केवल वो ही नहीं बल्कि
गंगू मेहतर जैसे न जाने कितने अमर बलिदानी वीरों को इस देश के लोगों से छिपाये गए पर अब एक एक सच सामने आ रहा है
न जाने कितने अमीर चंद
गंगू मेहतर को इतिहास से मिटाने की साज़िशें की गईं
#किसने क्यों किया ये सब
सोचने की बात ये है
सामने जवान बेटे की निर्जीव देह पड़ी थी… और एक अंग्रेज अफसर ने ठंडी आवाज़ में कहा— “बस एक बार कह दे कि ये तेरा बेटा है… फिर इसे अग्नि देने की इजाजत मिल जाएगी।” उस एक वाक्य ने जैसे एक बाप के सीने को चीर दिया, लेकिन जो जवाब आने वाला था… उसने इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया।
यह कहानी है उस पिता की… जिसने अपने दिल को पत्थर बना ���िया, लेकिन देश का सिर झुकने नहीं दिया। यह कहानी है मास्टर अमीरचंद की, जिनका नाम आज भी बहुत कम लोग जानते हैं, लेकिन जिनका त्याग किसी भी बड़े बलिदान से कम नहीं था।
8 मई 1915… दिल्ली की जेल… और एक ऐसा दृश्य, जि��े याद कर आज भी रूह कांप जाती है। एक तरफ अंग्रेजों का अत्याचार था… दूसरी तरफ एक पिता का अटूट साहस।
मास्टर अमीरचंद पेशे से एक साधारण अध्यापक थे, लेकिन उनके भीतर आज़ादी की ऐसी ज्वाला जल रही थी जो हर डर को खत्म कर दे। लाला हरदयाल और रासबिहारी बोस जैसे क्रांतिकारी भी उन्हें सम्मान से देखते थे। जब लॉर्ड हार्डिंग पर बम फेंकने की योजना बनी, तो उस योजना के पीछे उनकी भूमिका भी अहम थी।
अंग्रेजों ने उन्���ें गिरफ्तार कर लिया। लेकिन उनकी निर्दयता यहीं नहीं रुकी… उन्होंने उनके जवान बेटे को भी पकड़ लिया। उस मासूम को इतनी क्रूर यातनाएँ दी गईं कि उसने जेल की अंधेरी कोठरी में ही दम तोड़ दिया। एक पिता के लिए इससे बड़ा दुःख क्या हो सकता है?
अंग्रेजों को लगा कि अब वो टूट जाएंगे। उन्होंने सोचा कि जब एक बाप अपने बेटे की ��ाश देखेगा… तो वह सब कुछ बता देगा। वे उन्हें उस कोठरी में ले गए जहाँ उनका बेटा निर्जीव पड़ा था… ठंडा… खामोश… और हमेशा के लिए दूर।
उस पल जैसे समय ठहर गया। एक पिता की नजर अपने बेटे के चेहरे पर टिक गई। वही चेहरा… जिसे उसने कभी अपने हाथों से सहलाया था, जिसे उसने अपने कंधों पर बैठाकर दुनिया दिखाई थी। आँखें नम हो उठीं… दिल भीतर ही भीतर चीख पड़ा… लेकिन होंठ अब भी खामोश थे।
अंग्रेज अफसर ने फिर कहा— “बस मान लो कि ये तुम्हारा बेटा है… इसे सम्मान से अंतिम संस्कार दे दो।” वह चाहते थे कि एक पिता की ममता उसकी मजबूती को तोड़ दे।
लेकिन उस दिन… एक पिता नहीं, एक क्रांतिकारी खड़ा था। उन्होंने अपनी आँखों के आँसू अंदर ही रोक लिए… और पत्थर जैसे स्वर में कहा— “यह मेरा बेटा नहीं है… मैं इसे नहीं पहचानता।”
