@AnumaVidisha महोदया, जब जहाज पूरी तरह डूबने को होता है, क्रम अनुसार छोटी से बड़ी पहचान सब के सब आख़िर डूबते हुए जहाज को छोड़ देते हैं।
विडंबना देखिये कि बुझाता हुआ दिया बहुत अधिक फड़फड़ाता है, और अधिक लो देने की कोशिश में रहता है।
@VanditaMishr इसमें कोई शक नहीं.....!
यह मानव मनोविज्ञान है। अक्सर ये देखा गया है, वह व्यक्ति जो किसी चीज़ से वंचित है, उस चीज़ की सबसे अधिक आलोचना करता है।
@shyam_sh999 श्याम बाबू ऐसा ना ही हो...तो अच्छा है !
काश, भाजपा की ये पांच सितारा इमारतें शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों को दे दी जातीं।
क्या यह संभव है?
@abhisar_sharma राजनीतिक साठगांठ की बुनाई इतनी गहरी है कि असली सिरा पकडना बेहद मुश्किल है। फ़िलहाल सिरा कोई भी मिले उसी सिरे के उधेड़ सहारे ही गंदी राजनीतिक मानसिकता वाले लोगों का पर्दाफाश हो सकता है।
इसके लिए, पुलिस संगठन, कार्यपालिका और न्यायपालिका की वास्तविक इच्छाशक्ति की ईमानदारी चाहिए।
@VanditaMishr महोदया, जब जहाज पूरी तरह डूबने को होता है, क्रम अनुसार छोटी से बड़ी पहचान सब के सब आख़िर डूबते हुए जहाज को छोड़ देते हैं।
विडंबना देखिये कि बुझाता हुआ दिया बहुत अधिक फड़फड़ाता है, और अधिक लो देने की कोशिश में रहता है।
@VanditaMishr राजनीतिक साठगांठ की बुनाई इतनी गहरी है कि असली सिरा पकडना बेहद मुश्किल है। फ़िलहाल सिरा कोई भी मिले उसी सिरे के उधेड़ सहारे ही गंदी राजनीतिक मानसिकता वाले लोगों का पर्दाफाश हो सकता है।
इसके लिए, पुलिस संगठन, कार्यपालिका और न्यायपालिका की वास्तविक इच्छाशक्ति की ईमानदारी चाहिए।
@shyam_sh999 क्या बात करते हैं जनाब....
'मेलोडी डिप्लोमेसी' से दुग्गल साहब ने कई तीर एक साथ छोड़े हैं। मेलोनी के साथ-साथ यूरोप के कई सरकारी प्रमुख भी घायल हुए हैं। सभी सज्जन को ये मलाल है कि कैसे कोई मेलोनी के साथ इस तरह से मेलजोल बढ़ सकता है।
शायद बार्ट दे वेवर भी मेलोनी का दीवाना हो. 😊
@Queen510619151 रह गए नाममात्र स्कूल व विद्यालय. भाजपा मुख्यालय ही सही, यहां 100% विकास हुआ, और आगे रहेगा।
खैर....! अंधभक्तों को अच्छी शिक्षा मिले न मिले पर ईन मुख्यालयों पर मौखिक ज्ञान जरूर मिलेगा.
@AnumaVidisha हीन-भावना से त्रस्त,
योग्यता नहीं, उससे ग्रस्त,
कह क्यों नहीं देते कि....
"हमसे नहीं हो पाएगा"
दो पल ही सही, आम-आदमी,
चेन की सांस ले पाएगा...!!
@Priyaa_Purohit Neha, indeed a very courageous girl. A must need of her in building strong Indian Nation. Wish if she could have a nice & futuristic career in politics. Wisely choose the political party.
@drajoykumar RSS से जुडे लोगों ने जब से राजनीतिक सत्ता का स्वाद चखा है, चाहे यह स्वतंत्रता से पहले का है या स्वतंत्रता के बाद का। कहते हैं ना कि 'सत्ता की भूख मिटाए नहीं मिटती'।
सत्ता की लालसा के लिए वे 'चुनिंदा व्यक्तव्य' अपनाएंगे, 'किसी से भी मिल जाएंगे' और झूठा प्रचार व गलत सूचनाएँ देंगे।
@VinodSharmaView@sardesairajdeep@Subhashgarg1960 Maintaining a balanced journalistic practice is paramount. Are these claims being made just to appear neutral, or do they also ignore the actual truth?
@atullondhe राजनीतिक साठगांठ की बुनाई इतनी गहरी है कि असली सिरा पकडना बेहद मुश्किल है। फ़िलहाल सिरा कोई भी मिले उसी सिरे के उधेड़ सहारे ही गंदी राजनीतिक मानसिकता वाले लोगों का पर्दाफाश हो सकता है।
इसके लिए, पुलिस संगठन, कार्यपालिका और न्यायपालिका की वास्तविक इच्छाशक्ति की ईमानदारी चाहिए।
@ashokdadhwal196 राजनीतिक साठगांठ की बुनाई इतनी गहरी है कि असली सिरा पकडना बेहद मुश्किल है। फ़िलहाल सिरा कोई भी मिले उसी सिरे के उधेड़ सहारे ही गंदी राजनीतिक मानसिकता वाले लोगों का पर्दाफाश हो सकता है।
इसके लिए, पुलिस संगठन, कार्यपालिका और न्यायपालिका की वास्तविक इच्छाशक्ति की ईमानदारी चाहिए।
@VinodJakharIN@RahulGandhi ये काबिल-ए-तारिफ है।
जिस राहुल गांधी जनता की एक 'अदद आस' बनकर उभरें हैं। निसंदेह तारीख गवाह है, उन्होंने जनता की उम्मीदों को कभी निराश नहीं किया।
उम्मीद लेकर आए कुशेक बिहारी छात्रों को भी राहुल गांधी से सकारात्मक आश्वासन जरूर मिलेगा.......
@Priyaa_Purohit ये काबिल-ए-तारिफ है।
जिस तरह राहुल गांधी जनता की एक 'अदद आस' बनकर उभरें हैं। निसंदेह तारीख गवाह है, उन्होंने जनता की उम्मीदों को कभी निराश नहीं किया।
अभी कुछ देर पहले राहुल गांधी ने ट्वीट करके लड़की को पूरी सहायता और आश्वासन देने की बात कही है।
@VanditaMishr राजनीति और सत्ताधारी दल के बुरे कारनामे का साहचर्य.
वर्तमान दशक के लिए कट्टरपंथी धार्मिक मानसिकता वाले लोगों का धमाल, खुलेआम गाली-गलोच, दंगा-फसाद और तोड़फोड़ करना पहले आम बात तो नहीं थीं।
ये सब बिना राजनीति संरक्षण के संभव नहीं।
@whoskj2@RahulGandhi ये काबिल-ए-तारिफ है।
जिस तरह राहुल गांधी जनता की एक 'अदद आस' बनकर उभरें हैं। निसंदेह तारीख गवाह है, उन्होंने जनता की उम्मीदों को कभी निराश नहीं किया।