गांव की मिट्टी से निकला, छात्रों के बीच पला-बढ़ा @Gopalsaharnnsui आपका अपना साथी है।
छात्रों की आवाज़ बनने के इस सफर में उसे आपका साथ और एक मौका चाहिए।
NSUI Panel | 6 • 4 • 1 • 2
विजय शंकर मीणा • 6 | वीर चतरथ • 4 | नम्रता चौधरी • 1 | गोपाल चौधरी • 2
#NSUIForABetterDU
शायद मानवेंद्र सिंह ये भूल गए कि अपने चार अंगरक्षकों के साथ सामने खड़ी उस चट्टान से टकरा रहे है, जिसके सुहाग को देश ने अपना रक्षा मंत्री बनाया था।
#जसोल
हरीश चौधरी को पश्चिमी राजस्थान की राजनीति में किस नेता ने बैक फुट पर लाकर फेल कर दिया? अब हरीश चौधरी अपने हथकंडे कितने भी अपना ले लेकिन वो मुकाम अब हाथ से खिसक चुका है।
कांग्रेस यदि किसी ईमानदार शिक्षाविद या प्रशासनिक अधिकारी को नियुक्त करती तो उसके साथ ऐसा नहीं होता।
शतरंज के प्यादे जी द्वारा लिखित
हर बात से सहमत हूं, बाकी इंटरव्यू होना ही नहीं चाहिए ये एक भोत ही घटीया प्रेक्टिस है, किसान व गामङू कौमों को पीछे धकेलने के लिए।
अपनी पार्टी के राजनैतिक हित के लिए समाज को बीच में लाने वाले धरती के सबसे बड़े धूर्त होते हैं।
जब यह शिक्षा मंत्री था तो इसने अपने समाज के लोगों को ट्रांसफर कर बाड़मेर और जैसलमेर भेजा था, और जब वे लोग समाज के नाम पर इससे मिले तो इसने समाज की नहीं पार्टी की बातें की थी।
यदि समाज को याद करने वाले इस नेता का कोई कार्य कुत्ता पोस्ट पढ़ रहा है तो इसे कहे कि समाज की बेटी पारूल की बात राजनैतिक मंच पर उठाए ,ताकि समाज इसके पक्ष में अंता पहुंचे।
क्योंकि पारूल कांग्रेस की राजनीति की शिकार हुई है.!
यह पारूल के अंकों पर इसी तरह के मंच पर सवाल खड़ा करें।
पर नहीं करेगा, क्योंकि ऐसा करते ही इसे धक्का देकर दुकान से नीचे उतार देंगे।
पारूल की आर ए एस में 193 वीं रैंक है, यदि साक्षात्कार नहीं होता तो उसकी रैंक 20 से नीचे रहती।
असलियत में यदि नरेश समर्थक इसके जूत भी मारते तो समाज इसके साथ नहीं जाएगा, इसके निजी समर्थकों को छोड़कर।
मैं तो इसे तब सामाजिक मानूं जब नागौर की पारूल चौधरी जिसे इसके आका तोतले द्वारा नियुक्त आरपीएससी सदस्य राठौड़ द्वारा साक्षात्कार में 28 अंक दिए
@GovindDotasra जी आपके मुंह से शांति अशांति और सभ्य समाज के शब्द शोभा नहीं देते हैं, आपने पैसे लेकर पॉस्को आरोपी नाबालिग लडकियो के शौकीन मेवाराम को पार्टी में ले लिया तो फिर ये शब्द अब अपने अंदर ही रखो।
आप जिस समाज से आते हो उस समाज के ये सिद्धांत नहीं है।
@GovindDotasra जी आपके मुंह से शांति अशांति और सभ्य समाज के शब्द शोभा नहीं देते हैं, आपने पैसे लेकर पॉस्को आरोपी नाबालिग लडकियो के शौकीन मेवाराम को पार्टी में ले लिया तो फिर ये शब्द अब अपने अंदर ही रखो।
आप जिस समाज से आते हो उस समाज के ये सिद्धांत नहीं है।
गाड़ी रोकने की घटना पर पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा का जवाब-राजस्थान का सबसे बड़ा एक समाज,जिससे मैं आता हूं...अगर उसकी गाड़ी रोक सकते हैं तो फिर सोचो आपका (अंता के मतदाता) क्या होगा?....
इन महाशय को अभी हाल ही में पॉक्सो आरोपी @MewaramJain ने भी 2 करोड़ दिए तब जाकर @GovindDotasra जी ने पार्टी की रीति नीति को तार तार कर पुन कांग्रेस में शामिल किया है।
अब डोटासरा बहुत धनवान है पैसे छापने शुरू कर दिए हैं।
गोविंद डोटासरा
वर्ग - OBC NON क्रिमिलयर
✅संपति - सभी चुनावी शपथ पत्र के अनुसार है
⚡2013 - 1.28 करोड़
⚡2018 - 2.04 करोड़
⚡2023 - 6 करोड़
अब बात ये है कि ये करोड़पति होकर भी ओबीसी सूची में क्या कर रहे है
क्या एक गरीब ओबीसी का बच्चा इनके बच्चे की बराबरी कर सकते है
इनके बेटे अविनाश डोटासरा ने OBC वर्ग का लाभ लिया ।
जैसे EWS मै है वैसे ही ओबीसी सूची का भी सरलीकरण करना जरूरी है
OBC ही नहीं सभी वर्गों का क्योंकि जाति के नाम पर बहुत से करोड़पति लोग असली गरीबों का हक खा रहे है
तस्वीर बिहार चुनाव की है..
