सभी विभागों के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के दस्तावेज संभाग स्तर से हर विभाग के मुख्यालय पर भेजे जा रहे हैं।
सभी विभागों को ARD की तरफ से Soft Copy भेजी जा रही है यदि किसी विभाग के पास नहीं पहुंची है तो संबंधित विभाग के कर्मचारी मेरे से बात कर लें आपको ARD की तरफ से तुरंत भिजवा दी जायेगी।
सभी विभागों को नियुक्ति के लिए कार्यक्रम तैयार कर लेना चाहिए।
Rssb के चैयरमैन साहब श्रीमान माननीय आलोक राज @alokrajRSSB जी 3rd Grade L-1 मे 150 प्रश्न मे से 11 सवाल डिलीट हुए यानि 7.33% प्रश्न डिलीट होना कोई जानबूझकर की गई गलती से कम नही है। 💔
3rd Grade L-2 मे 6 एग्जाम मे 25 सवाल डिलीट हुए यानि अब तक 3rd Grade मे कुल 36 प्रश्न डिलीट हुए है। 🥹
Rssb बोर्ड ने लेवल 1 में ये 11 प्रश्न डिलीट करके न जाने कितने साथियों की जिंदगी से खिलवाड़ किया है...!!
चयन बोर्ड की ओर से इस प्रकार की त्रुटियां—चाहे वह पाठ्यक्रम से बाहर के प्रश्न हों, गलत उत्तर विकल्प हों, या अस्पष्ट प्रश्न—निश्चित रूप से पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में 11 प्रश्नों का एक साथ डिलीट होना वाकई में असामान्य है और यह उस पूरी चयन प्रक्रिया और बोर्ड की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
ऐसे त्रुटिपूर्ण प्रश्न पत्र बनाने वाले विशेषज्ञों और संबंधित बोर्ड पर भारी जुर्माना लगना चाहिए, Blacklist किया जाना चाहिए।
यदि बोर्ड के पास प्रश्न डिलीट करने के लिए इतने सटीक विशेषज्ञ हैं जो गलतियों को पकड़ सकते हैं, तो उन्हें पेपर निर्माण की प्रक्रिया के दौरान ही क्यों नहीं शामिल किया जाता? पेपर अनपढ़ों से क्यों बनवाया जाता है, इन्हीं डिलीट करने वाले विशेषज्ञों से ही बनवा दो...🙏
यह केवल नाराजगी नहीं, बल्कि लाखों उन युवाओं की सामूहिक पीड़ा है जो व्यवस्था से निष्पक्षता की उम्मीद रखते हैं। @alokrajRSSB@BhajanlalBjp
यदि आप यह मानते हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं में केवल मेहनत ही सफलता का निर्धारण करती है, तो मुझे लगता है कि यह पूरी सच्चाई नहीं है।
राजस्थान में विशेष रूप से कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित कई परीक्षाओं में अक्सर 10 12 तक प्रश्न बाद में डिलीट कर दिए जाते हैं। यह केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। सवाल यह है कि यदि वे प्रश्न गलत थे, तो उन्हें प्रश्नपत्र में शामिल ही क्यों किया गया? और यदि शामिल किए गए, तो प्रारंभ में उन्हें सही मानकर परीक्षा का हिस्सा क्यों बनाया गया?
जब अभ्यर्थी आपत्तियाँ दर्ज कराते हैं, तब उन प्रश्नों को हटा दिया जाता है। लेकिन इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा नुकसान उन विद्यार्थियों को होता है जिन्होंने उन प्रश्नों के सही उत्तर दिए थे। एक गलत प्रश्न-निर्माण की कीमत वे बच्चे चुकाते हैं, जिन्होंने पूरी ईमानदारी और मेहनत से तैयारी की थी।
कई बार यही डिलीट हुए प्रश्न किसी अभ्यर्थी को चयन सूची से बाहर कर देते हैं। यह केवल अंक खोने की बात नहीं होती, बल्कि उसके आत्मविश्वास, उसके सपनों और उसके वर्षों की मेहनत पर भी गहरा प्रभाव डालती है। जो अभ्यर्थी इस पीड़ा से गुज़रा है, वही समझ सकता है कि अंतिम चयन से कुछ अंकों से बाहर हो जाना कितना दर्द देता है।
आख़िर आयोग की गलती ईमानदार बच्चा क्यों भुगते
#rsmmb #thirdgradeteacher #result
नि:शब्द ...
