। अगर आप सहमत हैं, तो "Respect Elders" लिखें।
When the country is suffering from a severe health crisis due to air pollution, Govt should be working to reduce it
But instead, Govt is destroying Aravalli hills, the only natural protection for Delhi & much of North India to benefit mining mafia 🤡
अठे काम करस्यो तो छाला पडसी…
और पाखंड करस्यो तो माला पडसी…!!!
करोड़ों खाल्यो तो माफ़ हो जासी….
दस हज़ार खाल्यो तो घरे ताला पडसी….!!!
वाह राहगीर भाई… शानदार 👌
अरावली सिर्फ़ पहाड़ नहीं, हमारा भविष्य है।
अरावली उत्तर भारत की जीवन रेखा है—जो रेगिस्तान को रोकती है, पानी बचाती है और पर्यावरण संतुलन बनाए रखती है। आज काग़ज़ी परिभाषाओं के ज़रिये अरावली को छोटा किया जा रहा है, जिससे खनन और मुनाफ़े का रास्ता खुलेगा।
अगर अरावली कमजोर हुई तो भूजल सूखेगा, तापमान बढ़ेगा और रेगिस्तान शहरों की ओर बढ़ेगा। यह नुकसान आज का नहीं, आने वाली पीढ़ियों का है।
यह विकास नहीं, भविष्य के साथ समझौता है।
अब भी समय है—अरावली को बचाइए।
#अरावली_बचाओ #प्रकृति_बचाओ #भविष्य_सुरक्षित
अरावली कोई पहाड़ नहीं,
यह साँसों की दीवार है, जीवन का कवच है।
भाजपा सरकार की नीतियाँ
पत्थरों की खुदाई नहीं, बच्चों के भविष्य को चुपचाप खत्म कर रही है।
अगर अरावली टूटी,
तो कल का भारत सूखा और असहाय होगा।
अरावली को बचाना
देश को बचाने जैसा ही है।
#SaveAravali#SaveAravaliHills