आज युगाब्द 5127, विक्रम संवत 2082, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी के दिन नवनिर्मित सेवा तीर्थ में केंद्रीय कैबिनेट की प्रथम बैठक हुई। इसमें देश के लिए कई अभूतपूर्व निर्णय लिए गए।
इस दौरान, कैबिनेट ने ये संकल्प भी लिया कि स्वदेशी सोच, आधुनिक स्वरूप और 140 करोड़ देशवासियों के अनंत सामर्थ्य की बुनियाद पर बना सेवा तीर्थ राष्ट्रसेवा के कर्तव्य-यज्ञ को निरंतर आगे बढ़ाएगा।
इस राष्ट्रयज्ञ में हमारा मंत्र है - यद् भद्रं तन्न आ सुव॥
अर्थात्, जो कुछ शुभ और कल्याणकारी है, जो भी नए विचार हैं, वो हमें अनवरत प्राप्त होते रहें।
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