स्कूलों में टीचर से कहा जाता है कि आप बच्चों पर छड़ी नहीं चला सकते। उन्हीं बच्चों पर पुलिस लाठी चला रही थी। शहर देख रहा था। बच्चों के माँ बाप और उनके व्हाट्स एप अंकिल चुपचाप देख रहे थे। पेपर लीक करने वाले आज पार्टी मना रहे होंगे। मनाओ तुम लोग। अभी धर्म का मुद्दा खोजा जा रहा होगा ताकी गोदी ऐंकर धर्म रक्षक बन कर चिल्लाने आ जाएँ। जनता को पता है गोदी मालिक, गोदी ऐंकर, गोदी संपादक अपने पेशे के धर्म की रक्षा कभी कर ही नहीं सकते।अख़बारों की हेडलाइन कैसे मैनेज होगी? लिख कर दे दिया गया है या ख़ुद से लिख लेंगे?
मोदीजी का डांस और मनोरंजन का प्रोग्राम काफ़ी पहले बन गया था. अब मोदीजी को क्या पता था कि इस बीच हमारे 3 नाविक मर जाएँगे या वायुसेना के प्लेन क्रैश में 5 जवान शहीद हो जाएँगे.
इसलिए नृत्यनीति के जानकारों का मानना है कि नृत्य के प्रोग्राम को ऐन वक़्त पर कैंसिल करना असंभव था. और ऊपर से नृत्य का यह प्रोग्राम विदेश में था, जिस पर हमारा काफ़ी खर्च भी हो गया होगा. हाँ! प्रोग्राम अगर अपने देश में होता तो शायद एक बार को मोदीजी प्रोग्राम रद्द करने के बारे में सोच भी सकते थे. लेकिन विदेश में गोरी महिलाओं का नृत्य देखने का मौक़ा! इसे छोड़ने से भारत को और ख़ासकर मोदीजी को व्यक्तिगत रूप से काफ़ी नुकसान हो सकता था.
In a country where countless politicians, celebrities, media anchors and businessmen have sold themselves, bowed down in front of fascist powers, in fear of getting arrested.
People like Abhijeet are a rare gem, truly brave and fearless.
आर्थिक तूफ़ान सर पर है, और हमारे प्रधानमंत्री इटली में टॉफ़ी बाँट रहे हैं!
किसान, युवा, महिलाएँ, मज़दूर और छोटे व्यापारी सब रो रहे हैं - PM हंसकर रील बना रहे हैं, और BJP वाले ताली बजा रहे हैं।
यह नेतृत्व नहीं, नौटंकी है।
1 लाख 32 हजार करोड़ का कच्चा तेल विदेशों से आया, जिसमें से 52 हजार 876 करोड़ का तेल दूसरे देशों को बेच दिया गया 🤔😱
जनता से पेट्रोल डीजल कम उपयोग करने की अपील करने वाले ने, कंपनी से तेल निर्यात न करने की अपील क्यों नहीं की ??
देश के युवाओं के सामने एक गंभीर बात रखना चाहता हूँ।
एक काम कीजिए - खुद Google कीजिए: “NEET 2024 की भयंकर चोरी के दौरान NTA का DG कौन था, और मोदी सरकार ने उसे आज कहां बैठाया है?”
देखा? समझ आया?
BJP इसी तरह आप जैसे लाखों मेहनती विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को इनाम देती है - उनकी रक्षा करती है, ऊपर से उन्हें तरक्की देती है।
साफ़ है - मोदी जी और भाजपा आपके भविष्य की चोरी में ख़ुद साझेदार हैं।
जिस बाज़ार में आपकी मेहनत, आपके सपने नीलाम हो रहे हैं, उसका एक ही उसूल है - जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम।
NEET 2026 के पेपर लीक की खबर सुनी।
परीक्षा नहीं - NEET अब नीलामी है।
कई सवाल परीक्षा से 42 घंटे पहले WhatsApp पर बिक रहे थे।
22 लाख से ज़्यादा बच्चे साल भर रात-रात भर आँखें जलाकर पढ़ते रहे और एक रात में उनका भविष्य बाज़ार में सरेआम नीलाम हो गया। यह पहली बार नहीं है। 10 साल में 89 पेपर लीक - 48 बार दोबारा परीक्षा। हर बार वही वादे, और फिर वही ख़ामोशी।
मोदी जी, जब आप अपनी हर नाकामी का बिल जनता पर डालते हैं, तो ग़रीब के बच्चों का भविष्य भी उसी बिल में आता है।
22 लाख बच्चों का भरोसा टूटा है। और मोदी सरकार से बड़ा ख़तरा भारत के युवाओं के सपनों के लिए कोई नहीं।
मैं भारत के युवा के साथ हूँ। यह वक़्त बेहद मुश्किल है - मैं जानता हूँ। लेकिन यह व्यवस्था ऐसे नहीं रहेगी। हम मिलकर इसे बदलेंगे।
चुनाव ख़त्म होते ही, ‘संकट’ याद आ गया!
