माननीय झारखंड उच्च न्यायालय ने 29 जुलाई 2024 को झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 को अनुसूचित क्षेत्रों में संसदीय अधिनियम PPESA_1996के असंगत और असंवैधानिक कहा।
और साथ झारखंड सरकार को परमादेश दिया कि संसदीय अधिनियम PPESA _1996 का नियमावली बना कर दो माह के अंदर लागू करें।
अब झारखंड सरकार 02/01/2026 को झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2021 की धारा 3 के तहत फिर से सामान्य पंचायत राज व्यवस्था (PESA) का अ��िसूचना जारी कर जबरदस्ती थोपने का कार्य रही है।
झारखंड सरकार और इनके नौकरशाह संविधान ,कानून और न्यायालय के परमादेश को नहीं मानते।
इस प्रकार झारखंड सरकार संविधान के प्रावधानों के विरुद्ध कार्य कर रही है।
#PESA_is_Wrong ,#PPESA_is_Right
@AKurkhar आपने बिल्कुल सही कहा दादा
अब गांवों और जंगलों में जाकर सभी आदिवासियों को जागरूक व सजग करना है
ताकि संगठित होकर विशेषाधिकार लेना है
जय जोहार 🙏
जय आदिवासी🙏
जय संविधान🙏
साथियों हमलोगों ने राज्य के कार्यपालिका को समझाया , विधायिका को समझाया लेकिन नहीं समझा , तब हमलोगों ने न्यायपालिका में न्यायपालिका में गये , न्यायपालिका ने हमारी प्रार्थना और आवेदन को समझा।
अब गांवों और जंगलों में जाकर लोगों को समझाना है।
हमें एक बेहतर देश और राष्ट्र बनाना है।
कलम से नरसंहार।
कैप्शन: 1951 से पहले, जनगणना में "आदिवासी धर्म/एनिमिज़्म" के लिए एक खास कॉलम था। आज़ादी के बाद, सरकार ने चुपचाप इसे हटा दिया ताकि हमें दूसरे धर्मों में धकेला जा सके। वे हम सबको मार नहीं सके, इसलिए उन्होंने कागज़ पर हमारी पहचान खत्म कर दी।
पड़ने लगी है कड़ाके की ठंडी,
कितना सता सकता है मौसम बेदर्दी,
धूप भी अब रूठी-सी लगती है,
और शाम ओढ़े बैठी है खामोशी की चादर सर्दी।
चाय की भाप में घुली सी बातें,
यादों ने फिर दी दिल को दस्तक,
इस ठंडी शाम में बस एक ही दुआ—
अपनों की गर्माहट बनी रहे हर वक्त। ☕
हमारे देश के अनुसूचित राज्यों के लिए 24 दिसंबर 1996 को संसदीय अधिनियम The Provisions of the Panchayats (Extension to the Scheduled Areas) act 1996. बनाया गया है।
वर्���मान में हमारे देश में दस अनुसूचित राज्य और जन जाति राज्य है।
24 अप्रैल 1993 को संविधान का 73वां संस���धन कर देश में सामान्य पंचायत व्यवस्था और 74वां संविधान संसोधन से नगरपालिकाएं व्यवस्था लागू किया गया। जो देश के अनुसूचित क्षेत्रों पर प्रतिबंध किया गया।
लेकिन देश के सभी राज्य सरकारें The Provisions को हटाकर सामान्य पंचायत और नगरपालिकाएं की व्यवस्था को अनुसूचित क्षेत्रों में लागू किये हैं।
अनुसूचित क्षेत्र माननीय संसदीय अधिनियम PPESA 1996 के विशेष आदिवासी ग्राम सभा और स्वायत परिषद से चलेंगे।
लेकिन राज्य सरकार उसे अपने ग्राम सभा से चला रहे हैं। आज इसलिए हमारा देश में गरीबी , बेरोज़गारी , अशिक्षा और पलायन की समस्या है।
#PPESA_1996
झारखंड सचिवालय से मंत्रालय तक मची खलबली!
संसदीय अधिनियम PPESA_1996 मामले में दायर अवमानना याचिका पर झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई।
जिसमें पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव मनोज कुमार सशरीर उपस्थित होकर समय की मांग किया।
जिस पर अदालत ने 13 जनवरी 2026 को अगली सुनवाई के लिए समय निर्धारित किया है।
झारखंड उच्च न्यायालय ने 15 महीने समय दिया था , अब भी दे रहा है।
क्या न्यायालय समय पर समय देता रहेगा?