#गुरुनानकजी_के_गुरु_कौन
श्री गुरु ग्रन्थ साहिब के पृष्ट 731 पर श्री नानक देव ने स्पष्ट कहा है :-
अंधुला नीच जाति परदेशी खिन आवै तिल जावै।
ताकी संगति नानक रहंदा किउ करि मूड़ा पावै।।
इससे सिद्ध हुआ कि श्री नानक देव के गुरु जी परमेश्वर कबीर जी काशी वाले धाणक थे।
Hakka Kabir Karim Tu
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श्री गुरु ग्रन्थ साहिब के पष्ठ 731 पर श्री नानक देव ने स्पष्ट कहा है:-
अंधुला नीच जाति परदेशी खिन आवै तिल जावै।
ताकी संगति नानक रहंदा किउ करि मूड़ा पावै।।
इससे सिद्ध हुआ कि श्री नानक देव जी के गुरु जी परमेश्वर कबीर जी काशी वाले धाणक (जुलाहे) थे।
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Hakka Kabir Karim Tu ‘‘भाई बाले वाली जन्म साखी’’ में एक काजी रूकनदीन सूरा के प्रश्न का उत्तर देते हुए श्री नानक देव जी ने कहा:-
खालक आदम सिरजिआ आलम बड़ा कबीर।
काइम दाइम कुदरती सिर पीरां दे पीर।
सयदे (सजदे)करे खुदाई नूं आलम बड़ा कबीर।
विवेचन:- page 280-281
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श्री नानक देव ने इस शंका का भी निवारण कर दिया है। जिसमें कुछ व्यक्ति यह कहते हैं कि "कबीर" का अर्थ बड़ा होता। "जनम साखी भाई बाले वाली" के page 189 पर कहा है "खालक आदम सिरजिआ आलम बड़ा कबीर।
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कबीर सागर के अध्याय "अगम निगम बोध" में पृष्ठ 44 पर शब्द है - ॥ नानक वचन ।।
वाह वाह कबीर गुरू पूरा है।
पूरे गुरू की मैं बलि जावाँ जाका सकल जहूरा है ।। अधर दुलिच परे है गुरूनके शिव ब्रह्मा जह शूरा है ।। श्वेत ध्वजा फहरात गुरूनकी बाजत अनहद तूरा है ।।
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इस्कॉन इस सत्य को नहीं जानता और श्रीकृष्ण जी को ही सर्वशक्तिमान मानता है। सर्वशक्तिमान परमात्मा की संपूर्ण जानकारी के लिए पढ़ें "ज्ञान गंगा"।
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SantRampalJiMaharaj गीता अध्याय 8 श्लोक 3, 8, 9, 10, अध्याय 15 श्लोक 17, अध्याय 18 श्लोक 62 में बताए परम अक्षर ब्रह्म कबीर साहेब (कविर्देव) की पूजा करनी चाहिए जिससे जन्म मरण समाप्त हो। जबकि इस्कॉन वालों ने गीता ज्ञान बोलने वाले ब्रह्म की साधना में ही लगा दिया है
#GodMorningThursday#सत_भक्ति_संदेश
कबीर
खूब खाना है खीचडी, मांहीं परी टुक लौन।
मांस पराया खायकै, गला कटावै कौन।।
कबीर परमेश्वर जी ने उत्तम निर्दोष भोजन बताया है कि खिचड़ी नमकीन बनाओ और खाओ। दूसरे का गला काटकर फिर बदले में क्यों अपना गला कटाते हो?
देखिए साधना टीवी 7:30 PM
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गीता अध्याय 8 श्लोक 1-3 में स्पष्ट है कि ब्रह्म-काल और तीन देवताओं से परे परम अक्षर पुरुष ही अमर और पूर्ण परमात्मा है। इस्कॉन वाले श्रीकृष्ण जी को सर्वोच्च मानकर भोले भाले भक्तों को गुमराह कर रहे हैं। ब्रह्मा, विष्णु, महेश
Secret Of Gita Revealed
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गीता जी के अध्याय 14 श्लोक 3-5 में बताया गया है कि काल-ब्रह्म (क्षर पुरुष) ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश का पिता और देवी दुर्गा का पति है।
इस्कॉन इस सत्य को नहीं जानता और श्रीकृष्ण जी को ही सर्वशक्तिमान मानता है।
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श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया या काल ने?
गीता अध्याय 11 श्लोक 32 में गीता ज्ञानदाता ने कहा कि "मैं काल हूँ" इस्कॉन वाले श्री कृष्ण जी को गीता ज्ञानदाता बताते हैं, जबकि गीता ज्ञान काल ने ही श्री कृष्ण जी में प्रवेश करके दिया है
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इस्कॉन के भक्त गीता अध्याय 11 श्लोक 21 को नहीं समझते,जहां अर्जुन ने देखा कि काल देवताओं को भी निगल रहा था। काल ही ब्रह्मा,विष्णु,महेश का पिता है,और ये सभी त्रिलोक तक ही सीमित हैं।
अधिक जानकारी के लिए पढ़ें अनमोल पुस्तक ज्ञान गंगा।
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गीता अध्याय 8 श्लोक 3, 8, 9, 10, अध्याय 15 श्लोक 17, अध्याय 18 श्लोक 62 में बताए परम अक्षर ब्रह्म कबीर साहेब (कविर्देव) की पूजा करनी चाहिए जिससे जन्म मरण समाप्त हो। जबकि इस्कॉन वालों ने गीता ज्ञान बोलने वाले ब्रह्म की साधना में ही लगा दिया है.
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इस्कॉन संस्था मानती है कि कृष्ण जी ही सर्वोच्च ईश्वर हैं।
जबकि संत रामपाल जी महाराज जी
ने बताया कि अर्जुन ने गीता अध्याय 8 श्लोक 1 में प्रश्न किया कि गीता अध्याय 7 श्लोक 29 में जो तत् ब्रह्म कहा है, वह क्या है?
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इस्कॉन के भक्त गीता अध्याय 11 श्लोक 21 को नहीं समझते, जहां अर्जुन ने देखा कि काल देवताओं को भी निगल रहा था। काल ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश का पिता है, और ये सभी त्रिलोक तक ही सीमित हैं।
अधिक जानकारी के लिए पढ़ें अनमोल पुस्तक ज्ञान गंगा।
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गीता अध्याय 15 श्लोक 1-4 में तीन देवताओं ब्रह्मा, विष्णु और शिव का उल्लेख है। लेकिन इनसे ऊपर परम अक्षर पुरुष है। इस्कॉन वाले इस तत्त्वज्ञान से अनभिज्ञ हैं और श्रीकृष्ण जी को ही सर्वोच्च मानते हैं।
परम अक्षर पुरुष की जानकारी के लिए पढ़ें "ज्ञान गंगा"।