आज विदेश मंत्रालय ने औपचारिक रूप से स्वीकार लिया कि कुछ लोगों ने “निजी तौर “ पर पाकिस्तान डेलीगेशन से मुलाक़ात की। इसे सरकारी प्रयास नहीं माना जाए। जिन लोगों ने मुलाक़ात की उनमें बीजेपी नेता भी शामिल थे। बाक़ी बीजेपी के करीबी लोग इसमें थे। कोई ग़लत नहीं या। सामान्य प्रकिया है। होना भी चाहिए।
बस अब यहाँ सवाल है कि अगर कोई निजी तौर पर पाकिस्तानी डेलीगेशन से मिल रहा है,पार्टी कर रहा है तो इसका कहीं गुस्सा टीवी चैनल पर दिखा?
अब यही सोच कर देखिए कि किसी विपक्षी नेता के मित्र के ससुर का समधी का मामा भी ऐसे बातचीत/पार्टी में दिख जाता तो पूरी विपक्ष को पाकिस्तानी बुलाकर अंतहीन टीवी डिबेट हो रहे होते। तमाम न्यूज़ एजेंसी के कैमरा उन सभी लोगों के घर के हर छेद में लग गए होते जो ऐसी मीटिंग में शामिल हुए होते।
चाहे धर्म के नाम पर करोड़ों के चढ़ावा घोटाला हो या राष्ट्रवाद के नाम पर पाकिस्तान के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाना,यह कुछ “खास” लोगों के लिए मानो आरक्षित कर दिया गया है!
गौतम गंभीर-श्रेयश-अजित अगरकर की पर्सनल टीम आयरलैंड से बुरी तरह हारी! लगातार दो मैच हारी! सीरीज हारी!
इनकी पर्सनल टीम की हार से कतई दुःख नहीं है! पहली बार अपने देश से जुडी टीम भले वह पर्सनल टीम ही सही हो,के हारने पर ख़ुशी हो रही है!
ये हार डिसर्व करते थे! इन्हे हारना ही चाहिए था! ईगो,अहंकार और साजिश तीनो भाव के साथ खेलेंगे तो यह होना ही था! वैभव की जगह जिस खिलाडी को लिया गया था उन्होंने पांच गेंद पर एक रन बनाया!
और आज इन गौतम गंभीर-श्रेयश-अजित अगरकर के साथ BCCI और इनके "लाभार्थी" पूर्व क्रिकेटर और एक्सपर्ट भी आज एक्सपोज़ हो गए जो "किन्तु-परन्तु-ऐसा नहीं होता है-अभी उम्र है" जैसे तर्क के साथ 15 साल के वैभव के साथ हो रही बड़ी साजिश के हिस्सेददार बने हुए हैं!
मुझे लगा था सिर्फ संजय मांजेरकर हैं! लेकिन वह तो छोटे प्यादे हैं! वैभव को झुकाने के लिए पूरी कायनात लगी है! कैसे देश में क्रिकेट में
कोई सुपरस्टार बिहार जैसे सुदूर इलाके से बिना गॉड फादर के इस तरह के सुपर स्टारडम तक पहुँच रहा है!
चलिए इस चर्चा को और थोड़ा आगे बढ़ाते हैं!
राम मंदिर निर्माण का रास्ता तब साफ हुआ, जब सुप्रीम कोर्ट ने भगवान रामलला विराजमान के पक्ष में फैसला सुनाया। लेकिन क्या आपको पता है कि 1989 से पहले हिंदू पक्षकारों में से किसी ने भी विवादित जमीन पर दावा नहीं किया था।
गोपाल सिंह विशारद ने राम जन्मभूमि पर पूजा की अनुमति मांगी। निर्मोही अखाड़ा ने मंदिर प्रबंधन अपने हाथ में सौंपने की मांग की थी। तात्कालीन गृहमंत्री और कांग्रेस नेता बूटा सिंह ने अपनी कानूनी समझ का इस्तेमाल करते हुए विश्व हिंदू परिषद (VHP) को बहुत महत्वपूर्ण सुझाव दिया।
जब राम मंदिर आंदोलन जोर पकड़ने लगा और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने विवादित परिसर का ताला खुलवा दिया तब तत्कालीन गृहमंत्री बूटा सिंह ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित के जरिए विश्व हिंदू परिषद के अशोक सिंघल को संदेश भेजा। सरदार बूटा सिंह ने दीक्षित के जरिए सिंघल को बताया कि हिंदू पक्ष की ओर से दाखिल किसी मुकदमे में जमीन का मालिकाना हक नहीं मांगा गया है और ऐसे में उनका मुकदमा हारना तय है। उसके बाद रामलला को पक्षकार बनाया गया था। @chitraaum@VinodAgnihotri7
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@thekumarshyam एक-दूसरे को मार काट के ख़त्म ही कर दो न तब, तुम निकलो तलवार लेके आगे-आगे, और अपने पूरे परिवार के लोगों को भी शामिल करो इसमें, फिर बात करना...पीछे रहेंगे तुम्हारे.. नहीं तो तुम्हारे जैसे हर तीसरा चोमू, लोगों को ऐसे उकसाते मिल जाते हैं.
