"जब मायावती मुख्यमंत्री बनी तो मैंने मायावती से कहा की सबसे पहले जुल्म जाति का अन्याय-अत्याचार का अंत करना चाहिए पहले 2 महीने में मायावती ने एक लाख 45 हजार गुंडों को गुंडा एक्ट लगाकर गैंगस्टर एक्ट लगाकर जेल में बंद किया।"
---मान्यवर कांशीराम साहब---
#bahujanmedia
23 अगस्त 2026 को बिरला ऑडिटोरियम जयपुर में होने वाला कार्यकर्ता महासम्मेलन एवं संगठन समीक्षा का कार्यक्रम यथावत रहेंगा
मुख्य अतिथि:-माननीय आकाश आनंद जी (राष्ट्रीय संयोजक)बीएसपी होगे
जयभीम जयभारत
सुमरत सिंह
प्रदेश अध्यक्ष
बहुजन समाज पार्टी राजस्थान
#WATCH | लखनऊ, उत्तर प्रदेश | बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने कहा, "इस देश के करोड़ों दलितों एवं अन्य उपेक्षित वर्गों के मसीहा, व भारतीय संविधान के मूल निर्माता बाबा साहब भीम राव अंबेडकर ने अपने जीते जी अपनी काबिलीयत, अपनी बुद्धिमता और सूझ-बूझ से तथा जातिवादी लोगों के साम-दाम-दंड-भेद आदि हथकंडों को ध्यान में रखकर इन वर्गों के लोगों को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए वोट की अति महत्वपूर्ण ताकत सहित अनेकों संवैधानिक और मूलभूत कानूनी अधिकार दिलाए हैं। जिनका लाभ लेने के लिए इन्हें केंद्र व राज्यों के भी राजनीतिक सत्ता की भी मास्टर चाबी खुद अपने हाथों में लेनी होगी, ये भी उन्होंने कहा था। जिस पर अमल करते हुए, कांशिराम ने बसपा का गठन किया है। बाबा साहब अपने लोगों को सलाह के तौर पर ये भी कहते रहे हैं कि इन्हें किसी भी मामले में अपने ऊपर होने वाले जुल्म, जाति के विरुद्ध लड़ाई कानून के दायरे में रहकर करना है। संघर्ष आदि भी कानूनी दायरे के अंदर रहकर करना है। यदि मामला अदालत में जाता है, निचली अदालत में इंसाफ नहीं मिलने पर उन्हें आगे सर्वोच्च अदालत में जाना चाहिए। ये सब व्यवस्था भारतीय संविधान में है। न कि इसके लिए जिला मेरठ, सहारनपुर, प्रयागराज व हरदोई आदि की तरह, तथा आए दिन देश के अन्य राज्यों में भी सड़कों पर उतरना है। जो भी ऐसे संगठन व पार्टियां आदि अपने संकीर्ण स्वार्थ के लिए इन वर्गों के लोगों को गुमराह करके सड़कों पर उतारती है, ये पार्टियां हिंसा व हंगामा या सड़क जाम जैसे हालात पैदा करवाते हैं। फिर उनके मुखिया घटना स्थल पर पहुंचकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं। इससे पीड़ितों को न्याय मिलने वाला नहीं है। बल्कि वर्तमान हालातों ने इन वर्गों की मुसीबत और परेशानी को और अधिक भी बढ़ाने वाला ही है। ऐसे में अपनी समस्याओं का हल बाबा साहब डॉ. भीम राव अंबेडकर के बताए गए सही व शांतिपूर्ण रास्ते पर अर्थात अपनी एकजुटता एवं अपने वोट की ताकत से सत्ता की मास्टरचाबी प्राप्त करना है। जो लाख दुखों की बस एक दवा है और जिसके लिए बसपा लगातार तत्पर और प्रयासरत है। इस मार्ग से हमें बिल्कुल भी नहीं भटकना है..."
#WATCH | Lucknow, UP | BSP President Mayawati says, "... Some organisations or parties mislead people from backward sections and bring them out onto the streets for their political interest, thereby instigating violence, chaos, or road blockades. Then their leaders arrive at the incident site later to capitalise on the situation for political gain by shedding fake tears. This does not bring justice to the victims, only exacerbates the hardships and troubles faced by these communities. In such a scenario, the solution to their problems lies in following the correct and peaceful path shown by Babasaheb Dr Bhimrao Ambedkar, that is, securing the 'master key' to power through unity and the strength of the vote. This is the sole remedy for a multitude of woes, a goal for which the BSP remains constantly committed and active. We must not deviate from this path at all..."