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आपकी सफलता ने मुझे भाव विभोर कर दिया।
आखिर लंबे संघर्ष की जीत हुई ... आज लोगों के तानों पर विराम लग ही गया ।
2nd ग्रेड अध्यापक ( हिंदी) बनने की जोरदार शुभकामनाएं ।
सेवा में,
अध्यक्ष महोदय,
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड,
जयपुर, राजस्थान।
विषय: अध्यापक भर्ती परीक्षा 2025 (लेवल-1) में 11 प्रश्नों को डिलीट करने की घोर लापरवाही एवं प्रशासनिक विफलता के संबंध में औपचारिक शिकायत।
महोदय,
हम आपका ध्यान अध्यापक भर्ती परीक्षा (लेवल-1) के प्रश्न-पत्र में हुई शर्मनाक त्रुटियों की ओर आकर्षित करना चाहते है। एक ही परीक्षा में 11 प्रश्नों का डिलीट होना किसी तकनीकी चूक का परिणाम नहीं, बल्कि बोर्ड की अक्षमता, घोर लापरवाही और परीक्षा निर्माण समिति की संवेदनहीनता का सीधा प्रमाण है।
इस संदर्भ में मैं निम्नलिखित बिंदुओं पर बोर्ड की स्पष्टीकरण और कार्यवाही की मांग करते हैं:
प्रश्न-पत्र की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न: 11 प्रश्नों का त्रुटिपूर्ण होना यह सिद्ध करता है कि प्रश्न-पत्र को अंतिम रूप देने से पहले किसी भी प्रकार के विश्वसनीय 'क्वालिटी चेक' या 'प्रूफ-रीडिंग' का पालन नहीं किया गया।
परीक्षार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़: अध्यक्ष महोदय का सोशल मीडिया पर केवल "दुःख" व्यक्त करना या "सुधार के प्रयास" की बात करना उन हजारों अभ्यर्थियों के लिए एक क्रूर मजाक है, जिनका करियर इस प्रशासनिक विफलता की भेंट चढ़ गया है।
जवाबदेही का अभाव: बोर्ड द्वारा सेटर्स को केवल 'ब्लैकलिस्ट' करने का दावा करना अपर्याप्त है। जब तक संबंधित अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों पर भारी आर्थिक दंड और अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है।
पारदर्शिता की मांग: हम मांग करते हैं कि प्रश्न निर्माण समिति में शामिल उन विशेषज्ञों के नाम और उनकी साख सार्वजनिक की जाए, जिनकी अयोग्यता के कारण लाखों युवाओं का समय, धन और ऊर्जा बर्बाद हुई है।
बोर्ड का यह उत्तरदायित्व है कि वह न केवल इस विफलता को स्वीकार करे, बल्कि प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए उचित मुआवजे या आगामी परीक्षा में शुल्क मुक्ति जैसे ठोस कदम उठाए।
यदि बोर्ड अपनी इस कार्यप्रणाली में सुधार हेतु तत्काल कदम नहीं उठाता, तो प्रभावित अभ्यर्थी अपने अधिकारों के संरक्षण हेतु उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए बाध्य होंगे।
अपेक्षित कार्यवाही:
प्रश्न निर्माण समिति के सदस्यों पर ठोस प्रशासनिक व आर्थिक दंड का विवरण सार्वजनिक करें।
प्रभावित अभ्यर्थियों की हुई क्षति की भरपाई हेतु स्पष्ट नीति घोषित करें।
धन्यवाद।
भवदीय,
समस्त पीड़ित अभ्यर्थी]
लेवल 1
@alokrajRSSB@rajcmo
#Jaipur: किसको दर्द सुनाए अपना..?
