इशू प्रताप सिंह का आरोप है कि ठाकुर जाति से होने के कारण भीम आर्मी से जुड़े कुछ लोगों द्वारा उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। उनके अनुसार, घर में घुसकर मारपीट का प्रयास, राह चलते परेशान करना तथा फर्जी SC/ST एक्ट और महिला उत्पीड़न के मुकदमों में फंसाकर जेल भेजने की धमकियां
हनुमान अंश के इस गीत के माधुर्य को महसूस कीजिए 😍 इस फिल्म ने भावनाओं के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं, इस फिल्म को देखते समय आपके नेत्र झरना भी बन सकते हैं 🥲
यदि आपने नहीं देखी है तो जाइए जाकर देखिए अद्भुत,अकल्पनीय,अद्वितीय 🔥 🙌🙏
मथुरा के अमित कुमार, जो द ललित समाज से आते थे
उन्होंने एक्सिस बैंक से घर बनाने के लिए 10 लाख रुपये का होम लोन लिया था
लोन की किस्तें समय पर जमा नहीं होने के बाद बैंक ने बकाया राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू की परंतु अमित ने बैंक अधिकारियों के खिलाफ ही S-Sea और S-Tea ac-t के तहत मामला दर्ज करवा दिया
चीज़ें बहुत गलत हो रही हैं समाज में बहुत ही गलत
इसके जवाब में उनके पास तर्क क्या है कुछ नहीं
बस थेथरई है कि आज से 5000 साल पहले हमें पानी नहीं मिला था इसलिए ये सब कुछ जायज़ है
🚨 सोनम वांगचुक की बातों से कांग्रेस के 70 सालों का सच सामने आ गया।
70 साल सत्ता में रहकर भी स्कूलों की हालत नहीं सुधार पाए, और अब हर समस्या का ठीकरा मौजूदा सरकार पर फोड़ना है।
अब बौने को कौन समझाए—राजनीति करने से इतिहास नहीं बदलता।
जिस आवाज़ ने कभी ट्रेनों में परिवार का पेट पाला, आज वही आवाज़ देश दुनिया के दिलों तक पहुंच रही है।
सुनील लोधी जन्म से ही दृष्टिबाधित है उन्होंने तमूरा की धुन और भक्ति के सुरों से अपनी अलग पहचान बनाई। फ़िल्म हनुमान अंश में उनकी आवाज़ ने उन्हें नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।
ये सिर्फ एक गायक की सफलता नहीं, उस हौसले की जीत है जिसने परिस्थितियों के आगे कभी हार नहीं मानी।
सुनील भाई को दिल से सलाम।
पिछले कुछ दिनों से एक चीज़ देखकर मन बहुत खुश है। बुंदेली बोली अचानक उस दायरे से बाहर निकलकर सुनाई दे रही है, जहाँ हम उसे वर्षों से सुनते आए थे।
उत्तर भारत की क्षेत्रीय बोलियों की बात होती रही तो भोजपुरी ने बहुत बड़ी जगह बनाई, अवध और पूर्वांचल की बोलियाँ फिल्मों और गीतों के माध्यम से लगातार सुनाई देती रहीं। लेकिन बुंदेली की अपनी मिठास, अपना ठेठपन और अपनी अद्भुत अभिव्यक्ति होने के बावजूद वह लंबे समय तक मुख्यधारा से कुछ दूर ही रही।
बुंदेली कभी बिल्कुल अनसुनी नहीं थी। देशराज पटेरिया जैसे अद्भुत लोकगायकों ने इसे वर्षों तक जीवित रखा। हमारे इलाके में उनके गीत घरों, मेलों, शादियों और कैसेटों में खूब बजते थे, लेकिन वह लोकप्रियता मुख्यतः बुंदेलखंड की सीमाओं के भीतर रही। फिर फिल्मों ने कभी-कभी इस बोली की ताकत देश को दिखाई।
Bandit Queen के समय बुंदेलखंड की भाषा और उसका कच्चापन लोगों के कानों तक पहुँचा। बाद में Paan Singh Tomar ने भी बुंदेलखंड के बोलने के अंदाज़ को एक अलग पहचान दी। लेकिन दोनों जगह पहचान मुख्यतः संवादों से बनी, गीतों के माध्यम से बुंदेली का राष्ट्रीय स्तर पर सामने आना बहुत कम हुआ।
फिर सोशल मीडिया आया। Instagram और YouTube ने वह काम करना शुरू किया जो शायद मुख्यधारा का मनोरंजन उद्योग नहीं कर पाया। बुंदेलखंड के छोटे शहरों और कस्बों से लोग अपनी ही बोली में बोलने लगे, हास्य करने लगे, कहानियाँ सुनाने लगे और लाखों लोगों तक पहुँचने लगे। धीरे-धीरे अपनी बोली बोलना पिछड़ेपन की निशानी नहीं, अपनी पहचान का गर्व बनने लगा।
और अब “पार्वती” जैसे गीत को जिस तरह पूरे देश में सुना जा रहा है, वह मेरे लिए केवल किसी एक गीत का वायरल होना नहीं है। यह उस बोली का सामने आना है जिसमें पीढ़ियों ने प्रेम किया, नाराज़ हुए, हँसे, पूजा की, किस्से सुनाए और अपना जीवन जिया।
गीत की सबसे खूबसूरत बात शायद यही है कि उसने बुंदेली को बदलकर या उसे किसी शहरी साँचे में ढालकर प्रस्तुत नहीं किया। उसने उसी मिट्टी, उसी उच्चारण और उसी सहजता के साथ उसे सामने रखा और लोगों ने उसे वैसे ही स्वीकार किया।
और मुझसे ज्यादा खुशी शायद किसे होगी। आखिर मैं भी उसी बुंदेलखंड की मिट्टी से निकला हूँ। कभी जिस बोली को अपने इलाके से बाहर सुनना दुर्लभ था, आज उसी बुंदेली को लोग गुनगुना रहे हैं।
समय बदलता है और कभी-कभी अपनी मिट्टी की आवाज़ को वापस आने में बस एक अच्छे गीत की जरूरत होती है।
मुंह बन्द करवाने का सबसे उपयुक्त तरीका यही था ?
ये बात तो शास्त्रों में भी कहा गया है कि - जहाँ पर शिष्टता काम ना करे, थोड़ी सी अशिष्टता कर लेनी चाहिए...
अगर कोई हरामी हाइड्रोशील आप पर SCST एक्ट का मुकदमा लगाए तो आप उस पर तथा उसके ४-५ रिस्तेदार या पड़ोसियों पर तत्काल PACSO का केस करवाए महिलाओं से या डकैती में जमानत नहीं होगी 2 साल .
🚨 दिल्ली सरकार शहर में स्मार्ट पोल स्थापित कर रही है। 🇮🇳
ये स्मार्ट पोल आधुनिक तकनीक से लैस होंगे और इनमें एलईडी लाइटिंग, सीसीटीवी कैमरे, सार्वजनिक वाई-फाई, पर्यावरण निगरानी सेंसर तथा अन्य स्मार्ट सुविधाएं उपलब्ध होंगी।