दरअसल देश के लिए ‘संकट’ सिर्फ़ एक है और उसका नाम है : ‘भाजपा’
इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ीं तो ‘पंच ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था’ कैसे बनेगी? लगता है भाजपा सरकार के हाथ से लगाम पूरी तरह छूट गयी है। डॉलर आसमान छू रहा है और देश का रुपया पातालोन्मुखी हो गया है।
सोना न खरीदने की अपील जनता से नहीं, भाजपाइयों को अपने भ्रष्ट लोगों से करनी चाहिए क्योंकि जनता तो वैसे भी 1.5 लाख तोले का सोना नहीं ख़रीद पा रही है। भाजपाई ही अपनी काली कमाई का स्वर्णीकरण करने में लगे हैं। हमारी बात गलत लग रही हो तो ‘लखनऊ से लेकर गोरखपुर’ तक पता कर लीजिए या ‘अहमदाबाद से लेकर गुवाहाटी’ तक।
वैसे सारी पाबंदियाँ चुनाव के बाद ही क्यों याद आईं है? भाजपाइयों ने चुनाव में जो हज़ारों चार्टर हवाई यात्राएं करीं वो क्या पानी से उड़ रहीं थीं? वो क्या होटलों में नहीं ठहर रहे थे या सिलेंडर की फ़ोटो लगाकर खाना बनाकर खा रहे थे? भाजपाइयों ने चुनाव में ही वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से ही प्रचार क्यों नहीं किया? सारी पाबंदियाँ जनता के लिए ही हैं क्या?
इस तरह की अपील से तो व्यापार-कारोबार-बाज़ार में मंदी या महंगाई की आशंका की वजह से डर के साथ घबराहट, बेचैनी, निराशा फैल जाएगी। सरकार का काम अपने अकूत संसाधनों का सदुपयोग करके आपातकालीन हालातों से उबारना होता है, भय या अफ़रातफ़री फैलाना नहीं।
अगर सरकार नहीं चला पा रहे हैं तो भाजपाई अपनी नाकामी स्वीकार करें, देश को बर्बाद न करें। वैसे भी इन हालातों की असली वजह विदेश नीति के मामले में देश की परंपरागत ‘गुट निरपेक्षता’ की नीति से भाजपा सरकार का हटकर कुछ गुटों के पीछे, कुछ ख़ास वजहों और दबावों की वजह से चलना है। इसका ख़ामियाज़ा देश की जनता को महंगाई, बेरोज़गारी, बेकारी और मंदी की मार के रूप में भुगतना पड़ रहा है। किसान-मज़दूर से लेकर हर युवा, हर गृहिणी, नौकरीपेशा, पेशेवर, कारोबारी मतलब हर कोई इसकी चपेट में आ गया है। सच तो ये है कि भाजपा विदेश नीति और गृह नीति दोनों में फ़ेल हो गयी है। ये अपील भाजपा सरकार की अपनी असफलता की स्वीकारोक्ति है। दरअसल वोट मिलते ही भाजपा का खोट सामने आ गया।
भाजपाइयों ने चुनावी घपलों से राजनीति को प्रदूषित कर दिया है; नफ़रत फैला कर समाज के सौहार्द को बर्बाद कर दिया है; अपने चाल-चलन से भाजपाइयों ने संस्कृति-संस्कार को कलुषित कर दिया है; साधु-संतो पर प्रहार और आरोप लगाकर धर्म तक को नहीं छोड़ा है और अब अर्थव्यवस्था का रोना रो रहे हैं। इस तरह तो सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक हर क्षेत्र में भाजपा ने देश का बंटाधार कर दिया है। इस अपील के बाद देश की जनता में अचानक आक्रोश का जो उबाल आया है, उसका प्रबंधन भाजपा किसी चुनावी-जुगाड़ की तरह नहीं कर पाएगी, अब भाजपा हमेशा के लिए जाएगी।
देश कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
एक प्रधानमंत्री, एक दर्जन मुख्यमंत्रियों, दो दर्जन केंद्रीय मंत्रियों, 5 दर्जन चैनलों, 50 दर्जन ईडी, इनकम टैक्स, सीबीआई कर्मियों, 100 दर्जन केंचुआकर्मियों और लाखों अर्धसैनिक बल के जवानों और टैंकों को लगाने के बाद भी अगर इस अकेली कृशकाय महिला को नहीं हरा पाये तो चुल्लू भर परेश रावल की दवाई में डूब मरना चाहिए, अगर शर्म* होगी तो!
(*conditions apply)
भाजपा लोकसभा में अपनी हार की हताशा, का बदला आमजनता को धूप-गर्मी, प्यास-भूख व जाम के दंड भोगने के रूप में क्यों दे रही है?