शिक्षक भर्ती लेवल प्रथम और द्वितीय से जुड़े अभ्यर्थियों की दास्तान
भर्ती परीक्षा में 11 प्रश्न डिलीट होने से हजारों अभ्यर्थियों का परिणाम प्रभावित,लेकिन बोर्ड और परिजनों की नजरों में प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए यह मात्र एक बहाना,उधर..
#RajasthanWithFirstIndia #Jaipur @RajGovOfficial@DineshKasana15
सेवा में,
अध्यक्ष महोदय,
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड,
जयपुर, राजस्थान।
विषय: अध्यापक भर्ती परीक्षा 2025 (लेवल-1) में 11 प्रश्नों को डिलीट करने की घोर लापरवाही एवं प्रशासनिक विफलता के संबंध में औपचारिक शिकायत।
महोदय,
हम आपका ध्यान अध्यापक भर्ती परीक्षा (लेवल-1) के प्रश्न-पत्र में हुई शर्मनाक त्रुटियों की ओर आकर्षित करना चाहते है। एक ही परीक्षा में 11 प्रश्नों का डिलीट होना किसी तकनीकी चूक का परिणाम नहीं, बल्कि बोर्ड की अक्षमता, घोर लापरवाही और परीक्षा निर्माण समिति की संवेदनहीनता का सीधा प्रमाण है।
इस संदर्भ में मैं निम्नलिखित बिंदुओं पर बोर्ड की स्पष्टीकरण और कार्यवाही की मांग करते हैं:
प्रश्न-पत्र की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न: 11 प्रश्नों का त्रुटिपूर्ण होना यह सिद्ध करता है कि प्रश्न-पत्र को अंतिम रूप देने से पहले किसी भी प्रकार के विश्वसनीय 'क्वालिटी चेक' या 'प्रूफ-रीडिंग' का पालन नहीं किया गया।
परीक्षार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़: अध्यक्ष महोदय का सोशल मीडिया पर केवल "दुःख" व्यक्त करना या "सुधार के प्रयास" की बात करना उन हजारों अभ्यर्थियों के लिए एक क्रूर मजाक है, जिनका करियर इस प्रशासनिक विफलता की भेंट चढ़ गया है।
जवाबदेही का अभाव: बोर्ड द्वारा सेटर्स को केवल 'ब्लैकलिस्ट' करने का दावा करना अपर्याप्त है। जब तक संबंधित अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों पर भारी आर्थिक दंड और अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है।
पारदर्शिता की मांग: हम मांग करते हैं कि प्रश्न निर्माण समिति में शामिल उन विशेषज्ञों के नाम और उनकी साख सार्वजनिक की जाए, जिनकी अयोग्यता के कारण लाखों युवाओं का समय, धन और ऊर्जा बर्बाद हुई है।
बोर्ड का यह उत्तरदायित्व है कि वह न केवल इस विफलता को स्वीकार करे, बल्कि प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए उचित मुआवजे या आगामी परीक्षा में शुल्क मुक्ति जैसे ठोस कदम उठाए।
यदि बोर्ड अपनी इस कार्यप्रणाली में सुधार हेतु तत्काल कदम नहीं उठाता, तो प्रभावित अभ्यर्थी अपने अधिकारों के संरक्षण हेतु उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए बाध्य होंगे।
अपेक्षित कार्यवाही:
प्रश्न निर्माण समिति के सदस्यों पर ठोस प्रशासनिक व आर्थिक दंड का विवरण सार्वजनिक करें।
प्रभावित अभ्यर्थियों की हुई क्षति की भरपाई हेतु स्पष्ट नीति घोषित करें।
धन्यवाद।
भवदीय,
समस्त पीड़ित अभ्यर्थी]
लेवल 1
@alokrajRSSB@RajCMO@BhajanlalBjp@madandilawar@HANUMANKISAN@Radhemahwa
पिछले कुछ दिनों से राजपाल यादव को लेकर लोग कुछ ज़्यादा ही भावुक होते दिखाई दे रहे हैं—कि कोई काम नहीं आता, कोई दोस्त साथ नहीं देता।
लेकिन एक प्रश्न स्वयं से भी पूछिए—
जब हम सफलता के शिखर पर होते हैं, क्या हम हमेशा अपने धरातल को याद रखते हैं?
