दिल्ली आया तो पता चला कि प्रदर्शन से पूर्व फिल्मों को सेंसर करने वाले केंद्रीय फ़िल्म प्रमाणन बोर्ड -फ़िल्म सेंसर बोर्ड (CBFC) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ( CEO) की पोस्ट पर कस्टम्स के एक अधिकारी -श्री कुंदन यादव को सूचना प्रसारण मंत्रालय द्वारा नियुक्त किए जाने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और नियुक्ति की फाइल अभी चुनाव आयोग के पास स्वीकृति हेतु पेंडिंग है ।
मजेदार बात यह कि JNU से पास आउट यह अधिकारी न सिर्फ सुंदर कांड और महा मृतुंजय मंत्र का सार्वजनिक मंच पर मजाक उड़ा रहा है बल्कि स्वरचित कविता के माध्यम से ब्राह्मणवाद और मनु स्मृति पर भी सवाल खड़े करता है ।
चुनाव ड्यूटी के दौरान खुल कर भाजपा के ख़िलाफ़ काम करने का अपने भाषण में दावा भी करता है ।
क्या केंद्र सरकार के पास और कोई विकल्प नहीं है जो वो सनातन और भाजपा की ख़िलाफ़त करने वालों को महत्वपूर्ण पदों के लिए नियुक्त करने के बारे में सोच रही है ।
क्या सिर्फ़ पीएचडी वाला डॉ होना ही CBFC, CEO के लिए पर्याप्त है ? उसे फिल्मों के structure से संबंधित ज्ञान होना ज़रूरी नहीं है ?
खुद बन्दे में कोई कमी नहीं क्योंकि पढ़ाई ही वामपंथी विचारधारा को पोषित करने वाले JNU में हुई है ।
लेकिन अपनी मोदी सरकार तो किसी भी अधिकारी की नियुक्ति से पहले 360 डिग्री मेथड से विचारधारा मालूम करती है । वह उसमें चूक गयी कि संघ /हिंदुत्व की विचारधारा से अलग फैसले होने लगे हैं ? सम्भव है चुनाव के बीच कोई जांच परख में चूक हो गयी ।
यादव साहब के इस भाषण को सुनकर आप देखें किस तरह के निर्णय हमारी सरकार लेने जा रही है ।
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