🌱 एक बीज, लाखों उम्मीदें...!
18 जून 2026 को जशपुर रचेगा हरियाली का नया इतिहास।
"बीज गोला बनाबो – जशपुर के जंगल ला बढ़ाबो" अभियान के माध्यम से लगभग 2 लाख सीड बॉल तैयार कर पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाया जाएगा। 🌿✨
📍 भैरव पहाड़, सोगड़ा (जशपुर)
📍 हनुमान टेकरी, कुनकुरी
📍ग्राम कुनकुरी, पत्थलगांव
आइए, इस जनभागीदारी अभियान का हिस्सा बनें और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरा-भरा जशपुर बनाने में अपना योगदान दें। 🌳💚
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As the rainy season approaches, it's time to strengthen your natural defence. Packed with the goodness of traditional Ayurvedic ingredients, Chhattisgarh Herbals Chyawanprash helps support your immunity and overall well-being, making it the perfect companion for the monsoon season. Stay protected, stay healthy—with nature's daily shield.
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महुआ केवल एक वन उपज नहीं, बल्कि जंगलों से जुड़ी आजीविकाओं, परंपराओं और आत्मनिर्भरता की एक जीवंत कहानी है। आदिवासी एवं ग्रामीण समुदायों द्वारा संजोए गए महुआ को छत्तीसगढ़ हर्बल्स द्वारा आधुनिक तकनीकों और प्रसंस्करण के माध्यम से महुआ जूस, जैम, कुकीज़ और एनर्जी बार जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों में परिवर्तित किया जाता है। यह यात्रा प्रकृति की शुद्धता को आपके घर तक पहुंचाने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों, विशेषकर महिलाओं, को सशक्त बनाने और उनकी आजीविका को सुदृढ़ करने का माध्यम भी है।
जंगलों की सौगात, परिश्रम का सम्मान और स्वास्थ्य का विश्वास।
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जड़ो से यथार्थ तक का सफ़र.....
छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ की पारम्परिक उपचार पद्धति को सहेजने तथा भविष्य की पीढ़ी को स्थानांतरित करने हेतु 11 वैद्य सम्मेलनों का आयोजन किया गया.
छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ की पारम्परिक उपचार पद्धति को सहेजने तथा भविष्य की पीढ़ी को स्थानांतरित करने हेतु 11 वैद्य सम्मेलनों का आयोजन किया गया.....
बोर्ड द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ की पारम्परिक उपचार पद्धति को सहेजने तथा भविष्य की पीढ़ी को स्थानांतरित करने हेतु 11 वैद्य सम्मेलनों का आयोजन किया गया.....
🔆 छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड (छत्तीसगढ़ शासन, वन विभाग) द्वारा आदिवासी तथा स्थानीय स्वास्थ्य परंपराओं/उपचार पद्धति सरंक्षण, संवर्धन, वैद्यों के उत्थान तथा क्षमता विकास के लिए लगातार कार्य कर रहा है ।
🔆 बोर्ड द्वारा वैद्यों के पारंपरिक उपचार पद्धति के ज्ञान को सहेजने तथा भविष्य की पीढ़ी को स्थानांतरित करने हेतु वैद्य सम्मेलन का आयोजन कराया जाता है । बोर्ड द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 वर्ष 11 में वैद्य सम्मेलनों का आयोजन कराया गया, जिसमे 01 राज्य स्तरीय, 06 संभाग स्तरीय, 04 जिला स्तरीय वैद्य सम्मेलन शामिल हैं ।