अक्सर ऐसा होता है कि ऊँचाइयाँ मिलते ही व्यक्ति उड़ने लगता है, ज़मीन से जुड़ाव कम हो जाता है। और जब परिस्थितियाँ बदलती हैं, तो उसका कारण भी कहीं न कहीं हमारी अपनी गलतियाँ होती हैं।
दुनिया को दोष देना आसान है, पर सच्चाई यह है कि जीवन उतार–चढ़ाव से भरा है।
अमिताभ बच्चन का कठिन दौर भी सबने देखा। आर्थिक संकट आया, करियर डगमगाया—लेकिन उन्होंने सहानुभूति नहीं माँगी। कहा जाता है कि धीरूभाई अंबानी सहायता के लिए तैयार थे, फिर भी उन्होंने संघर्ष का रास्ता चुना। मेहनत की, धैर्य रखा और स्वयं को फिर से खड़ा किया।
जीवन में परिस्थितियाँ बदलेंगी—यह निश्चित है।
पर अपनी जिम्मेदारी से भागना सबसे बड़ी भूल है।
गिरने पर दूसरों को दोष देने से बेहतर है कि अपनी कमियों को पहचाना जाए।
सहानुभूति से क्षणिक दिलासा मिल सकता है,
लेकिन स्थायी सफलता केवल आत्मविश्वास, परिश्रम और आत्मनिर्भरता से मिलती है।
आखिरकार—
आपको खुद को ही खड़ा करना होगा।
दुनिया तालियाँ भी बजाती है और आलोचना भी करती है,
लेकिन चलना आपको अपने पैरों पर ही होता है
डॉ धीर सिंह धाभाई
#RajpalYadav
राजस्थान पुलिस का आम नागरिकों के साथ रवैया देख लीजिए। आमेर की घटना है इस तरह से लोगों को पहले मारते है फिर घुटनों के नीचे नोचते है बहुत निंदनीय राजपुलिस के मुखिया जी इन कर्मचारियों के विरुद्ध कार्यवाही होनी चाहिए @RajGovOfficial@PoliceRajasthan@NareshMeena__
झुकती है सरकार झुकाने वाले चाहिए...अब सम्पूर्ण राजस्थान मे खेजड़ी वृक्ष की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगया गया...
पर्यावरण प्रेमियों मे खुशी की लहर...❤️
खेजड़ी बचाओ आंदोलन 11 दिन बाद स्थगित किया...
यदि मुकाम मेले से पहले खेजड़ी कटाई पर रोक नही लगती तो 5 लाख लोग बीकानेर कलेक्ट्रेट पर महापड़ाव डालते...और हजारों-हजार लोग आमरण अनशन पर बैठते लेकिन समय रहते सरकार ने पर्यावरण प्रेमियों की मांग स्वीकार ली...
आखिरकार संघर्ष की जीत हुई...
बिश्नोई समाज के लोग की एक ही मांग है की हमारी खेजड़ी बचनी चाहिए...बाकि सब हम देख लेगे 🔥💯
हंसराज भाई पहले व्यक्ति हैं राजस्थान में जो #UGCAct की लड़ाई सोशल मीडिया से लेकर धरातल पर लड़ रहे हैं राजस्थान का पहला प्रदर्शन पहले सपोटरा और अब करौली में 23 फरवरी को होने जा रहा हैं।
@HansrajMeena@TribalArmy