1 लाख 32 हजार करोड़ का कच्चा तेल विदेशों से आया, जिसमें से 52 हजार 876 करोड़ का तेल दूसरे देशों को बेच दिया गया 🤔😱
जनता से पेट्रोल डीजल कम उपयोग करने की अपील करने वाले ने, कंपनी से तेल निर्यात न करने की अपील क्यों नहीं की ??
@aajtak महोदय मई 31 में तक यूपी में बड़ी मात्रा में सरकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण किए जाने हैं यदि ऐसा है तो आवश्यक स्थानांतरण को छोड़ते हुए अन्य शेष स्थानांतरण पर पूर्ण पाबंदी लगाई जानी चाहिए सरकारी धन के अनावश्यक खर्चे से बचेंगे
#शर्मनाक 😡
शायद इसीलिए हमारे देश में थार के ड्राइविंग सीट पर बैठने वाले अधिकतर व्यक्ति जिम्मेदार ड्राइवर कम नशेड़ी ज्यादा माने जाते हैं। जितनी तगड़ी गाड़ी उतना ही तगड़ा नशा।
@NCIBHQ@DuttYogi भले ही थार एक स्टाइलिश एसयूवी हो पर यह गुण्डों , अपराधियों और उचक्कों की पसंदीदा गाड़ी बन चुकी है।
निश्चित रूप से @anandmahindra ने भी कभी नहीं सोचा होगा कि उनकी ड्रीम एसयूवी इतनी बदनाम हो जायेगी...
😡🤔
हाईकोर्ट की टिप्पणी ने एक बार फिर सरकार की दोहरी नीति को उजागर कर दिया है। जब बात विधायकों की आती है तो पेंशन देने में कोई हिचक नहीं होती, लेकिन वही सुविधा कर्मचारियों को देने में सरकार पीछे हटती नजर आती है। यह भेदभाव सिर्फ नीतिगत नहीं, बल्कि नैतिक सवाल भी खड़ा करता है।
नई पेंशन योजना को बेहतर बताने वाली सरकार खुद ही उस पर पूरा भरोसा दिखाने से बचती दिख रही है। अगर यह योजना इतनी ही अच्छी है, तो इसे विधायकों और सांसदों पर लागू क्यों नहीं किया जाता? इससे साफ होता है कि जो व्यवस्था आम कर्मचारियों के लिए बनाई गई है, उस पर खुद नीति निर्माता ही आश्वस्त नहीं हैं।
कर्मचारियों की सहमति के बिना उनके भविष्य की जमा पूंजी को बाजार के हवाले करना भी गंभीर चिंता का विषय है। शेयर बाजार की अनिश्चितता के बीच कर्मचारियों की जीवनभर की मेहनत को जोखिम में डालना एक असंवेदनशील फैसला लगता है। सरकार इस पर स्पष्ट जवाब देने से बचती रही है, जिससे अविश्वास और बढ़ता जा रहा है।
हड़ताल को लेकर भी अदालत की टिप्पणी यह दिखाती है कि समस्या कहीं गहरी है। जब कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हों, तो यह संकेत है कि संवाद और समाधान की प्रक्रिया पूरी तरह विफल हो चुकी है। सरकार की चुप्पी इस संकट को और गंभीर बना रही है।
अगर यही रवैया जारी रहा, तो यह मुद्दा सिर्फ पेंशन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे सरकारी तंत्र में असंतोष और अविश्वास को जन्म देगा। जरूरत है कि सरकार पारदर्शिता और समानता के सिद्धांत पर काम करे, नहीं तो यह असंतुलन आने वाले समय में बड़ा आंदोलन बन सकता है।
प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन सख्त,सीएम से की गई मांग,किताबों की कीमतों के लिए सख्त नियम बनें साथ ही
हर साल नई किताबों की प्रथा पर लगे रोक ।
#uttarpradesh#school#HC
हमारे देश के नेता एक दूसरे को पार्टी से बाहर करते, गए उधर नेपाल में पूरा education सिस्टम ही बदल दिया गया ।
जब बालेंद्र शाह नेपाल के वर्तमान प्रधानमंत्री बने हैं,तब से वह एक्शन mode में है!
नेपाल में nursary से लेकर के 5 वीं तक कोई भी exam नहीं होंगे ! स्कूल कालेजों का नेपाल सिर्फ अब नेपाली भाषा में होगा !
नेपाल में सभी प्राइवेट coching centre बंद कर दिए गए है ,नेपाल की मौजूदा सरकार सस्ते में छात्राओं को कोचिंग सुविधा उपलब्ध करवाएगी
नेपाल में student politics पूरी तरह से बैन करने की तैयारी में है, यानी अब छात्र नेतागिरी नहीं करेंगे पढ़ाई करेंगे ।
आपको क्या लगता है भारत में भी कभी ऐसा होगा ?
@KumarSachi22718 डिलीवरी कंपनियों को को चाहिए कि ऐसी सोसाइटी जिसमें डिलीवरी बॉय को लिफ्ट यूज करने से रोका जाता है उसेब्लैक लिस्ट कर देना चाहिए लोग खुद मार्केट जाएं और खरीद कर लाएं
मोदी सरकार ने 𝟏𝟎 वर्षों में पूंजीपतियों का ₹𝟐𝟔 लाख करोड़ रुपए का लोन और कर्ज माफ किया है।
बट्टे खाते में डाले गए इन ₹𝟐𝟔 लाख करोड़ में से किसानों, मजदूरों और गरीबों का कोई ऋण माफ नहीं किया।
जिन पूंजीपति मित्रों का ₹𝟐𝟔 लाख करोड़ का लोन माफ किया है उनमें से कोई भी 𝐒𝐂/𝐒𝐓 और 𝐎𝐁𝐂 नहीं है।
₹𝟐𝟔 लाख करोड़ की कर्जमाफी का फायदा उठाने वाले कॉरपोरेट्स और पूंजीपतियों की सामाजिक पृष्ठभूमि की जाँच करनी चाहिए।
छात्र, किसान, मजदूर और गरीब अपने बच्चों की पढ़ाई और शादी के लिए ₹𝟓 हजार का भी लोन चुकता करने में देरी कर दे तो सरकारी तंत्र और बैंकिंग सिस्टम उनकी गर्दन पर पैर रख उसकी वसूली करते है। इसके बदले ये किसानों की गाय-भैंस तक खोल लेते है लेकिन पूंजीपतियों का कुछ नहीं बिगाड़ेंगे.