🔆 08 अक्टूबर 2025 को आयोजित राज्य स्तरीय वैद्य सम्मेलन में पूरे राज्य से लगभग 1100 वैद्य सहित संभागीय एवं जिला स्तरीय वैद्य सम्मेलनों में 1600 वैद्यों द्वारा भागीदारी की गई । वैद्य सम्मेलनों में वैद्यों को विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण भी दिये जाते है, जिसमें औषधि पौधों के वैज्ञानिक/ वानस्पतिक नाम जानकारी दी जाती हैं जिसके जरिये वैद्यों के औषधि पौधों के ज्ञान को आधूनिक विज्ञान का परिचय कराया जाता हैं । वैद्यों को प्रशिक्षण में विनाश विहीन विदोहन तकनीक भी सिखाई जाती है, जिससे वैद्य आने वाले वर्ष में दोबारा उन्ही औषधि पौधों से संग्रहण कर सके और औषधि पौधों भविष्य के लिए बचाया जा सके । प्रशिक्षण में वैद्यों को जड़ी बूटियों को आधुनिक तकनीक तैयार करना सिखाया जाता है, साथ ही वैद्य आपस में अपने पारंपरिक जड़ी बूटियों से उपचार का ज्ञान को साझा भी करते हैं ।
🔆 बोर्ड द्वारा गत 02 वर्षों से नवाचार योजनांतर्गत वैद्यों हेतु विशेष रूप से हीलर हर्बल गार्डन योजना भी चलाई जा रही है, जिसके माध्यम से वैद्यों को उनकी ही बाड़ी में आम तौर पर उपयोग होने वाली वनौषधियों का छोटा सा उद्यान बनाने में बोर्ड द्वारा आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग प्रदान किया जाता है ।
🔆 बोर्ड द्वारा वैद्यों के निवास ग्राम में संचालित स्कूल में स्कूल हर्बल गार्डन बनाकर देखरेख करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा हैं, जिसके अंतर्गत बोर्ड स्कूल हर्बल गार्डन तैयार करने तथा उसकी देखरेख करने के लिए तकनीकी एवं आर्थिक मदद हेतु योजना का संचालन कर रहा हैं ।
🔆 बोर्ड ने विगत दो वर्षो में वैद्यों के समूहों को जड़ी-बूटी पिसने हेतु निःशुल्क पलवालाईजर मशीन छत्तीसगढ़ के 28 जिलों में कुल 40 मशीन को उपलब्ध कराई गई है ।
5 जून विश्व पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बोर्ड द्वारा स्टॉल लगाकर भागीदारी की गई.....
🌳 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ऊर्जा पार्क, राजीव स्मृति वन, व्ही.आई.पी. रोड रायपुर में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से आयोजन किया गया।
🌳 कार्यक्रम में बोर्ड की ओर से स्टॉल के माध्यम से औषधि पौधों का सजीव प्रदर्शन एवं वैद्यों द्वारा आम जनों को जड़ी बूटी से उपचार की सलाह दी गई ।
🌳 कार्यक्रम में मुख्य अतिथि माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप, विशिष्ट अतिथि श्री अंजय शुक्ला उपाध्यक्ष छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के साथ जी, विशिष्ट अतिथि श्री रामसेवक पैकरा जी ,अध्यक्ष वन विकास निगम ,श्री नवीन अग्रवाल जी अध्यक्ष जिला पंचायत रायपुर, श्री प्रेम कुमार जी वन प्रबंधक ,श्री मनोज कुमार पिगुआ जी अपर मुख्य सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग,श्री अरुण कुमार पांडेय जी प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल एवं वन विभाग कर्मचारीयों के साथ आमजन उपस्थित रहे ।
छत्तीसगढ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड (छत्तीसगढ़ शासन, वन विभाग)
द्वारा सजीव वच विदोहन प्रशिक्षण धमतरी ग्राम राउतमुड़ा में आयोजित किया गया.....*
🌾 सजीव वच विदोहन प्रशिक्षण में धमतरी और आदिवासी अंचल नारायणपुर (अबूझमाड़) के ग्रामीण क्षेत्रों से किसानो आमत्रित किया गया ।