नेता हरीश चौधरी जी मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रभारी है....
राहुल गांधी जी को पार्टी की रिपोर्ट दे रहे हैं...
लेकिन इन तस्वीरों ने राजस्थान की राजनीति को गर्म कर दिया है शेखावाटी से लेकर पश्चिमी राजस्थान तक हलचल मची हुई है।
अशोक गहलोत राजस्थान में कांग्रेस संगठन को कमजोर करने का प्रयास हमेशा से करते आ रहे है।
इसका तरो ताजा उदाहरण संगठन सृजन प्रोग्राम है
उसको अशोक गहलोत के करीबी लोगों ने प्रभावित करने के हजारों हथकंडे अपनाए।
जोधपुर , जयपुर , अजमेर , दौसा, जालौर , बाड़मेर , श्रीगंगानगर , कोटा , राजसमंद , चुरू , भीलवाड़ा में अशोक गहलोत के इशारे पर क्या क्या हुआ आप सबने देखा है।
धारीवाल,भाया, लोढ़ा,जैन,सोलंकी, पाराशर,सिंघवी, जोशी, राठौड़, शर्मा, भारद्वाज etc. इन लोगों ने गहलोत के इशारे पर हमेशा पार्टी को गर्त में धकेला है।
मोदी ने पीएम पद की गरिमा ही खो दी... जरा बहुत भी इसे शर्म नहीं है... कांग्रेस-राजद गठबंधन में तो राजद सीएम पद का स्वाभाविक दावेदार है, राजद की सीटें ही ज्यादा आनी हैं... असल में कट्टा तो नीतीश बाबू तानते हैं बंद कमरे में, जो बीजेपी से कम विधायक लाकर भी सीएम बन जाते हैं...
पॉक्सो और बलात्कार के आरोपी, नाबालिग लडकियो के शौकीन पूर्व विधायक @MewaramJain को कांग्रेस में शामिल करने पर हर जगह विरोध हुआ लेकिन धनबल के आगे विरोध थमता गया। आज चर्चा है कि @GovindDotasra को दूसरी किश्त देने के लिए मुलाकात हुई।
पॉक्सो और बलात्कार के आरोपी, नाबालिग लडकियो के शौकीन पूर्व विधायक @MewaramJain को कांग्रेस में शामिल करने पर हर जगह विरोध हुआ लेकिन धनबल के आगे विरोध थमता गया। आज चर्चा है कि @GovindDotasra को दूसरी किश्त देने के लिए मुलाकात हुई।
खलनायक के जिले मे कांग्रेस की स्थिति
गहलोत के घर में ही कांग्रेस की दीवारें दरक रहीं हैं
जोधपुर जो कभी अशोक गहलोत की राजनीतिक प्रयोगशाला माना जाता था — आज कांग्रेस के भीतर बढ़ती गुटबाज़ी और संगठनात्मक अव्यवस्था का प्रतीक बन चुका है।
संगठन सृजन अभियान के तहत जोधपुर में कांग्रेस शहर अध्यक्ष के चुनाव को लेकर ऐसा बवाल मचा कि पर्यवेक्षक सुशांत मिश्रा के सामने ही नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हो गई।
यह दृश्य किसी छोटे जिले का नहीं, बल्कि खुद मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत के गृह जिले का है — जहाँ से उनकी राजनीति की शुरुआत हुई और जहाँ से उन्होंने दशकों तक अपनी पकड़ बनाए रखी। लेकिन अब वही पकड़ ढीली पड़ती दिख रही है।
कांग्रेस के भीतर अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर गहलोत अपने ही घर में संगठन को एक नहीं रख पा रहे,
तो वे राजस्थान या देशभर में पार्टी की एकता और कैडर निर्माण की बात कैसे कर सकते हैं?
गहलोत ने अपनी पूरी राजनीति व्यक्तिवाद और सत्ता-संतुलन के खेल पर खड़ी की,
पर अब यह स्पष्ट होता जा रहा है कि उन्होंने संगठन निर्माण की जड़ों को मज़बूत करने के बजाय
उन्हें अपने ही हितों के अनुरूप मोड़ दिया।
आज जोधपुर में कांग्रेस के कार्यकर्ता हताश हैं,
नेता आपस में बंटे हुए हैं, और
संगठन सृजन अभियान संगठन विघटन अभियान में बदलता नज़र आ रहा है।
कांग्रेस के लिए यह चेतावनी है —
अगर अशोक गहलोत जैसे वरिष्ठ नेता अपने जिले में ही पार्टी का कैडर खड़ा नहीं कर पा रहे,
तो अशोक गहलोत के लिए राजस्थान में कांग्रेस का ढांचा खड़ा रखना मुश्किल है।