भोली-भाली बुजुर्ग महिलाओं से लेकर आम महिलाओं तक को ये भी नहीं पता है कि उन्हें जिस पदयात्रा में लाया गया है उसका मुद्दा क्या है।
भाजपा अपने झूठ को फैलाने के लिए आम जनता का इस्तेमाल बंद करे। अब क्या दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के पास अपने सदस्य नहीं हैं या डरकर वो फिर से भूमिगत हो गये हैं क्योंकि उन्हें लग रहा है कि उनका भंडाफोड़ होने के बाद सच में जनता का जो आक्रोश उबल रहा है कहीं वो उसके शिकार न हो जाएं।
भाजपा सड़कों पर उतरकर जो प्रदर्शन कर रही है वो दरअसल अब हमेशा के लिए विपक्ष में रहने का रिहर्सल है।
जनता भाजपा को सदैव के लिए सड़कों पर ला देगी।
#बुरे_दिन_जानेवाले_है
मछली खाते हुए केंद्रीय बीजेपी मंत्री Anurag Thakur कथित तौर पर कह रहे हैं:
16 राज्यों में बीजेपी सरकार है वहाँ जिसकी जो मर्ज़ी हो, वो खाए और जो चाहे, वो धर्म अपनाए।
अब इस वीडियो को RT करो, चाहो तो सेव कर लो ताकि अगर कोई अंधभक्त लंपटगिरी करे, तो उसके मुँह पर ये वीडियो दिखा सको।
Hello @ianuragthakur glad to see you are enjoying fish in Bengal. Don’t worry- this is not Fantaland, You can take a river cruise on the Hooghly & eat it too without getting arrested.
I left for bombay at 6.30 am like the hard working professional that I am & stopped the car at 7 am to make this reel as I’ve long realised that silence is not a virtue & one must speak up when they are disrespected. Yes if wrong things happen at any workplace that are against basic human rights, me & all of us should speak up. I don’t care about the personal trolling, I’m used to it last 5 years since shark tank but the purpose of this reel is to request all the proud Indians in this country to start speaking up when they see something wrong, out of humanity, out of patriotism. Jai hind. Now off to another joyful & complex day at work !
अब सामान्य ज्ञान का स्तर देखकर-सुनकर समझ में आया कि ये प्रतियोगी परीक्षाओं के विरोधी क्यों हैं?
उत्तर प्रदेश के युवा याद रखें ये वही हैं जिन्होंने बेरोज़गारों की बेरोज़गारी का मज़ाक़ उड़ाते हुए कहा था कि कमी नौकरी की नहीं है बल्कि युवाओं में योग्यता की कमी है।
अपने नाम रूप जो काम होना चाहिए, उस तक में तो ये लड़खड़ाते हैं और दूसरों पर अयोग्यता का आरोप लगाते हैं।
अगर इतना सामान्य ज्ञान नहीं है तो भला प्रदेश क्या चलाएंगे और ‘ज्ञान’ है पर किसी वजह से ‘ध्यान’ नहीं है तो ये और भी गलत बात है। कम-से-कम बाहर जाने पर तो संयम बरता जाए।
इससे संपूर्ण विश्व में उत्तर प्रदेश की छवि को गहरी ठेस पहुँची है, दुनिया कह रही है ऐसे लोगों के हाथ में अगर उप्र की बागडोर है तो फिर क्या ही उम्मीद करना।
वैसे इसका एक कारण ये भी हो सकता है कि इनके गुट के लोग तो स्वतंत्रता आंदोलन में थे नहीं, इसीलिए स्वतंत्रता सेनानियों का इतिहास ये भूमिगत भूमिका निभाने वाले लोग क्या जानें। ये ज्ञान नहीं एक कान से दूसरे कान तक बात पहुँचानेवाले लोग रहे हैं।
कपिल सिब्बल ने उठाया आचार संहिता के उल्लंघन का मुद्दा -
"मैंने प्रधानमंत्री का भाषण सुना, प्रधानमंत्री के पीछे राष्ट्रीय ध्वज था और वे भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर बोल रहे थे, जबकि चुनाव चल रहे हैं। यह भारत की राजनीति में एक नया निम्न स्तर है। लेकिन मुझे पता है कि न तो मुख्य चुनाव आयुक्त और न ही कोई अन्य संस्था इस बारे में कुछ करेगी..."
क्या हमेशा की तरह प्रधानमंत्री के पद का इस्तेमाल चुनाव को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है? बंगाल में तृणमूल सत्ता में है और मुख्य प्रतिद्वंद्वी है। प्रधानमंत्री के संबोधन में तृणमूल पर हमला किया गया। देश की सरकार और प्रधानमंत्री के पद का इस्तेमाल चुनाव प्रभावित करने के लिए हो रहा है।