🌾 कार्यक्रम में बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने किसानो से चर्चा करते हुए किसान से कहा कि वे औषधि पौधों की खेती कर बोर्ड के माध्यम से शासन की योजनाओ का लाभ लेकर समृधि की राह चुने ।
🌾 इस मौके पर बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला ने किसानो से कहा की बोर्ड औषधि पौधों की खेती के लिए किसानो की हर संभव मदद करेगा ।
🌾 बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जे.ए.सी.एस.राव ने बताया की बोर्ड पैडी डायवर्सन मॉडल अंतर्गत किसानों को धान की पारंपरिक खेती में हो रहे नुकसान को लाभ में बदलने के लिए ‘वच’ की खेती एक उत्तम विकल्प है जिसमे कुल लागत मात्र 20,000 रुपये तक आती है, और 1 साल में किसानों को एक एकड़ से लगभग एक लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो सकती है ।
🌾 वच के खेत में सजीव वच विदोहन प्रशिक्षण मे वच की जड़ को खेतों से हार्वेस्ट करने के लिए ट्रेक्टर के माध्यम से आडी-तिरछी जुताई की गई, जिससे समस्त वच की जडे मिटटी से बाहर आ गई, बाहर निकली हुई जड़ो से मिटटी को अच्छी तरह झाड़कर छायादार स्थान पर एकत्र किया गया, तत्पश्चात तेज धार वाले गड़ासे से मुख्य जड़ से लगी हुई अतिरिक्त जड़ो को अलग कर दिया गया, और इसके पश्चात् मुख्य जड़ को 2 से 3 इंच के छोटे छोटे टुकडो में काटकर एकत्रित कर दिया गया इन जड़ो को तेज धूप में अच्छी तरह सुखाने के पश्चात् बिक्री हेतु बोरो भरकर भेजा जाएगा ।
🌾 कार्यक्रम में बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम, उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला, मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जे.ए.सी.एस.राव, श्री डी.के. एस.चौहान (सलाहकार- औषधि पौधों की खेती), श्री फकीरराम कोसरिया (सलाहकार – धमतरी) उपस्थित रहे । 🌾 कार्यक्रम में धमतरी के ग्राम राउतमुड़ा और आस पास के ग्रामो तथा नारायणपुर (अबूझमाड़) के ग्राम कोहाकमेटा, किल्काड से लगभग 50 किसानो द्वारा भागीदारी की गई ।
🌾 कार्यक्रम के उपरांत बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम, उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला ने धमतरी के ग्राम पोतियाडीह में माँ गायत्री स्व सहायता समूह द्वारा 2 एकड़ की जा रही खस की खेती का भी निरीक्षण किया । चर्चा के दौरान समूह की महिलाओ ने बताया की आने वाले सप्ताह में खस की जड़ो का हार्वेस्टिंग किया जाएगा जिससे उन्हें लगभग एक लाख रुपये की आमदनी होगी ।
World Environment Day 2026 | Kursail Valley, Narayanpur
Under the guidance of the Divisional Forest Officer, Narayanpur Forest Division, a biodiversity exploration and environmental awareness programme was successfully organized at Kursail Valley on 5 June 2026.
The programme engaged approximately 60 students and forest personnel in floral surveys, herbarium preparation, species identification, and biodiversity documentation. Over 100 plant species, including several rare and ecologically significant species, were recorded during the field exercise.
The initiative strengthened environmental awareness, scientific learning, and community participation in biodiversity conservation, reflecting our collective commitment towards a greener and more sustainable future.
