SC, ST, OBC के संवैधानिक आरक्षण को खत्म करने की मांग करने वालों को भाजपा नेतृत्व का सम्मान और मुलाकात क्यों मिल रही है? क्या भाजपा उनके एजेंडे का समर्थन करती है? एक तरफ भाजपा नेता आरक्षण और संविधान की रक्षा की बातें करते हैं, दूसरी तरफ आरक्षण खत्म करने वालों से बंद कमरे में बातचीत करते हैं। बहुजन समाज इसे दोहरा चरित्र न माने तो क्या माने?
कुछ नहीं होगा। जमानत पर चले जायेंगे। 90% से ज्यादा सबूत बोर्ड ने नष्ट कर दिए थे। अब क्या ही मिलेगा
SOG भी जेब भर लेगी!! Selective कार्यवाही होगी
SI में भी सेलेक्टिव कार्यवाही हुई। विशेष जाति को छोड़ा गया था विशेष को टारगेट किया गया!
ये कौनसा घपला चल रहा है?
-शिक्षित लोग हस्ताक्षर की जगह अनूठा लगा रहें है
-जिस वार्ड 21 में नाम जुड़वाना चाहते है वहां रहते ही नहीं है
- जबकि वो रामगंजमंडी विधानसभा के रंगबाड़ी में रहते है
- SDM को संदेह हुआ तो कमेटी बनाकर जांच करवाई गई
- आस- पास के 5 परिवारों के लोगों के बयान लिए उसमें पाया गया की वो नाम जुड़वाने वाले पत्ते पर कभी नहीं दिखे।
हमारे प्रदेश के शिक्षा मंत्री जी का परिवार अशिक्षित टाइप काम कर रहा है…हम इस खबर की गुरुवार निंदा करते है…कल फिर शुक्रवार की कड़ी निंदा कर देंगे…शनिवार को और ज़्यादा कड़ी निंदा कर देंगे।
क्योंकि हम निंदा के अलावा कुछ कर भी नहीं सकते है!
#Rajasthan
शिक्षा मंत्री व मुख्यमंत्री जी के लिए शिक्षा महत्वपूर्ण नहीं है इनके लिए महत्वपूर्ण हैं RSS क्या चाहता है
RSS चाहता है कि देश का आज और कल का भविष्य तर्कवादी विज्ञान की दृष्टि विकसित नहीं करें तभी तो इंडिया इनकी अंध भक्ति में शामिल होगा !
वही इन नेताओं के बच्चे विदेशों में वो सब पढ़ रहे है जो आने वाले कल में काम आएगा !
कुछ तो शर्म आती होगी मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी कुछ तो जवाबदेही होगी आपकी !
#मदन_दिलावर_इस्तीफा_दो
#जवाबदेही_तय_करनी_होगी
@madanrrathore@madandilawar@INCRajasthan@TikaRamJullyINC@GovindDotasra@ManishYadavIn@VinodJakharIN
मदन दिलावर जी,
आपके बारे में क्या कहें।
2.5 साल सरकार में रहने के बाद भी दिखाने के लिए आपके पास पीएम श्री स्कूल ही है? जिसकी 60% प्रतिशत फंडिंग केंद्र सरकार से आती है!
आपने अपने ढाई साल के कार्यकाल में 10 स्कूल तो शानदार बनाये होंगे ना?
75000 में से 10 स्कूल??
कुंभ के लिए ₹32–34 हजार करोड़। 100–125 मराठी-माध्यम स्कूल बचाने के लिए चाहिए थे सिर्फ़ ₹32 करोड़।
जस्टिस प्रसन्न बी. वराले का सवाल धर्म बनाम शिक्षा नहीं, सत्ता की प्राथमिकताओं का है।
उत्सव के लिए ख़ज़ाना खुलता है, गरीब के बच्चे के स्कूल पर ताला लगता है।
यह 255 अक्षरों में है। आँकड़े और संदर्भ NDTV तथा Indian Express की रिपोर्टिंग से पुष्ट हैं।#Education #SaveGovernmentSchools #GovernmentSchools #RightToEducation #EducationMatters #SchoolEducation #PublicEducation #Kumbh #Justice
अशोक गहलोत जादूगर हैं या धनकुबेरों एवं वर्ग विशेष की कठपुतली??
— इस व्यक्ति को पेपर लीक माफिया एवं RPSC को भ्रष्टाचार का अड्डा बनाने वाले अशोक गहलोत ने चुनाव से ठीक पहले RPSC सदस्य बना कर कांग्रेस को हरवा दिया था और इसके बदले में जालोर सिरोही में राजपूत वोट भी वैभव गहलोत - कांग्रेस को नहीं मिले थे।
अब ये व्यक्ति RPSC में बैठकर इंटरव्यू में गैर राजपूत यानी 35 कौम के बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करता होगा?