इसमें गलत क्या कहा था पुलिस पर गोली तान ना मतलब सीधे पुलिस के इकबाल को चुनौती देना,
अब सिर्फ वो ब्राह्मण है इसीलिए उसे छूट मिले ये तो लोकतंत्र में संभव नहीं है क्योंकि यहां ब्रह्महत्या जैसा कोई फर्जी कॉन्सेप्ट ही नहीं है
आज तक ने ग़ज़ब किया।
योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली की कलई ही खोलकर रख दी।
बाकायदा ग्राफिक्स बनाकर दिखाया है,
कि कैसे लखनऊ के भीषण अग्निकांड के ज़िम्मेदार एक एक महकमे की ज़िम्मेदारी सीधे योगी आदित्यनाथ की है।
इतना ही नहीं, पिछले कई हादसों का ब्योरा सामने रखकर स्थापित किया कि कैसे योगी आदित्यनाथ ने हर बार चंद फुटकर मछलियों पर एक्शन लिया गया है,
और मगरमच्छों को बचाया गया है।
योगी आदित्यनाथ की घोर प्रशासनिक अनुभवहीनता और प्रचंड अक्षमता का यही कटु सत्य है।
आजतक ने किन परिस्थितियों में इस सत्य को सामने रखा,
नहीं पता,
मगर यदि एक पल के लिए भी मीडिया से सूचना का दबाव ख़त्म हो जाए,
तो योगी आदित्यनाथ का सत्य इतना त्रासद और संवेदनहीन है कि 24 घंटे भी सरकार चलाना मुश्किल होगा!!
आजतक को अपवाद स्वरूप ही सही, इस सत्य के साक्षात्कार की बहुत-बहुत बधाई!!
Israel Deliberately Killed Palestinian Children & Destroyed Their Childhood, Committed War Crimes : UN Inquiry Commission.
As per the report, more than 20,000 Palestinian children have been killed and over 44,000 injured since Oct 7, 2023.
The Commission is chaired by Dr. S Muralidhar, former High Court Chief Justice who is presently a Senior Advocate at the Supreme Court of India.
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@AnupamNawada अंतिम पैरा पढ़कर हँसी आ गयी चमनचु अनुपम 😂
तुमलोग तो अब इस महँगाई का दुःख भी नहीं मनाने देते हो चोमू
ये बोलो सिर्फ सरकार ही स्थायी है,बाकी सब चीज़ अस्थिर,चाहे वो कोई भी उपयोग में आने वाली घरेलू सामान ही क्यों न हो।तुमलोग सब फ्री का ही यूज़ करते हो क्या?जो पता नही चल रहा महँगाई?
एनकाउंटर तो हर दूसरे तीसरे दिन उत्तर प्रदेश में होता ही है, फिर भी पूरी मीडिया एक्टिविस्ट लॉबी में चुप्पी और सनामन्न रहते हैं सब। पर बिहार में अचानक से भरत भूषण तिवारी का एनकाउंटर हो गया...
फिर सब जाग गए और मोरल, एथिक्स, कानून, संविधान आदि की बातें करने लगे। दरअस्ल यहाँ उन्हें इन सब बातों की याद तब आई जब जब मरने वाले में कुछ ख़ास था..
सोचिये ऐसा क्या इसमें ख़ास है जो अन्य मरने वालों में नहीं रहता है? समझदार लोग जान गए हैं मैं क्या कह रहा हूँ... किसलिए ये सब के सब इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं, पुलिस को कोस रहे हैं Cm का इस्तीफ़ा माँग रहे हैं।
One “TIWARI” got killed in a fake encounter and it became a national news
Lots of Muslims have been killed in such fake encounters and no one bats an eye.
This is called Upper Caste majority privilege.
कल री नीट बिना लीक हो जाए तो सरकार या सरकार के प्रशंसकों को पीठ थपथपाने से बचना चाहिए। यह कोई बहुत गर्व की बात नहीं है की पेपर लीक हुआ। और एक पेपर कराने के लिए रक्षा एजेंसी और PMO की ज़रूरत पड़ी। यह आज भी शिक्षा मंत्रालय की नाकामी का उदाहरण है। कल भी रहेगा।