#WorldEnvironmentDay #NarayanpurForestDivision #BiodiversityConservation #EnvironmentalAwareness #Chhattisgarh #ForestDepartment #SustainableDevelopment
🌱 विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी ने रायपुर के राजीव स्मृति वन में "एक पेड़ माँ के नाम 2026" महाअभियान का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर माननीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप जी ने बताया कि छत्तीसगढ़ ने लगातार दो वर्षों तक वृक्षारोपण के निर्धारित लक्ष्य से अधिक पौधे लगाकर देश में मिसाल कायम की है। मुख्यमंत्री जी ने प्रदेशवासियों से अपनी माँ के नाम एक पौधा लगाने एवं उसकी देखभाल का संकल्प लेने का आह्वान किया।
आइए, प्रकृति से प्रेरित होकर जलवायु संरक्षण और हरित भविष्य के निर्माण हेतु इस जन-अभियान का हिस्सा बनें।
#WorldEnvironmentDay2026 #EkPedMaaKeNaam #HaritChhattisgarh #InspiredByNature #ClimateAction #ForestDepartmentCG
केशकाल, 05 जून 2026।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वन मंडल केशकाल द्वारा ईको पर्यटन केंद्र टाटामारी में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय विधायक केशकाल श्री नीलकंठ टेकाम उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री राजकिशोर राठी (जिला संयोजक, भाजपा व्यापारी प्रकोष्ठ, जिला कोंडागांव), श्री लम्बोदर सलाम मण्डल अध्यक्ष केशकाल श्री भूपेश चंद्राकर, श्रीमती नम्रता भारद्वाज तथा श्री महेश कुमार तारम (पार्षद, नगर पंचायत केशकाल) उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वनमण्डलाधिकारी केशकाल श्रीमती दिव्या गौतम द्वारा की गई। इस अवसर पर उप वनमंडलाधिकारी श्रीमती सुषमा जे. नेताम, एस.डी.एम. केशकाल सुश्री आकांक्षा नायक, एचडीएफसी बैंक के अधिकारी एवं कर्मचारी, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, छात्र-छात्राएं, जनप्रतिनिधिगण तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ पर्यावरण संरक्षण एवं प्रकृति संवर्धन के संदेश के साथ किया गया। इस अवसर पर ईको पर्यटन केंद्र टाटामारी में नवनिर्मित बाल उद्यान का लोकार्पण माननीय विधायक श्री नीलकंठ टीकम के करकमलों द्वारा किया गया। बाल उद्यान के उद्घाटन से क्षेत्र के बच्चों एवं पर्यटकों को मनोरंजन एवं प्रकृति से जुड़ने का एक नया केंद्र प्राप्त हुआ है।
कार्यक्रम के अंतर्गत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर संचालित “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत अतिथियों, अधिकारियों एवं उपस्थित नागरिकों द्वारा पौधरोपण किया गया। पौधरोपण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, हरित आवरण वृद्धि एवं भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ वातावरण निर्माण का संदेश दिया गया।
स्वच्छ भारत मिशन की भावना को सशक्त बनाने हेतु कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा श्रमदान करते हुए झाड़ू लगाकर परिसर की साफ-सफाई की गई जिसमें कुल कचरा कूड़ा संग्रहण 150किलो रहा। उपस्थित जनसमुदाय को स्वच्छता के महत्व एवं पर्यावरण संरक्षण में जनसहभागिता की आवश्यकता के संबंध में जागरूक किया गया।
अपने उद्बोधन में माननीय विधायक श्री नीलकंठ टेकाम ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल शासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने प्लास्टिक प्रदूषण को पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बताते हुए इसके उपयोग को कम करने तथा पर्यावरण को प्लास्टिक मुक्त बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण, स्वच्छता एवं प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण ही आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है।
