पिछले ढाई हजार सालों में ईरान पर 5 बड़ी ताकतों ने चढ़ाई की है..
सबसे पहले सिकंदर ने ईरान को जीत लिया लेकिन मात्र 32 साल की उम्र में उसकी मौत के बाद अगले कुछ समय के बाद ही उसकी पूरी सल्तनत तबाह हो गई..
ईरान वहीँ पर बाकी रहा..
फिर लगभग 7 सौ सालों के बाद ईरान-रोम की 300 साला जंग का आगाज हुआ और उस समय की वो बड़ी सल्तनत रोम भी खत्म हो गई..
उसके बाद इस्लामी खिलाफत ए राशिदा ने ईरान पर चढ़ाई की जिसके बाद लगभग पूरा ईरान ही मुस्लमान हो गया.. ईरान और इस्लाम आज तक बाकी हैं उस जमीन पर.. 900 सालों तक सुन्नी इस्लाम के हाथ में ईरान रहा और पिछले 500 सालों से शिआ मुस्लिमों के पास है..
मुसलमान होने के बाद ईरान पर मंगोल ने हमला किया और मंगोल साम्राज्य खत्म हो गया और मंगोल मुसलामान हो गए... ईरान वहीँ पर बाकी रहा..
पिछली सदी में USSR ने ईरान को कुछ समय के लिए जीता लेकिन फिर USSR भी टुकड़े टुकड़े हो गया... ईरान वहीँ पर है.
पिछले 46 सालों से अमेरिका ने ईरान से जंग छेड़ रखी है.......
लगता है हिस्ट्री रिपीट होगी अगर अमेरिका भी ईरान को जीतने के लिए मैदान मे अपने सैनिकों को उतारता है.......
अमेरिका को भी किस्मत आज़मा कर देख लेना चाहिए...
ईरान की ढाई हजार साल की हिस्ट्री में सिर्फ इस्लाम ने ही ईरान को मुकम्मल जीता है... बाकी न तो उससे पहले और न ही उसके बाद कोई ताकत ज्यादा दिनों तक ईरान को काबू कर पायी है और न ही अपना कल्चर थोप पायी है..सत्य तो यही है बाकी आगे देखते फिलम में क्या होता है 🥸
अमेरिकियों की हलक सूखने लगी है, अमेरिकी सरकार में डर का माहौल।
अमेरिका को डर है कि ईरान परमाणु संपन्न राष्ट्र बन चुका है।
आए दिन ईरान अपने नए-नए मिसाइलों से अमेरिका व उनके सहयोगों को घातक हमले कर अपनी योग्यता सिद्ध कर रहा है
पिछले हफ्ते ईरान ने 4000km दूर मार करने वाली मिसाइल से अमेरिका को बड़ा सरप्राइज दिया था।
ऐसे में अमेरिकी सरकार व उनके रक्षा सहयोगियों को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं ईरान के पास परमाणु हथियार तो नहीं है।
जिसका उपयोग वह अंत में अमेरिका के ऊपर कर सकता है।
ये हिंद महासागर है,
यहां 12 साल पहले तक हिन्दोस्तान के नाम का सिक्का चलता था,
बड़े से बड़े तुर्रम खान मुल्क की हिम्मत ना हुई हिन्दोस्तान की इजाजत के बिना कोई गुस्ताखी करने की,
लेकिन आज अमेरिका ने हिंद महासागर में ईरान के उस नौसैनिक जहाज को पनडुब्बी से नष्ट कर दिया
जो हमारा मेहमान था,
भारत के बुलावे पर ही अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने आया था,
और आज वापस ईरान जा रहा था,
अमेरिका आज भारत से नहीं डरता है,
पहले डरता भी था, और इज्जत भी करता था,