आज यमुना नगर में हरियाणा की प्रदेश स्तरीय बैठक में आये पदाधिकारियों ने हरियाणा में BSP को सत्ता में लाने का संकल्प लिया.हरियाणा में दो लाख कार्यकर्ता बनाने का लक्ष्य रखा गया है. जल्द ही यह काम पूरा किया जायेगा.जय भीम जय भारत
मेरठ में ललिता गौतम को न्याय दिलाने हेतु शांति पूर्वक धरना प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस द्वारा हाथा पाई की गयी लोगों को मारा पीटा गया.संविधान के आर्टिकल 19 के तहत शांति पूर्वक धरना प्रदर्शन एक मौलिक अधिकार है.पुलिस द्वारा इस तरह की कार्यवाही करना कहीं ना कहीं अहंकार को प्रदर्शित करता है.जल्द ही यह अहंकार टूटने वाला है.
भीम आर्मी के 26 युवाओं पर केस दर्ज!
यूपी के ललितपुर में भीम आर्मी-ASP के 26 युवाओं पर संगीन धाराओं में FIR दर्ज हुई है। ये लोग एक मामले में न्याय दिलाने गए थे। दोषियों पर कार्रवाई कराने की बजाय हवाबाजी के चक्कर में बेवजह पुलिस-प्रशासन से भिड़ गए, चक्का जाम कर दिया और फिर इस तरह 26 युवाओं पर FIR कराकर वापस आ गए।
प्रशासन को तो बस मौका चाहिए कि वह दलितों पर कार्रवाई करे। इन अनपढ़ों का गैंग उन्हें जबरदस्ती मौका देता है और जब एफआईआर हो जाती है, तो इनकी लफ्फाजी सुनिए; "हम भीम आर्मी के सिपाही हैं। जेल-मुकदमों से नहीं डरते।" एक दूसरा डायलॉग भी है; "इतिहास संघर्ष करने वालों का लिखा जाता है, तलवा चाटने वालों का नहीं।"
तो संघर्ष करो न मुन्ना, बेवजह पड़ी लकड़ी लेने की क्या जरूरत है? उड़ता तीर लेने को संघर्ष नहीं कहते। अब तुम्हें थाना अथवा चौकी के सामने चक्का जाम करने की क्या जरूरत है? अगर कोई पुलिसकर्मी भ्रष्ट है अथवा जातीय दुर्भावना के चलते सही कार्रवाई नहीं कर रहा है, तो उसकी शिकायत CO एवं SP से कीजिए। वहां से भी सुनवाई न हो, तो अन्य आरोपियों के साथ SHO, CO, SP एवं अन्य संबंधित पुलिस अधिकारियों को पार्टी बनाते हुए SC-ST जिला न्यायालय में परिवाद दायर कीजिए। कुछ ही दिनों में सारे पुलिसकर्मी अपनी औकात में आ जाएंगे। मैंने स्वयं कई पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करवाई है। साथ ही मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत कीजिए और स्थानीय विधायक अथवा सांसद से भी मदद लीजिए।
मैंने स्वयं ऐसी कार्रवाई करवाई है। भदोही में एक दलित पर हमला हुआ था। जातीय दुर्भावना के चलते स्थानीय थाना प्रभारी ने कोई कार्रवाई नहीं की, बल्कि उल्टा पीड़ित को ही गिरफ्तार कर लिया। पीड़ित ने मुझसे संपर्क किया। मैंने उसके वकील से बात करके आरोपियों के साथ प्रशासन को भी पार्टी बनाते हुए SC-ST जिला न्यायालय में परिवाद दाखिल कर दिया। कुछ ही दिनों में सभी साक्ष्यों को देखने के बाद कोर्ट ने अन्य आरोपियों के साथ प्रधान और थाना प्रभारी पर भी SC-ST Act के तहत एफआईआर दर्ज कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिया। अभी इसी हफ्ते राजस्थान के कुचामन सिटी एवं बिहार के गया जिले में भी दलित पीड़ितों के साथ भेदभाव करने वाले पुलिसकर्मियों पर कोर्ट ने एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आप संघर्ष मत करो अथवा केवल यही रास्ता अपनाओ। नहीं। भीम आर्मी समर्थकों से मेरा सिर्फ इतना कहना है कि बेवजह पुलिस से मत भिड़ो। शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करो और कार्रवाई न होने पर ऊपरी स्तर के अधिकारियों से शिकायत कर उनकी मदद लो। चूंकि चंद्रशेखर आजाद स्वयं भी कैडर नहीं जानते हैं, इसलिए वह तुम्हें कैडर तो देंगे नहीं, लेकिन तुम्हारे सामने तुम्हारा करियर है। चार FIR हो गईं, तो आधा जीवन कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाते बीतेगा। अभी जोश है, इसलिए समझ नहीं पा रहे हो, लेकिन कुछ साल बाद चार्जशीट दाखिल होने के बाद जब तारीख पर तारीख पड़ेगी तब अक्ल ठिकाने आ जाएगा। हालांकि तब तक बहुत देर हो गई होगी। बाहर कमाने-खाने भी गए होगे, तब भी हर तारीख पर आना पड़ेगा। वरना पुलिस वारंट भी जारी करवा सकती है।