उस एक वाक्य में एक पिता का पूरा दिल टूट गया… लेकिन देश का सिर ऊँचा हो गया। उन्हें पता था कि अगर आज वह भा���नाओं में बह गए, तो उनके साथियों की ज���न खतरे में पड़ जाएगी और आज़ादी की लड़ाई कमजोर पड़ जाएगी। इसलिए उन्होंने अपने ही बेटे को दुनिया के सामने “लावारिस” बना दिया।
सोचिए… कैसा दिल होगा उस इंसान का? जिसने अपने खून को भी देश के लिए त्याग दिया… जिसने अपने ही जिगर के टुकड़े को पहचानने से इनकार कर दिया… ताकि देश की लड़ाई जिंदा रहे।
8 मई 1915… फांसी का दिन भी आ गया। जब उन्हें फांसी के फंदे की ओर ले जाया जा रहा था, तो उनके चेहरे पर डर नहीं… बल��कि एक अजीब सी शांति थी। जैसे उन्होंने सब कुछ पहले ही त्याग दिया हो।
उन्होंने फंदे को देखा… उसे चूमा… और अंतिम बार कहा— “मैंने अपना सब कुछ भारत माता को दे दिया… अब यह जीवन भी उसी का है।”
और फिर… एक और बलिदान इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। लेकिन समय के साथ हम उस नाम को भूलते चले गए… उस दर्द को भूलते चले गए… उस त्याग को भी, जिसने हमें आज़ादी की सांस दी।
आज सवाल सिर्फ इतना है— जिस बाप ने अपने बेटे के शव को छूने का अधिकार तक छोड़ दिया, ताकि हम आज खुले आसमान में सांस ले सकें… क��या हम उसका नाम भी याद रखते हैं?
अगर यह कहानी पढ़कर आपके दिल में भी हलचल हुई हो… तो इसे यूं ही मत जाने दीजिए। इस महान पिता को एक सलाम जरूर लिखिए, “वंदे मातरम्” जरूर कहिए, और इस कहानी को आगे बढ़ाइए… क्योंकि शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि शब्दों से नहीं, याद रखने से मिलती है।
देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक धरना स्थल जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन एक बार फिर भारी हंगामे की चपेट में आ गया है। शनिवार दोपहर एक अज्ञात महिला ने आज ही अनशन पर बैठे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और अध्यक्ष अभिजीत दीपके पर अचानक स्याही फेंक दी। मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब अभिजीत दीपके जंतर-मंतर पर अपने समर्थकों और प्रदर्शनकारी छात्रों को संबोधित कर रहे थे। तभी भीड़ में से आई एक महिला ने सीधे उन पर स्याही फेंक दी, जो उनके चेहरे और कपड़ों पर जा गिरी।
नई स्क्रिप्ट 🤣🤣🤣
आज श्रीजगन्नाथ रथयात्रा पर विशेष
आज अर्थात् आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को श्री बलभद्रजी और बहिन सुभद्राजी के साथ भगवान श्री जगन्नाथ यात्रा पर निकल रहे हैं, जिनके रथ को खींचने पूरे भारतवर्ष से अनगिनत भारतीय जगन्नाथ पुरी पहुँचे हैं।
वैसे यह यात्रा तो पूरे देश भर में निकाली जाती ही है,
है ही!
इसी तरह केरल में सबरीमला यात्रा, तमिलनाडु की पलानीसामी यात्रा, कर्णाटक की उगादि रथ यात्रा भी जगत्प्रसिद्ध हैं! और महाकाल की पालकी को हम भला कैसे भूल सकते हैं?