कार्यक्रम के दौरान माननीय विधायक द्वारा उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, एवं ग्रामीणजनों को ईको पर्यटन केंद्र टाटामारी को प्लास्टिक मुक्त अगले 15/08/2026 (स्वतंत्रता दिवस)तक मुक्त रखने तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय योगदान देने की शपथ दिलाई गई। सभी उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता एवं हरित विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता एवं जनभागीदारी के संकल्प के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कोबिया में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत हुआ वृहद पौधरोपण
बेमेतरा, 05 जून 2026
विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर आज जिला-बेमेतरा के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कोबिया में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत भव्य एवं गरिमामय पौधरोपण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह विशेष आयोजन छत्तीसगढ़ के यशस्वी वन मंत्री श्री केदार कश्यप एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक तथा वन बल प्रमुख श्री अरुण कुमार पाण्डेय के कुशल मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्रीय विधायक श्री दिपेश साहू उपस्थित रहे। उनके साथ जिला पुलिस अधीक्षक श्री रामकृष्ण साहू, दुर्ग वनमण्डलाधिकारी श्री दीपेश कपिल, संयुक्त वनमण्डलाधिकारी श्री जितेन्दर कुमार (उपवनमण्डलाधिकारी, उपवनमण्डल बेमेतरा), जिला पंचायत सी.ई.ओ. श्रीमति प्रेमलता, नगर पालिका अध्यक्ष श्री विजय सिन्हा और भाजपा जिलाध्यक्ष श्री अजय साहू विशेष रूप से शामिल हुए।
धरती को हरा-भरा बनाने का संकल्प:
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों, जनप्रतिनिधियों, वन विभाग के अधिकारियों और स्कूली बच्चों ने मिलकर अपनी माता जी के नाम पर पौधों का रोपण किया और उनकी सुरक्षा का संकल्प लिया। क्षेत्रीय विधायक श्री दिपेश साहू ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए वृक्षारोपण आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान न सिर्फ प्रकृति को समृद्ध करेगा, बल्कि यह हमारी माताओं के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक अनूठा जरिया भी है।
सामूहिक सहभागिता से सफल हुआ आयोजन:
इस महाअभियान में वन परिक्षेत्र अधिकारी बेमेतरा/साजा, स्कूल के शिक्षकगण, प्यारे बच्चे, स्थानीय ग्रामवासी तथा उपवनमण्डल बेमेतरा के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारीगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर इस पर्यावरण उत्सव को सफल बनाया और समाज को अधिक से अधिक पौधे लगाने का संदेश दिया।
आज दिनांक 01.06.2026 को सुशासन तिहार के तहत कोण्डागावं जिला अंतर्गत ग्राम बड़ेकनेरा में माननीय मुख्यमंत्री जी छ.ग. शासन के द्वारा तेंदुपत्ता संग्रहक परिवार के घर भ्रमण किया गया संग्राहक परिवार के सदस्य श्री गौतम यादव एवं उनकी पत्नी वेदमाती माता सतो यादव और बच्चों के द्वारा आत्मीय स्वागत साल बीज का माला पहनाकर एवं छिंद से निर्मित गुलदस्ता भेंटकर पारंपरिक तरीके से किया गया तत्पश्चात् एक पेड़ मॉं के नाम जामून का पौधा रोपण किया गया। माननीय मुख्यमंत्री जी को किसान वृक्ष मित्र योजना एवं लघु वनोपज संघ की विभिन्न योजनाओं से अवगत कराते हुए लाभांन्वित हितग्राहियों से भेंट कराया गया। उसके पश्चात तेन्दूपत्ता हितग्राही के बाड़ी का भ्रमण किया गया जिसमें लगे सब्जी, मक्का एवं तालाब में मछली पालन का अवलोकन किया गया जिसकी माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा प्रशंसा भी की गयी। माननीय मुख्यमंत्री जी को तिखूर प्रसंस्करण केन्द्र मर्दापाल में निर्मित तिखूर का जूस पिलाया गया तथा मर्दापाल के स्व सहायता समूह द्वारा बनाये गये तिखूर उत्पाद भेंट किया गया।
