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@Ravindrau07 मुझे तो उस लड़के की problem solving देखकर ज़्यादा मज़ा आ रहा है,
जगह कम थी इसलिए उसने AC को नहीं, AC लगाने के नियमों को ही adjust कर दिया।
पिछले कुछ दिनों से एक बदलाव लगातार नज़र आ रहा है।
जिन लोगों से मैं जुड़ा हूँ, उन्हें हमेशा उनके शब्दों से पहचाना है। उनकी पोस्ट में सिर्फ़ content नहीं होता था, उसमें उनकी सोच, उनकी मेहनत और उनकी अपनी एक पहचान होती थी।
लेकिन अब धीरे-धीरे एक अलग रुझान दिख रहा है।जहाँ पहले लिखावट दिखाई देती थी, वहाँ अब ज़्यादातर वीडियो नज़र आते हैं।
वजह भी शायद साफ़ है - वीडियो जल्दी reach देते हैं, जल्दी views लाते हैं, और numbers का आकर्षण किसी को भी अपनी तरफ़ खींच सकता है।
इसमें गलत कुछ भी नहीं है। हर कोई चाहता है कि उसकी बात ज़्यादा लोगों तक पहुँचे।
लेकिन कभी-कभी यह सोचने पर मजबूर करता है कि कहीं तेज़ reach की इस दौड़ में हम उस चीज़ को पीछे तो नहीं छोड़ रहे, जिसने हमें सबसे पहले अलग पहचान दी थी-हमारे शब्द।
Views आते-जाते रहते हैं।
लेकिन अच्छी लिखावट एक पहचान छोड़ जाती है।
एक तरफ़ 5 Million Impressions का target खड़ा है।
दूसरी तरफ़ आप लोग हैं,
जिनसे बात करना,
जुड़ना,
और discussion करना मुझे हमेशा अच्छा लगता है।
Problem ये है कि दोनों चीज़ें एक साथ उतना आसान नहीं होतीं जितना ऊपर से दिखाई देता है।
तो आज फैसला आप लोग करिए...
पहले पूरा focus 5 Million Impressions पर रखा जाए,
या फिर पहले की तरह आप लोगों के साथ जुड़कर,
बातें करते हुए आगे बढ़ा जाए? 👀
@Poojakumar89308 मेरे बस की बात नहीं है यार, जिस चीज़ के लिए कोई सालों तक सुबह-शाम एक कर दे, मैं तो आख़िरी दरवाज़े पर पहुँचकर उसे छोड़ने की कल्पना भी नहीं कर पाता।
@askvipendra असली और नकली का फर्क अक्सर सामान में नहीं, भरोसे में पकड़ा जाता है। जिस दिन सवाल पूछना बंद हो जाए, उसी दिन नकली चीज़ों का बाज़ार शुरू हो जाता है।