और इसी तरह की पालकी-यात्राएँ हम सभी के ग्राम-नगर-क्षेत्र में भी विभिन्न पर्व-त्यौहारों पर आयोजित की ही जाती हैं,
#ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
हे नीम करौली बाबा मेरा हाथ पकड़े रखना
मेरा धैर्य मेरा विश्वास मेरी हिम्मत सब आपसे ही है
आपकी कृपा से सभी कार्य सिद्ध होंगे मेरे
#जय_हनुमान #जय_श्री_राम#जय_जय_श्री_राम
सुप्रभात
> 🚨 अलर्ट: RHI Trading Company पर MLM मार्केटिंग धोखाधड़ी के आरोप। धार्मिक परिवर्तन, सेक्स रैकेट और मानव तस्करी जैसी गतिविधियों में कथित संलिप्तता का भी संदेह। 20,000 से अधिक युवाओं का भविष्य जोखिम में होने का दावा।
पृष्ठभूमि:
RHI नामक एक नेटवर्क कंपनी 40 वर्ष से कम आयु के युवाओं को अपने कार्यालय तथा इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट से जुड़े कार्यों के लिए भर्ती करने का दावा करती है। कंपनी ₹25,000 से ₹40,000 तक मासिक वेतन का वादा करती है। आरोप है कि यह मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और तत्काल नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को निशाना बनाती है।
🚨 यह भी आरोप है कि कंपनी के कुछ कर्मचारी हिंदू कर्मचारियों का मनोवैज्ञानिक रूप से ब्रेनवॉश कर उनका धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास करते हैं।
🚨 कुछ केंद्रों के बारे में संदेह व्यक्त किया गया है कि वहाँ कथित तौर पर सेक्स रैकेट या मानव तस्करी जैसी गतिविधियाँ हो सकती हैं, जहाँ लड़के-लड़कियों को उनकी इच्छा के विरुद्ध रोके जाने के आरोप हैं।
🚨 यह भी आरोप है कि कई युवाओं को धोखे से बंधक बनाकर रखा जाता है और जो वहाँ से निकलने की कोशिश करते हैं, उनके साथ मारपीट किए जाने का भी दावा किया जाता है।
⚠️ दावा किया जाता है कि जुलाई 2025 में झारखंड के रांची स्थित नामकुम केंद्र पर CBI ने छा���ेमारी की थी।
👇 कई ऐसे युवाओं ने, जो वहाँ से निकलने का दावा करते हैं, अपने अनुभव बताते हुए YouTube पर वीडियो साझा किए हैं
"होइहि सोइ जो राम रचि राखा".....!
श्री राम जी के मंदिर अयोध्या में दान की गई सोने की रामचरितमानस, कौवा O I'm sorry काकभुशुण्डि, हार, चरण, चांदी की ईंटें वापिस करने जा रहा है ....!👍🏽👍🏽✌️
इन झूठे दानवीर कर्ण लोगों ने मीडिया में आ जोर खूब ड्रामा किया था और झूठा इल्जाम लगाया था कि चोरी कर लिया मेरा !! मेरा शब्द पर जोर दे रही जब दान दे दिया तब उसमें मेरा टाइप जूं क्यों लटका रहा?? और अगर लटका था तो वही ट्रस्ट से पूछते जा कर !
और हां सबका दान मंदिर के गर्भगृह में नहीं सजाया जा सकत�� कि आप उसे देखते रहे और जू लटकाये रहे??😂
आप अपना दान घर में रखिए और आराम से दिन रात निहारिए। मेला है sorry मेरा है 😂😂
मैंने तो X के माध्यम से हमेशा ट्रस्ट से यही मांग की थी कि इनका दान वापिस किया जाए ।🙋
बाकी रामजी की इच्छा 🙏🏽
गडकरी जी का कहना है कि, उनके बेटों के कारोबार का बहुत छोटा सा हिस्सा एथेनॉल है। उनको लक्षित करके अभियान चलाया जा रहा है। हो सकता है कि, गडकरी जी सही कह रहे हों, लेकिन कल्पना कीजिए कि, मोदी सरकार का कोई और ��ंत्री अपने बेटों के कारोबार के बारे में ऐसे बात करता तो विपक्ष और मीडिया किस तरह से व्यवहार करता। गडकरी जी के हर खेमे में संबंध इतने अच्छे बताए जाते हैं कि, मीडिया से लेकर विपक्ष तक सब उनके साथ सहानुभूति रखते हैं। गडकरी जी के चाहने वाले बहुत हैं। खामेनेई की मौत पर मातम में शामिल हुई कट्टर महिला भी पूछ रही है कि, गडकरी से इस तरह के सवाल किसके कहने पर पूछा जा रहा है। अद्भुत है ना!