वनमण्डल कोंडागांव
दिनांक 31.05.2026 को ग्राम इरकभट्टी (अबूझमाड़), तहसील कोहकामेटा, जिला नारायणपुर में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, भारत सरकार के ‘‘मन की बात’’ के 134वें संस्करण पश्चात् माननीय श्री केदार कश्यप जी, मंत्री, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, परिवहन, सहकारिता एवं संदीय कार्य विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के हस्ते वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, वनमण्डल नारायणपुर की महिला स्व सहायता समूहों को चक्रिय निधि अंतर्गत राशि एवं संग्राहकों को शहद कीट प्रदान किया गया। चक्रिय निधि की राशि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही नक्सल मूक्त होने के पश्चात् अबूझमाड़ में महिलाआंे को सशक्त करने के उद्देश्य से यह राशि प्रदाय की गई है। महिला स्व सहायता समूह, संयुक्त वन प्रबंधन समूह से सम्बद्ध होकर कार्य करेगी। इसमें छोटेडोंगर की एक महिला स्व सहायता समूह को दोना पत्तल निर्माण के लिए माहुल पत्ता क्रय एवं ओरछा की महिला स्व सहायता समूह को कच्चा फूलझाडू क्रय कर प्रसंस्करण कार्य, किराना स्टोर्स एवं केन्टीन, गृह उद्योग स्थापित कर मसालों का निर्माण एवं लघु वनोपज संग्रहण कर प्रसंस्करण, बेकरी सह किराना एवं केन्टीन संचालन, नारायणपुर की महिला स्व सहायता समूह को केन्टीन संचालन, दोना पत्तल सिलाई कार्य, धौड़ाई की स्व सहायता समूह को फूलझाडू निर्माण कार्य एवं सोनपुर की समूह को दोना पत्तल निर्माण, कुन्दला की स्व सहायता समूह को हॉटल एवं केन्टीन संचालन हेतु कुल 13 महिला स्व सहायता समूह को राशि रूपये 27.00 लाख का ऋण प्रदाय किया गया है। इसके अतिरिक्त ग्राम तेरदूल, बोगान, कोलियारी, पानीगांव, चियानार, रेंगाबेड़ा, केरलापाल, टेमरूगांव के कुल 12 हितग्राहियों को शहद संग्रहण कीट वितरित किया गया है। इस मौके पर माननीय श्री रूपसाय सलाम, प्रदेश अध्यक्ष, राज्य लघु वनोपज संघ, छत्तीसगढ़, श्री नारायण मरकाम, जिला पंचायत अध्यक्ष, जिला पंचायत नारायणपुर, श्रीमती संध्या पवार, जिलाध्यक्ष, भारतीय जनता पाटी, जिला नारायणपुर एवं भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। इसके साथ ही आस-पास के लगभग 700 ग्रामीण, पत्रकार, वनमण्डल नारायणपुर के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
🌿💧 प्यास भी बुझे, जंगल भी बचे! 🔥🌳
वन विकास निगम, जगदलपुर द्वारा भीषण गर्मी में आमजन एवं राहगीरों के लिए सार्वजनिक प्याऊ की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही ग्रामीणों एवं नागरिकों को वनाग्नि (Forest Fire) से जंगलों की सुरक्षा के लिए जागरूक किया जा रहा है।
आइए, ठंडा पानी पीने के साथ यह संकल्प भी लें—
✅ जलती बीड़ी-सिगरेट या माचिस की तीली जंगल में न फेंकें।
✅ महुआ एवं अन्य लघु वनोपज संग्रहण के दौरान आग का उपयोग न करें।
✅ कहीं भी जंगल में आग दिखाई दे तो तत्काल वन विभाग को सूचना दें।
आपकी छोटी सी सावधानी, हमारे अमूल्य वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा का आधार है।
#ForestFire #SaveForest #VanVikasNigam #Jagdalpur #ForestProtection #Bastar
सफलता की कहानी - छत्तीसगढ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड (छत्तीसगढ़ शासन, वन विभाग) के 'पैडी डायवर्सन मॉडल' ने खोला आर्थिक समृद्धि का नया रास्ता धान की जगह औषधीय खेती ने बदली छत्तीसगढ के 147 किसानों की तकदीर.....