इसलिए भीम आर्मी वालों से मेरा सुझाव है कि बेवजह संघर्ष, आंदोलन और क्रांति का सपना दिखाकर युवाओं का भविष्य खराब मत करो। उन्हें शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से आंदोलन करना सिखाओ। बाबासाहेब का संविधान हाथ में लेकर घूमने से क्या फायदा, जब तुम कानून तोड़कर उसी संविधान को चुनौती देते हो? बुद्धि का इस्तेमाल करो। तुम दलित हो। सरकार एवं प्रशासन तो सिर्फ मौका तलाशते रहते हैं कि वे कब तुम पर कार्रवाई करें। तुम उन्हें ऐसा मौका देते ही क्यों हो? बाकी मूर्खों का क्या है, वे साउथ के फिल्मों की तरह फिल्मी डायलॉगबाजी करते रहेंगे।
मैंने इस मामले को 3 दिन पहले ही उठाया था, लेकिन तब भीम आर्मी के लंपट लफंगे मुझे मां-बहन की गालियां दी रहे थे। इसलिए FIR की कॉपी पोस्ट पर रहा हूँ। पढ़ लीजिए।
बहुजन समाज पार्टी, अयोध्या के जिलाध्यक्ष श्री कृष्ण कुमार पासी जी के भतीजे के असामयिक निधन का समाचार सुनकर हृदय को गहरी पीड़ा पहुँची है।
इतनी छोटी उम्र में यूँ अचानक साथ छूट जाना, ये वह दुख है जिसके लिए कोई शब्द पूरा नहीं पड़ता। एक परिवार अपने बच्चों के लिए जो सपने देखता है, जो कल की उम्मीदें बुनता है, वह सब एक पल में रुक जाता है। ऐसे समय में सांत्वना देना आसान नहीं है।
लेकिन इतना ज़रूर कहना चाहूँगा कि श्री कृष्ण कुमार पासी जी को जो लोग जानते हैं, और उनके संघर्ष के साथी रहे हैं, सब आज इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े हैं।
भावभीनी श्रद्धांजलि।
दिल्ली के मुंडका में सीवरेज कार्य के दौरान जहरीली गैस से तीन युवाओं की दर्दनाक मृत्यु हो गई।आज इनके परिवारों से मिलकर सरकार से 30 -30 लाख और इन परिवारों को सरकारी नौकरी की माँग भी की.जिसमें 30लाख की सरकारी राहत के लिये अधिकारिओं से वार्ता सकारात्मक रही जल्द ही सहायता मिलेगी .
आज दिल्ली प्रदेश की समस्त जिला और विधानसभा प्रदेश की समीक्षा बैठक और कैडर कैम्प.दिल्ली में BSP के सारे पदाधिकारी मेहनत से लगे हैं पार्टी को पुनः खड़ा करने में. जय भीम जय भारत
आज छत्रपति राजर्षि शाहू जी महाराज की जयंती है, एक ऐसे महापुरुष को याद करने का दिन, जिन्होंने अपने समय से बहुत आगे की सोच रखी।
1902 में, जब देश का बड़ा हिस्सा जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता से जूझ रहा था, तब शाहू जी महाराज ने पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण लागू कर यह साबित किया कि सत्ता का असली उद्देश्य समाज के आख़िरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी न्याय दिलाना होता है, न कि केवल कुछ लोगों के हितों की रक्षा करना।
मैं मानता हूँ कि हर पीढ़ी को बराबरी की लड़ाई अपने तरीक़े से लड़नी होती है। शाहू जी महाराज ने अपनी पीढ़ी की लड़ाई पूरी ईमानदारी से लड़ी। आज जब संविधान, आरक्षण और समान अवसर जैसे सवालों पर बहसें फिर से तेज़ हैं तो उनका जीवन हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र की ताक़त उसके सबसे ऊँचे पदों से नहीं, उसके सबसे आख़िरी नागरिक के साथ हुए व्यवहार से मापी जाती है।
आज सिर्फ़ श्रद्धांजलि देना काफ़ी नहीं है। उनके अधूरे काम को आगे बढ़ाना हर वंचित और पिछड़े व्यक्ति तक शिक्षा, सम्मान और बराबर अवसर पहुँचाना ही शाहू जी महाराज के लिए हमारी असली श्रद्धांजलि होगी।
छत्रपति राजर्षि शाहू जी महाराज को मेरा कोटि कोटि नमन।