Bharat Tiwari भगत सिंह ही था !
आपने भगत सिंह को देखा था? नहीं देखे होंगे, मैंने भी नहीं देखा था।
लेकिन शायद ऐसे ही भगत सिंह रहे होंगे।
लेकिन आज हम लोगों ने एक और भगत सिंह को मार दिया।
Bharat Tiwari कलयुग का भगत सिंह था। सदियों में एक बार पैदा लेने वाला ऐसा फौलादी इंसान।
सिस्टम के एक-एक लोगों तक जाकर पैर पकड़ा, रिक्वेस्ट किया, आवेदन दिया, कुछ नहीं हुआ। यहां तक कि टॉर्चर किया जाता था। लेकिन जब बंदूक उठा लिया तब दुनिया जान गया ,,
Bharat Tiwari के हाथ में जब तक बंदूक रहा, किसी पुलिस वाले की हिम्मत नहीं हुई कुछ करने की। दो-दो बार उसके पास से लौटकर आए हैं- 2 फिट की दूरी बैठक बहुत देर तक बात कर कर लौटे हैं लेकिन कुछ नुक्सान नहीं पहुंचाया था वह बस अपनी मांग मांग रहा था उसके लिए कुछ मांग नहीं थी जो भी था सब समाज का था गांव वालों का का था आम गरीब जनता का था Bharat Tiwari ने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया ;
उसने अपनी सभी मांग सोशल मीडिया पर रखी। बंदुक उठाना गलत था, लेकिन बंदूक उठाने के पीछे वजह बहुत है ,,
"बिहार बाढ़ याद होगा, जवनिया गांव जो पूरी तरीके से गंगा जी में समा गया था। गांव वालों को जमीन मिल रही है, जमीन में बहुत फ्रॉड हो रहा था। लोगों के लिए Bharat Tiwari ने आवाज उठाया। कोई भी मुद्दा होता था, आवाज उठाता था। उसके गांव के लोग, आसपास के गांव के लोग शिकायत लेकर Bharat Tiwari के पास आते थे अपनी काम करवाने के लिए;
यही जवानी में सबका चहेता बन गया था:
आसपास के लोग भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद बोलते थे, क्रांतिकारी बोलते थे।
पुलिस उसके पीछे पड़ी रहे लेकिन कुछ नहीं कर पाया जब तक उसके हाथ में बंदूक थी लेकिन सब कुछ बोलकर Bharat Tiwari ने बंदूक को फेंक कर आत्मसमर्पण किया। उसके बाद पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया ,,
खत्म कर दिया कलयुग के भगत सिंह को।
उसका मुंह हमेशा के लिए चुप कर दिया।
सवाल यह है, एक दिन पहले पुलिस मानसिक विक्षिप्त घोषित करता है, दूसरे दिन एनकाउंटर कर देता है। जबकि Bharat Tiwari जब तक उसके हाथ में बंदूक था, किसी की हिम्मत नहीं थी सामने जाने की। जब उसने सरेंडर कर दिया, एनकाउंटर कर दिया गया।
जिसका एनकाउंटर करना है, वैसे लोग खुलेआम घूमते हैं।
बिहार में सोशल मीडिया से अगर एनकाउंटर किया जाए, हजारों ऐसे वीडियो मिल जाएंगे हथियार लहराते हुए।
पुलिस उन पर कार्रवाई क्यों नहीं करता?
Bharat Tiwari के लिए पूरा गांव, पूरा बिहार एक साथ आवाज उठा रहा है।
उसकी अच्छाइयां चले जाने के बाद पता चल रहा है।
भगत सिंह के रूप में Bharat Tiwari पैदा लिया था।
आपको Bharat Tiwari का डीआईजी, डीएम, डीएसपी सभी से सम्मानित किया हुआ फोटो सोशल मीडिया पर दिखेगा। न कोई आपराधिक रिकॉर्ड था, फिर भी एनकाउंटर कर दिया गया।
सिस्टम का ईगो शांत हो गया भगत सिंह को खत्म करके !
तुम मुझे वोट दो, मैं तू ही लाठी दूँगा….
बिहार में पहले पुलिस एनकाउंटर में भरत भूषण तिवारी की मौत हुई, उसके बाद अब प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठी चार्ज
सत्ता का घमंड नहीं करना चाहिए!
बंधुओ जिस भरत तिवारी को आज अपराधी और मानसिक विक्षिप्त बताया जा रहा है, वही कल जन समस्याओं को लेकर अधिकारियों को ज्ञापन देता दिखाई देता था। आखिर उसे इस स्थिति तक किसने पहुँचाया?