⛳ परंपरागत खेती में बढ़ते खर्च और अनिश्चित मुनाफे से जूझ रहे छत्तीसगढ के किसानों के लिए छत्तीसगढ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड का 'पैडी डायवर्सन मॉडल' (Paddy Diversion Model) एक वरदान साबित हो रहा है। धान की पारंपरिक खेती के चक्र से हटकर औषधीय पौधों की खेती करने से छत्तीसगढ़ के किसानों की आर्थिक स्थिति में अभूतपूर्व सुधार हो रहा है ।
⛳ इस अनूठी पहल के तहत बोर्ड ने 'लो लैंड' (निचली भूमि) क्षेत्रों अर्थात धान के खेतों में किसानों को बच और ब्राह्मी जैसे औषधीय पौधों की खेती के लिए प्रेरित किया गया, जिसके परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे हैं ।
⛳ बोर्ड की इस पहल से निचली भूमि (Low Lands) में बड़ा बदलाव आया हैं, निचली भूमि वाले क्षेत्रों में जहां पहले सिर्फ धान की खेती होती थी, वहां अब औषधीय सुगंध बिखर रही है। ⛳ इस मॉडल के तहत 5 जिलों (धमतरी, नारायणपुर, कोण्डागांव, बस्तर एवं रायपुर) के 23 गांवों को शामिल किया गया ।
⛳ 147 किसानों ने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए 65 एकड़ धान के खेतों में औषधीय पौधों की फसलों को अपनाया हैं ।
⛳ 'बच' की खेती को 63 किसानों ने 39.00 एकड़ रकबे में 'बच' की फसल लगाई, और इसी प्रकार 'ब्राह्मी' की खेती को अपनाते हुए धमतरी और रायपुर के 84 किसानों ने मिलकर 26.00 एकड़ में 'ब्राह्मी' का उत्पादन किया।
⛳ जिलावार प्रदर्शन की एक बात की जाये तो धमतरी जिला में सबसे बड़ा बदलाव देखा गया, यहाँ 16 गाँवों के 90 किसानों ने मिलकर रिकॉर्ड 27.50 एकड़ भूमि पर बच और ब्राह्मी की सफल खेती की ।
⛳ रायपुर जिले के 2 गाँवों के 35 किसानों ने 11.50 एकड़ में हाथ आजमाया और बेहतरीन मुनाफा कमाया।
⛳ छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल क्षेत्रों नारायणपुर, कोण्डागांव और बस्तर के किसानों ने भी 'बच' की खेती अपनाकर पारंपरिक खेती के मुकाबले कई गुना अधिक लाभ अर्जित किया।
⛳ बोर्ड ने छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए धान की खेती के बदले ‘वच’ और ब्राह्मी की खेती समाधान के तौर चयन किया ।
⛳ पैडी डायवर्सन मॉडल ने न केवल किसानों की लागत को कम किया है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और बड़ा बाजार देकर उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाया है।"
⛳ किसानों को एक एकड़ में ‘वच’ और ब्राह्मी की खेती कुल लागत मात्र 20,000 रुपये आई और 1 साल में किसानों को एक एकड़ से लगभग 10,0000 रुपये (एक लाख रुपये) की शुद्ध आय प्राप्त हुई ।
⛳ बोर्ड किसानों को निशुल्क औषधि पौधे उपलब्ध कराता है, औषधि पौधों की खेती के लिए तकनिकी प्रशिक्षण भी देता है साथ में सफलता पूर्वक औषधि पौधों की खेती कर रहे किसानो के खेतों का सजीव अध्ययन भ्रमण भी करवाता हैं । बोर्ड किसानो की औषधि पौधों की उपज को अनुबंधित संस्थाओ से खरीदी का इंतजाम कर देता हैं ।
⛳ इस मॉडल की सफलता यह साबित करती है कि यदि सही मार्गदर्शन और सही फसल का चुनाव किया जाए, तो खेती को बेहद मुनाफे का सौदा बनाया जा सकता है। आज इस योजना से जुड़े सैकड़ों किसान आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहे हैं ।