आज राम आएंगे!!
मैं देखता था तुम्हें राम,
सड़कों पर साँसों के संघर्ष में,
महलों में सुखों के उत्कर्ष में,
घर से निकले हुए बेटों के जीवन में,
अपनों की तलाश में भटकते हुए मन में,
कभी पथराई हुई तितिक्षा में,
कभी बूढ़ी माँ की अंतिम प्रतीक्षा में।
✒️ स्वतंत्र 'विपुल