#ब्राह्मण_विरोधी_बीजेपी
मेरी माननीय पटना उच्च न्यायालय से आग्रह है की कल भोजपुर में "भरत भूषण तिवारी" की कथित तौर पर बिहार पुलिस द्वारा एनकाउंटर या कह लीजिए की हत्या की गई है,
SP समेत उन सभी पुलिस वालों को कर्नाटक की तरह फांसी या उम्रकैद की सजा सुनाई जाय! @barandbench@LiveLawIndia
@ndtvindia@vikasbha@SomuAnand_ मुठभेड़ में नहीं बल्कि धोखे से की गई हत्या है। उच्चाधिकारियों के आश्वासन पर हथियार फेंकने के बाद जिस तरीके से मारा है पुलिस ने लगता है कोई बड़ी सुपारिरले रखी थी भरत को मारने की।
बिहार में जाती देखकर सजा दिया जा रहा है।
जाती देखकर न्याय किया जा रहा है।
बिहार पुलिस को आज तक मैने रेप करने वाले हत्या करने वाले लोगों को एनकाउंटर करते नहीं देखा।
सिस्टम से सवाल करोगे तो फर्जी एनकाउंटर होगा।
शहीद भरत भूषण तिवारी 💔
सब चाहते हैं भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद बने लेकिन दूसरों के घरों में अपने घर में नहीं, क्योंकि यहां बदले में आपको मिलती है सिर्फ मौत।
काले अंग्रेज और उसकी गुलाम पुलिस।
यह भरत तिवारी है, इनका पुलिस ने हत्या कर दिया।
पिछले दो साल से जवनिया गाँव जो गाँव पूरा गंगा नदी में समां गया था उसके लिए नेता और अधिकारी से मिल मिल कर यह युवा ऊब चुका था।
अधिकारी और नेता के झूठे वादा से अवसाद में चला गया था,वह सिस्टम से तंग आ गया था।➕
#ब्राह्मण_विरोधी_बीजेपी
भरत तिवारी को बंदूक क्यों उठाना पड़ा उसका जवाब प्रशासन को देना पड़ेगा और भरत तिवारी विपक्षिप्त ही था तो उसने पुलिस के खिलाफ बंदूक क्यों उठाया?
हालांकि भरत तिवारी जिस प्रकार की बातें कर रहा था उससे वह विपक्षिप्त भी नहीं लग रहा था भरत तिवारी आहत थे व्यवस्था से,जिसे व्यवस्था ने सूला दिया है।
#JusticeForBharatTiwari
ये लो सबूत:-
जब भरत भूषण तिवारी ने सरेंडर कर दिया था तो उसे गोली क्यो मारी गई? ये कहाँ का न्याय है? और तो और उसने लाइव आकर सरेंडर किया तब भी गोली मार दिए? कोर्ट-कचहरी-मानवाधिकारों किसी का डर नहीं?
पुलिस ही अब वकील बन गई? कोर्ट बन गई? पुलिस ही अब जज भी बन गई? तुम्हें किसी की जान लेने का अधिकार किसने दिया?
लोग पूछ रहे हैं कि ये एनकाउंटर है या हत्या? बिहार के भोजपुर में हुआ यह एनकाउंटर पूरे बिहार समेत देश के लिए शर्म की बात है……
कल भरत तिवारी जी का एनकाउंटर हो
कर दिया है इस भाजपा सरकार में ,,
ब्राह्मणो की हत्या आम बात हो चुकी है
एक माँ के बहते आंशु हमसे देखा नही जा रहा है ...
भरत तिवारी जी का माँ 🙏#ब्राह्मण_विरोधी_बीजेपी
देश और समाज की बात करने वाली हर ईमानदार आवाज को मानसिक विक्षिप्त बता कर हमेशा के लिए शांत करने का शानदार इतिहास रहा है और स्वर्गीय तिवारी जी भी बिहार पुलिस की वर्दी में आए अपराधियों के द्वारा असमय मारे गए।
नमन है आपको तिवारी जी 🙏🙏🙏
@satya_1766 पुलिस वालों ने हत्या कर दी इसलिए अब उस स्वस्थ नौजवान को मानसिक रोगी बताने का प्रयास कर रहें हैं।
इस हत्या में शामिल हर एक पुलिस वाला बर्खास्त होना चाहिए अगर बिहार में कानून का राज है तो और गुंडा राज है तो कोई बात नहीं।
रिपोस्ट प्लीज 🙏🙏
भरत भूषण तिवारी कोई बड़ा अपराधी नहीं थे , हिस्ट्रीशीटर नहीं थे फिर भी इनका एनकाउंटर कर दिया गया। आज उनकी मौत हो गई।
पुलिस ने ख़ुद उनको मानसिक विक्षिप्त बताया, भारत तिवारी ने सरेंडर कर दिया था, फिर भी उन्हें 4 गोली मार दी गई……क्यों? आख़िर क्यों?
किसी बाप के बुढ़ापे की लाठी छीन लिए, किसी माँ के जिगर का टुकड़ा उससे अलग कर दिया। किसने हक दिया तुम्हें? कौन हो तुम? भगवान हो?
मीडिया को चुप करा देना, पत्रकारों के मुँह ठूँस देना, लेकिन इस ग़रीब के एनकाउंटर को अब पूरा देश जानेगा।
पूरी मशीनरी लगा दो लेकिन नहीं दबा पाओगे इस केस को। मामला बिहार के भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र क
ये एनकाउंटर सरासर गलत है । मानवता को शर्मसार करने वाला है । पुलिस अपने ही बयान में कमजोर साबित हुई है ।
एक मानसिक तौर पर पीड़ित युवक को गोली मारना ये दर्शाता है कि बिहार पुलिस कमजोर है ।
बड़े अपराधियों पर कार्रवाई होता नहीं है ।
बिहार पुलिस को हार्डकोर अपराधी और विछिप्त मानसिक रोगी का अंतर समझना होगा ।
मानवाधिकार आयोग को स्वतः संज्ञान में लेना चाहिए ।