आप लोग 2023 की समाजवादी पार्टी की मुस्लिम महिला नेता का यह कुकृत्य भूल चुके होंगे
हरदोई जिले की पिहानी नगर पालिका में दलित सफाई कर्मी राजाराम पुत्र रामपाल की गलती पर उससे पैरों में गिर कर माफी मंगवाती पिहानी नगर पालिका अध्यक्ष सपा नेता शाहीन वेगम ....शर्मनाक
तब अखिलेश यादव ने अपने नेता का बचाव किया था
Ab #भाडू अर्थात बांगड़ू
अपना aनशन तोड़ने के लिए कुछ बहाना ढूंढ रहा है
इकोसिस्टम से भी आवाज आने लगी है कि भाडू
को अनशन खत्म कर देना चाहिए
चाइनीज एजेंट अपनी इज्जत बची रहे
ऐसा कुछ ढूंढ रहा है
एक और टूलकिट फेल
CJP वाले सब एक से बढ़कर एक चूतिया हैं
बीज) से प्रतीकात्मक खेल आयोजित किया जाता है.
भक्ति, लोकनृत्य, पारंपरिक वेशभूषा से सजा यह पर्व, बस्तर की ज���वंत सांस्कृतिक विरासत और लोकजीवन की आत्मा को अभिव्यक्त करता है.
*मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान*
*बस्तर का गोंचा पर्व*
छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में मनाया जाने वाला गोंचा पर्व, आरण्यक संस्कृति, शौर्य और सामाजिक एकता का अद्वितीय उत्सव है.
यह पर्व जगदलपुर में भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा के साथ मनाया जाता है, जहाँ पारंपरिक 'तुपकी' (लकड़ी की पिस्तौल) और 'पेंग' (गोंचा फल के
What @rvsmani is telling you today, I told you in 2016/17
Old followers will remember
It was a fixed match between XJP and lSl, and the target was @narendramodi and @AmitShah
श्रीकृष्ण:: धर्म युद्ध में कोई भी निष्पक्ष नहीं रह सकता
जो स्वयं को निष्पक्ष कहकर युद्ध से दूर रहते हैं वो अधर्म के साथ होते हैं
आज देश में #धर्मयुद्ध हो रहा है
जो धर्म के साथ नहीं हैं
धर्म की #विजय के बाद उन्हें बोलने, कुछ भी कहने का कोई अधिकार नहीं है
@INCIndia Kारण मारे गए
उस समय देश को पता चलने नहीं दिया जाता था
TV News चैनल पर
अखबार में या कोई और माध्यम से वही बात बाहर आती थी जो सरकार चाहती थी
@SupriyaShrinate@RahulGandhi
पंजाब में जो कुछ भी भिंडरावाले ने किया
उसकी जिम्मेदार केवल और केवल इंदिरा गांधी ही है
सिक्ख राजनीति पर कब्जा करने के लिए इंदिरा गांधी ने ही भिंडरावाले को आगे बढ़ाया, उसे पाला, हर तरह से संरक्षण दिया, वही फिर पंजाब में आतंकवाद का चेहरा बना
इंदिरा गांधी ने अपनी लालसा के कारण
ऑपरेशन ब्लू स्टार: आस्था की रक्षा के लिए भारतीय सेना का अप्रतिम बलिदान और खालिस्तानी आतंक का क्रूर चेहरा!
