॥सुंदर कांड॥
सुनि रावन पठए भट नाना। तिन्हहि देखि गर्जेउ हनुमाना॥
सब रजनीचर कपि संघारे। गए पुकारत कछु अधमारे॥
भावार्थ:-यह सुनकर रावण ने बहुत से योद्धा भेजे। उन्हें देखकर हनुमान्जी ने गर्जना की। हनुमान्जी ने सब राक्षसों को मार डाला, कुछ जो अधमरे थे, चिल्लाते हुए गए॥
#RamCharitManas
#SundarKand
॥सुंदर कांड॥
चलेउ नाइ सिरु पैठेउ बागा। फल खाएसि तरु तोरैं लागा॥रहे तहाँ बहु भट रखवारे। कछु मारेसि कछु जाइ पुकारे॥
भावार्थ:-वे सीताजी को सिर नवाकर चले और बाग में घुस गए। फल खाए और वृक्षों को तोड़ने लगे। वहाँ बहुत से योद्धा रखवाले थे। उनमें से कुछ को मार डाला और कुछ ने जाकर रावण से पुकार की-॥
#RamCharitManas
#SundarKand
॥सुंदर कांड॥
देखि बुद्धि बल निपुन कपि कहेउ जानकीं जाहु।
रघुपति चरन हृदयँ धरि तात मधुर फल खाहु॥
भावार्थ:-हनुमान्जी को बुद्धि और बल में निपुण देखकर जानकीजी ने कहा- जाओ। हे तात! श्री रघुनाथजी के चरणों को हृदय में धारण करके मीठे फल खाओ॥
#RamCharitManas#SundarKand
ॐ तत्पुरुषाय विदमहे
महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्।
आदिदेव महादेव कि विशेष पूजा-अर्चना को समर्पित श्रावण मास के पहले सोमवार की शुभकामनायें।
शिवभक्त कांवड़ियों द्वारा शिवजी का जलाभिषेक सामाजिक समरसता बढ़ाते हुए सांस्कृतिक उत्थान में सहायक बने।
#हर_हर_महादेव#सावन_सोमवार
॥सुंदर कांड॥
तिन्ह कर भय माता मोहि नाहीं।
जौं तुम्ह सुख मानहु मन माहीं॥
भावार्थ:-(हनुमान्जी ने कहा-) हे माता! यदि आप मन में सुख मानें (प्रसन्न होकर) आज्ञा दें तो मुझे उनका भय तो बिलकुल नहीं है॥
#RamCharitManas#SundarKand
॥सुंदर कांड॥
सुनहु मातु मोहि अतिसय भूखा। लागि देखि सुंदर फल रूखा॥सुनु सुत करहिं बिपिन रखवारी। परम सुभट रजनीचर भारी॥
भावार्थ:-हे माता! सुनो, सुंदर फल वाले वृक्षों को देखकर मुझे बड़ी ही भूख लग आई है। (सीताजी ने कहा-) हे बेटा! सुनो, बड़े भारी योद्धा राक्षस इस वन की रखवाली करते हैं॥
#RamCharitManas
#SundarKand
॥सुंदर कांड॥
अजर अमर गुननिधि सुत होहू। करहुँ बहुत रघुनायक छोहू॥करहुँ कृपा प्रभु अस सुनि काना। निर्भर प्रेम मगन हनुमाना॥
भावार्थ:-हे पुत्र! तुम अजर (बुढ़ापे से रहित), अमर और गुणों के खजाने होओ। श्री रघुनाथजी तुम पर बहुत कृपा करें। 'प्रभु कृपा करें' ऐसा कानों से सुनते ही हनुमान्जी पूर्ण प्रेम में मग्न हो गए॥
#RamCharitManas
#SundarKand
॥सुंदर कांड॥
बार बार नाएसि पद सीसा। बोला बचन जोरि कर कीसा॥अब कृतकृत्य भयउँ मैं माता। आसिष तव अमोघ बिख्याता॥
भावार्थ:-हनुमान्जी ने बार-बार सीताजी के चरणों में सिर नवाया और फिर हाथ जोड़कर कहा- हे माता! अब मैं कृतार्थ हो गया। आपका आशीर्वाद अमोघ (अचूक) है, यह बात प्रसिद्ध है॥
#RamCharitManas
#SundarKand
ॐ देव्यराज सेव्यमानं पावनांघ्रिपंकजम्
कालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम्
नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगंबरं
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥
धर्मनगरी काशी में आज 'काशी के कोतवाल' श्री काल भैरव जी के दर्शन-पूजन कर संपूर्ण सृष्टि के कल्याण हेतु प्रार्थना की।
॥सुंदर कांड॥
मन संतोष सुनत कपि बानी। भगति प्रताप तेज बल सानी॥आसिष दीन्हि राम प्रिय जाना। होहु तात बल सील निधाना॥
भावार्थ:-भक्ति, प्रताप, तेज और बल से सनी हुई हनुमान्जी की वाणी सुनकर सीताजी के मन में संतोष हुआ। उन्होंने श्री रामजी के प्रिय जानकर हनुमान्जी को आशीर्वाद दिया कि हे तात! तुम बल और शील के निधान होओ॥
#RamCharitManas
#SundarKand
॥सुंदर कांड॥
सुनु माता साखामृग नहिं बल बुद्धि बिसाल।
प्रभु प्रताप तें गरुड़हि खाइ परम लघु ब्याल॥
भावार्थ:-हे माता! सुनो, वानरों में बहुत बल-बुद्धि नहीं होती, परंतु प्रभु के प्रताप से बहुत छोटा सर्प भी गरुड़ को खा सकता है। (अत्यंत निर्बल भी महान् बलवान् को मार सकता है)॥
#RamCharitManas
#SundarKand
॥सुंदर कांड॥
सीता मन भरोस तब भयऊ।
पुनि लघु रूप पवनसुत लयऊ॥
भावार्थ:-तब (उसे देखकर) सीताजी के मन में विश्वास हुआ। हनुमान्जी ने फिर छोटा रूप धारण कर लिया॥
#RamCharitManas#SundarKand
॥सुंदर कांड॥
मोरें हृदय परम संदेहा। सुनि कपि प्रगट कीन्हि निज देहा॥कनक भूधराकार सरीरा। समर भयंकर अतिबल बीरा॥
भावार्थ:-अतः मेरे हृदय में बड़ा भारी संदेह होता है (कि तुम जैसे बंदर राक्षसों को कैसे जीतेंगे!)। यह सुनकर हनुमान्जी ने अपना शरीर प्रकट किया। सोने के पर्वत (सुमेरु) के आकार का (अत्यंत विशाल) शरीर था, जो युद्ध में शत्रुओं के हृदय में भय उत्पन्न करने वाला, अत्यंत बलवान् और वीर था॥
#RamCharitManas
#SundarKand
॥सुंदर कांड॥
निसिचर मारि तोहि लै जैहहिं। तिहुँ पुर नारदादि जसु गैहहिं॥हैं सुत कपि सब तुम्हहि समाना। जातुधान अति भट बलवाना॥
भावार्थ:-और राक्षसों को मारकर आपको ले जाएँगे। नारद आदि (ऋषि-मुनि) तीनों लोकों में उनका यश गाएँगे। (सीताजी ने कहा-) हे पुत्र! सब वानर तुम्हारे ही समान (नन्हें-नन्हें से) होंगे, राक्षस तो बड़े बलवान, योद्धा हैं॥
#RamCharitManas
#SundarKand
॥सुंदर कांड॥
अबहिं मातु मैं जाउँ लवाई। प्रभु आयुस नहिं राम दोहाई॥
कछुक दिवस जननी धरु धीरा। कपिन्ह सहित अइहहिं रघुबीरा॥
भावार्थ:-हे माता! मैं आपको अभी यहाँ से लिवा जाऊँ, पर श्री रामचंद्रजी की शपथ है, मुझे प्रभु (उन) की आज्ञा नहीं है। (अतः) हे माता! कुछ दिन और धीरज धरो। श्री रामचंद्रजी वानरों सहित यहाँ आएँगे॥
#RamCharitManas
#SundarKand
सर्गस्थितिविनाशानां जगतो यो जगन्मयः।
मूलभूतो नमस्तस्मै विष्णवे परमात्मने॥
भगवान श्री हरि के 'योगनिद्रा' में गमन की पावन तिथि देवशयनी एकादशी पर त्रिलोक स्वामी से प्रार्थना है कि उनकी कृपा सम्पूर्ण सृष्टि पर सर्वदा बनी रहे।
सभी श्रद्धालुओं के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार हो।
॥सुंदर कांड॥
जौं रघुबीर होति सुधि पाई। करते नहिं बिलंबु रघुराई॥
राम बान रबि उएँ जानकी। तम बरुथ कहँ जातुधान की॥
भावार्थ:-श्री रामचंद्रजी ने यदि खबर पाई होती तो वे बिलंब न करते। हे जानकीजी! रामबाण रूपी सूर्य के उदय होने पर राक्षसों की सेना रूपी अंधकार कहाँ रह सकता है?
#RamCharitManas
#SundarKand