This is so true. Hear me out.
Recently, I was on a foreign trip and wanted to rent a bike to explore an island.
The rental guy asked, "What's your nationality? I need an ID."
I showed him my Indian passport.
He said, "Sorry sir, that's just a travel document."
I showed him my Aadhaar card.
He said, "Nope, that won't work either."
Then I pulled out my BJP membership card.
He immediately handed me the keys and said,
"Sir, you're a BJP member? Then you're definitely Indian. No other documents needed. I trust you."
Got the bike instantly.
The longest serving Prime Minister in the history of Independent India - Shri Narendra Damodardas Modi !
Prime Minister to 145 Crore Indians. Father of Hindu Renaissance in India.
Kriyayogi.
Charismatic Leader of Men.
In current Indian Politics, the only way India can get a new Prime Minister - if Mr Modi decides to step down. No Man can Defeat Him!
He is INVINCIBLE !
#NarendraModi
@NewsAlgebraIND Truly sad this is not my sanatan they follow, even if it's your enemy we sanatanis always believe in kindness. Please help each and every thought they are against us,
@_sayema What is hilarious, praying to god is hilarious? So doing namaz is hilarious? Doing puja us hilarious? Are you making fun of people for praying? Now don't block me because you can't reply. Show me some democracy
@RanaAyyub It's obvious we don't want to break any relationship with anyone, the time you will think about country first, you will be a true human. It's as similar as Gulf nation banned dhurandhar and other indian movies as they don't want yo break relations with Pakistan.
A cloud kitchen in Sector 66A, Mohali is a reminder that some of the most powerful stories don’t need words.
Run by a deaf and mute couple, it thrives on sheer determination and teamwork—while their young son becomes their voice.
🚨 खुरपेंच टीम की तहक़ीक़ात
वोट चोरी का मुद्दा तो उठा लोकतंत्र बचाने के नाम पर…
लेकिन ट्रेस कहाँ से मिले? 👉 Myanmar से!
अब सोचिए—
•क्या हमारी राजनीति अब पड़ोस के वाई-फ़ाई से चल रही है?
•प्रेस कॉन्फ़्रेंस से लेकर सोशल मीडिया तक सब ready-made script थी?
•बड़े इन्फ़्लुएंसर साहब लोग कहीं free में proxy server तो नहीं बन गए?
और हां… अगर ये सब सच है तो फायदा किसका?
👉 जनता का तो पक्का नहीं!
कहीं ऐसा तो नहीं कि वोट चोरी का नैरेटिव सिर्फ़ एक नया “imported product” है— जो घरेलू बाजार में धड़ल्ले से बिक रहा है?
अब जवाब तो बनता ��ै, वरना लोकतंत्र का पासवर्ड भी Myanmar से ही रिसेट हो जाएगा। 🔑🇮🇳
म्यांमार में बैठ कर राहुल की वोट चोरी का प्रेजेंटेशन कौन बना/बनवा रहा था?
राहुल गाँधी जब अमेरिका के कॉलेजों में, कैम्ब्रिज कॉलेज की कैंटीन में या अन्य विदेशी सभागारों में यह पूछते हैं कि ‘भारत में लोकतंत्र की हत्या हो रही है और यूरोप-अमेरिका देख रहा है, कुछ करता क्यों नहीं’, तो उनकी आशा होती है कि वो उनके स्वप्न को पूरा करने में सहायता करें।
वह स्वप्न क्या है? वह स्वप्न है सत्ता में ऐसे नहीं आ सकते, तो वैसे आ जाएँ। चुनाव जीत नहीं पा रहे, हारने को मोरल विक्ट्री बताते हैं, और सुप्रिया हाथ हवा में लहराती है, कभी सोशल मीडिया की खरीदी गई रीच के कारण उन्हें लोकप्रिय मान लिया जाता है।
ऐसे में कई उपद्रवों को इनका समर्थन मिलता रहा: शाहीन बाग, किसान आंदोलन, पहलवान आंदोलन, किसान आंदोलन २.०, ईवीएम हैकिंग नैरेटिव आदि। इसी में अगला और लेटेस्ट है: वोट चोरी।
हालाँकि, राहुल गाँधी की मानसिक क्षमता इतनी है नहीं कि वो नित नए नैरेटिव गढ़ सके, तो उन्हें विदेश से हेल्प की आवश्यकता पड़ती है। ‘वोट चोरी’ में भी @khurpenchh ने एक खुलासा किया है जिसमें दिखता है कि उन्हें जो पढ़ना था, वो कोई और लिख रहा था।
उनका प्रेजेंटेशन म्यांमार में बैठे किसी व्यक्ति ने, भारत में बैठे किसी व्यक्ति के साथ बैठ कर बनाया, यह उस फाइल के मेटाडेटा को पढ़ने पर दिख रहा है। यही कारण है कि दूसरों का लिखा पढ़ने वाले राहुल, प्रोजेक्टर की लाइट जाने के बाद स्क्रीन न चलने पर, एक शब्द नहीं बोल पा रहे थे।
म्यांमार में कौन है? मलेशिया में कौन है? थाइलैंड में कौन है? थाइलैंड में भारतीय पासपोर्ट से घुस कर, क्या ब्रिटिश पासपोर्ट के प्रयोग से कोई बाहर जा सकता है? यदि हाँ तो कहाँ, और क्यों?
क्या भारत के LoP सरकार को वापस आ कर यह जानकारी देते हैं कि वो विदेश यात्राओं पर क्यों निकलते हैं, किस से मिलते है? क्या यह छुट्टी मात्र है? क्या वर्ष भर में साठ विदेश यात्राएँ छुट्टी मात्र होती हैं?
नेपाल में जो हो रहा है, बांग्लादेश में जो ��ुआ, उसी की आशा में कॉन्ग्रेस समर्थकों के ट्वीट देख लीजिए। वो चाहते हैं कि हमारी संसद में आग लगा दी जाए। आग लगाने के लिए चिंगारी चाहिए।
राहुल गाँधी वह मशाल स्वयं नहीं लेना चाहते। इसी कारण से ऐसे नैरेटिव बनाए जाते हैं जहाँ युवा वर्ग उग्र हो जाए क्योंकि उसे आधी सूचना दी जाती है। युवाओं को भड़काना सबसे आसान है, विद्यार्थियों को सड़कों पर लाना सबसे आसान है।
‘भारत के भविष्य’ ��े नाम पर सोशल मीडिया के धुरंधर पटकथा लिखते हैं, उन्हें उकसाते हैं कि उनका रक्त उबल क्यों नहीं रहा है। वो जानते हैं कि छात्र यदि जूते में स्मोक बम ले कर संसद में भी उतर जाता है, तो भी पुलिस कुछ नहीं करेगी। उसे वो भगत सिंह बना देंगे।
यह एक प्रोजेक्ट है जो विदेश से संचालित है। आज के खुलासे में केवल एक सूत्र पकड़ा गया है जो संभवतः इन्होंने सोचा नहीं होगा। पर आप सोचिए, कि विदेशी धरती से कैरोसीन छिड़��ने की बातें करने वाले, क्या सत्ता से इतने लम्बे समय दूर रह सकेंगे जबकि उनके आस-पास लाख-पचास हजार की संख्या में ‘छात्र’ प्रधानमंत्री की ब्रा ले कर भाग रहे हैं, संसद को आग लगा रहे हैं?
खुरपेंच की रिपोर्ट नीचे संलग्न है।