@Mangesh90345178@AnujShukla00009 Bilkul leke aayenge kyunki tum logo ne nak me dum kar diya h ab...pani sar se upar ho chuka h...hum chup baithe iska ye matlab nahi ki tum general walo ka kaise bhi soshan kar lo..bhot fake chochan ki kahaniya sun li humne
The draconian SC/ST Act allows arrest without a preliminary enquiry and makes bail extremely difficult.
So, did Rahul Gandhi get arrested recently when an SC/ST Act case was filed against him?
If not, then what exactly is going on?
Either the law is not as powerful as claimed, or politicians seem to operate under a completely different set of rules.
One law for ordinary citizens, another for politicians?
हरदोई में टीचर राजेंद्र कुमार ने छात्रा छमा दीक्षित को इतना मारा कि उसकी मृत्य हो गई उसकी गलती इतनी थी कि वो टीचर से अपने साथी की शिकायत करने गई थी बजाय समझाने के टीचर ने छमा दीक्षित को ही बुरी तरह से डंडों से मारा।
और एक बात बता दूं शिक्षक मोदी जी के पिछड़े वर्ग से आते हैं और क्षमा दीक्षित ब्राह्मण थी छमा के परिजन बहुत गरीब हैं पर सरकार के अनुसार तो टीचर ही गरीब और दबा कुचला माना जाएगा अतः मेरा मोदी जी से निवेदन है कि बच्ची के परिवार पर भी SC ST केस लगवा कर जेल में डलवा दो इन साले ब्राह्मणों को जीने का कोई अधिकार नहीं है।
इति 🙏
Bhavna Mishra, a gold medalist has been dragged into a false case under the SC/ST Act.
Five years of court dates, allegations and mental pressure.
No relief. No closure. Just exhaustion.
This is what misuse of the law looks like when the system refuses to listen.
Stop the misuse of the SC/ST Act.
UGC Rollback. @narendramodi
@ishwar7627@RatanRanjan_ 'Etna' nahi ..'itna' hota h 'shok' nahi 'shauk' hota h...loda nahi 'lauda' hota h echcha nahi ichcha hota h.... reservation ki paidaish...
CHO साहिबा अब कलेक्टर पर SC -ST एक्ट मुकदमा कर दो ।
कलेक्टर कौन होता है आपकी योग्यता मापने वाला जबकि CHO बनने का अधिकार आपको बाबा साहब ने दिया है।
जय भीम
Toilet paper of India did not mention that the victim was a Mishra Brahmin woman.
When the victim is Dalit, they point it out. When the victim is Savarna, they do their best to hide the caste details, so Savarnas never realize that we are being ethnically erased.
Hisab Chukta.
किसी के कर्मफल के बीच में अपनी टाँग नहीं फँसानी चाहिए, यदि आपको दैवीय संकेत मिले सहायता के तब ही सहायता करो। अन्यथा ये देश देख ही रहा है कि एक ब्राह्मण अध्यापक ने अपना उपनाम तक दे दिया, अपनी बेटी दे दी, पर कृतध्नता देखिये, आज सारे ब्राह्मण गाली खा रहे हैं। उसके कर्मफल बाँट लिए!!
श्री चिराग पासवान जी, आपने कहा आरक्षण पर समीक्षा तो छोड़िए, चर्चा भी नहीं होगी। यदि ऐसा हुआ को इतने लोग सड़कों पर आ जाएँगे कि सँभालना कठिन हो जाएगा।
मुझे नहीं लगता कि आपको ‘चर्चा’ और ‘समीक्षा’ का अर्थ भी पता है। नौ बार के सांसद और विधायक पिता के पुत्र, आज भी आरक्षित सीट से राजनीति कर रहे हैं। और दुर्भाग्य कि आज भी अपने समर्थकों को आप आगजनी-दंगा करने वाले गुंडों की तरह ही देखते हैं कि इन्हें सँभालना मुश्किल हो जाएगा।
आप ऑप्रेस्ड हैं, दलित हैं, पीड़ित हैं और आप सड़कों पर आने की धमकी भी दे देते हैं, ये विरोधाभास कैसे बाँच लेते हैं आप?
और हाँ, आपके चाहने, न चाहने से कुछ नहीं होता। घर में टीवी है तो एकाध बार डिबेट देखिए कि ‘चर्चा’ किस विषय पर हो रही है। और @JPNadda जी आरक्षण पर सोच रहे हैं या नहीं, यह भी आपको पता चल जाएगा।
वैसे यह भी ठीक है कि जब आपको ही ‘चर्चा’ और ‘समीक्षा’ का नहीं पता, तो जिन्हें आप सड़कों पर लाना चाह रहे हैं, वो कितना ही समझ पाएँगे। आपकी जाति SC का सबसे बड़ा हिस्सा ले जाती है। पासवान, चमार, धोबी और पासी 95% आरक्षण ले रहे हैं।
तो देखिए, युवा बिहारी @iChiragPaswan जी, चर्चा तो आरंभ हो चुकी है और @BJP4India ने एक कदम आधिकारिक रूप में बढ़ाया है, एक कदम अनाधिकारिक रूप से अन्य लोगों से रीच आउट कर के।
आप ‘बिहारी फर्स्ट’ की बात करते थे, ये अचानक से माफिया की भाषा क्यों बोल रहे हैं। आप तो मोदी जी के हनुमान हैं, मोदी जी पर विश्वास रखिए। वो चर्चा करवा रहे हैं, वरना आपको लगता है कि अनिल बेलूनी जी की कृपादृष्टि के बिना कोई भी टॉपिक चर्चा में आ सकता है?
गेम समझिए। परिस्थिति बदल रही है। महबूबा ने भी धमकी दी थी। वीपी सिंह को भी लगा था कि वो अनंत काल पीएम रहेगा। जनता से उसी पार्टी को चुना जिसके नेता ने संसद में खड़े हो कर ओबीसी आरक्षण का विरोध किया था।
नेहरू ने OBC को 1955 में ही कोटा देने का विरोध किया था। 1961 में मुख्यमंत्रियों को लिखे पत्र में नेहरू ने आरक्षण का विरोध किया था। पर वो लगातार चुनाव जीतते रहे। तो ऐसा तो है नहीं कि यदि @narendramodi आज इस पर समीक्षा करें, और वह चुनाव हार जाएँगे!
संभव है कि सवर्ण और अनरिप्रेजेंटेड ओबीसी, एससी एकमुश्त वोट दे दे! इसीलिए, चर्चा और समीक्षा दोनों हो रही है, और हम रिफॉर्म भी करवा लेंगे।
Alsi adiwasi honge bechare. Meena log inka haq kha gaye. Maharastra Jharkhand chattisgarh m.p rajasthan ke vangad mewar me adivasi nahi hote hai. Sirf desh me ek hi kaum ST ka pura reservation kha rahi hai.
ध्यान देने वाली बात है कि ओमप्रकाश वाल्मीकि का जन्म तराई क्षेत्र में हुआ था। तराई क्षेत्र में कुछ मीटर जमीन खोदने पर ही भूजल निकल आता है।
फिरभी यदि ओमप्रकाश और उसके पुरखे हजारों साल पीने के पानी के लिए तरसते रहे तो किसकी गलती है ठाकुरों की?