इतिहास के कुछ पन्नों को निष्पक्षता से पढ़न�� बेहद जरूरी है। सच यह है कि जरनैल सिंह भिंडरांवाले और उसके गुर्गों ने अकाल तख्त के भीतर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया और सिखों के सबसे पवित्र स्थल, स्वर्ण मंदिर परिसर की मर्यादा को तार-तार कर दिया।
जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सेना को अंदर भेजा, तो स्पष्ट और कड़े निर्देश थे कि 'अकाल तख्त' और 'स्वर्ण मंदिर' पर सीधे तौर पर गोलीबारी नहीं करनी है।
इसी अत्यंत संवेदनशील और कठिन निर्देश के कारण भारत ने कुछ ही घंटों में अपने 83 जांबाज सैनिकों को खो दिया।
यह संख्या पाकिस्तान या चीन के साथ हुए किसी भी युद्ध में एक दिन में शहीद हुए जवानों से कहीं अधिक थी।
हमारे सैनिकों की जान इसलिए गई क्योंकि वे बिना जवाबी फायरिंग किए अकाल तख्त के भीतर घुसने का 'आत्मघाती मिशन' निभा रहे थे, जबकि अंदर बैठे चरमपंथी उन पर आधुनिक हथियारों से गोलियों की बौछार कर रहे थे।
अगर भारतीय सेना को अकाल तख्त की गरिमा और सुरक्षा की परवाह नहीं होती, तो वे सुरक्षित दूरी से सिर्फ एक तोप का गोला दाग सकते थे। भिंडरांवाले और उसके गुर्गे पल भर में ढेर हो जाते और हमारे एक भी सैनिक की जान नहीं जाती।
लेकिन जब बिना फायरिंग किए अंदर घुसने के प्रयास में सैनिकों की टुकड़ियां लगातार बलिदान होने लगीं, तब जाकर दिल्ली से संपर्क किया गया और काफी हिचकिचाहट के बाद सेना को जवाबी कार्रवाई की अनुमति मिली।
इसके बावजूद, दुनिया की सबसे अनुशासित और नैतिक भारतीय सेना ने चरमपंथियों के लगातार उकसावे के बाद भी मुख्य 'स्वर्ण मंदिर' पर हमला नहीं किया।
यही कारण है कि चारों ओर भारी गोलाबारी और भीषण रक्तपात के बावजूद मुख्य दरबार साहिब को लगभग कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
आज इतिहास को पीछे मुड़कर देखते हुए हम यह जरूर कह सकते हैं कि इस ऑपरेश�� की योजना बेहतर हो सकती थी, या इंदिरा गांधी को भिंडरांवाले को तभी गिरफ्तार कर लेना चाहिए था जब उसने गुरुद्वारे के भीतर भारी हथियार इकट्ठा करना और अपने विरोधियों की हत्या कर उनके शवों को गटर में फेंकना शुरू ही किया था।
लेकिन इस बात में कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि भिंडरांवाले एक क्रूर और जाहिल दरिंदा था, जिसने आस्था की आड़ में सिख पंथ की पवित्रता को जितना नुकसान पहुंचाया, उतना किसी और ने नहीं।
पंजाब में जो विनाश और निर्दोषों की मौत का तांडव हुआ, उसका मुख्य जिम्मेदार वही था।
#OperationBlueStar #IndianArmy #TrueHistory #PunjabHistory #NeverForget #Satluj
कई सौ सैनिकों का बलिदान #लिया
राजीव गांधी ने श्रीलंका में सेना भेजकर कई हजार सैनिकों का बलिदान #लिया
दोनों ही का #वध किया गया उन्हीं आतंकवादीयों के द्वारा
आज @INCIndia के टट्टू उनको शहीद बताते हैं
क्या देश के लिए कुछ किया
क्या देश के लिए जान दी
नहीं
अपनी तुच्छ राजनीति के