बीजेपी ने तो इसको RPSC अध्यक्ष बना दिया है।
शिक्षा मंत्री @madandilawar जी जब लाखो पद खाली है तो स्थाई भर्ती क्यो नहीं निकाल रहे हो खाली पदो का क्या राबड़ी बनायेंगे ।
@TikaRamJullyINC जी वैसे विधा संबल योजना का बीज आपकी सरकार ने बोया है आपकी सरकार ने जो गलती की है उसका ही नतीजा है यह सब ।
मुद्दा यही मुख्य है कि केसरी सिंह जैसे जातिवादी व्यक्ति को अशोक गहलोत ने आचार संहिता लगने के ठीक पहले किस साजिश या भारी सूटकेश के तहत RPSC सदस्य बनाया था जो व्यक्ति स्वयं के समाज के बच्चों को चील का बच्चा और अन्य 35 कौम के बच्चों को बीमार मुर्गी, भेड़ के बच्चे मानता हो।
इस मुद्दे के बाहर जो भी राजनीतिक लोग जाएं, उनका इरादा और काम ही हमेशा अपने ही समाज के कांग्रेसी नेताओं को गिराने के लिए अशोक गहलोत जी के भ्रष्टाचार, जातिवादी सोच पर पर्दा डाल कर भटकाने का रहा है, ऐसे लोगों पर कांग्रेसी लोग अपनी ऊर्जा और समय खर्च न करें— समय, समाज और कर्मफल ऐसी राजनीति का हिसाब करते जा रहे हैं, ऐसी भटकाऊ राजनीति से बूथ पर ही लड़ा जाता है, रोजाना की सोशल मीडिया बहस बाजी में नहीं!
बाकी समझदार और गैर राजनीतिक लोग समझते हैं कि समाज के मंच पर युवाओं के साथ सिस्टम में हो रहे भेदभाव पर उनके लिए बोलते हुए किसी नेता से बोलने में चूक हुई है तो वो सुधार भी समाज और उन लोगों के बीच ही होती है। मेरे जैसे सिस्टम से अनजान लोग जिन्हें सिस्टम की बेसिक समझ नहीं है वो समाज के सिस्टम में बैठे/रहे समझदार लोगों का अनुसरण करें, न कि उन नेता या सोशल मीडिया के टपोरी लोगों का जिनका काम ही समाज को फालतू से फालतू चीज पर भटका कर हर मुद्दे पर नेगेटिव राजनीति करने का मौका देखते हों।
मुद्दा: केसरी सिंह जैसे जातिवादी सोच के व्यक्ति को अशोक गहलोत ने ब्रोकरों के कहने पर अकेले निर्णय लेते हुए कांग्रेस पार्टी और 35 कौम के खिलाफ जाकर पहले से भ्रष्ट RPSC सदस्य क्यों बनाया, कांग्रेस के जीते हुए चुनाव को क्यों हरवाया और उसके बाद RPSC में हो रही गड़बड़ी पर चुप्पी साधे क्यों बैठे हैं।।
अब भी अपने कुकर्मों पर शर्म कर लो गहलोत जी! पेपर लीक और RPSC भ्रष्टाचार पर माफी मांग लो, जनता माफ भी कर देगी!
पिछले 30 सालों में राजस्थान शिक्षा विभाग को बर्बाद करने के बाद इतनी बद्दुआ लेकर कहां जाओगे?
विद्या संबल योजना पर आपकी चिंता जायज, लेकिन इतने चिंतित ना होइए अभी हम आपके साथ है
Plan कर रहे हैं, सब पर नजर है प्रधान जी की
सरकार की नाक से पानी नहीं निकाल दिया तो कहना
हमारा साथ दो हम आपको विद्या संबल से आजादी दिला सकते हैं
#नहीं_चाहिए_विद्या_संबल#अस्थाई_नहीं_स्थाई_चाहिए
एक आंदोलन है, जो चाहता है कि देश के सभी स्कूल ठीक हो। वो चाहता है कि देश के गरीब, पिछड़े तबके से आने वाले बच्चों को भी अच्छी शिक्षा मिले। ज़मीनी स्तर पर वो सरकार और प्रशासन को स्कूलों के लिए जवाबदेह बनाना चाहता है।
एक राजनैतिक दल है, जिसकी देश के 60% राज्यों में सरकार है। वो स्कूल ठीक करने की बजाय आंदोलन करने वालो के साथ हिंसा करने, मारपीट करने, गाली-गलौज करने, और फर्जी FIR करने में व्यस्त है।
मजे की बात यह है कि यह दल खुद को देशभक्त और आंदोलन को गद्दार कहता है।
सिर्फ लाइब्रेरियन ही क्यों ?
तमाम शिक्षक भर्तियां स्थाई आनी चाहिए।
"विद्या संबल" राजस्थान के लिए अभिशाप है। कॉलेज शिक्षा में लेकर आए थे उसका हश्र सबने देखा है और परिणाम अब तक युवा बेरोजगार भुगत रहे है।
"विद्या संबल" से भले ही तात्कालिक रूप से स्कूलों में अध्यापक पहुंच जाए; विद्यार्थियों में टीचरों की कमी पूरी हो जाए; लेकिन इसके दीर्घकालीन परिणाम बुरे है ।
1. इसकी चयन प्रकिया में नियमों के विरुद्ध जाकर शत प्रतिशत धांधली होगी, संबंधित अधिकारी अपने परिचितों को ही लगवाने का प्रयास करेगा।
2. इसमें चयनित होने वाले लोग कुछ समय पद पर काम करके; जब पद छोड़ने के आदेश आयेंगे तो कोर्ट जाकर स्टे ले आयेंगे , फिर डटे रहेंगे।
3. कॉलेज शिक्षा में विद्या सम्बल की विफलताओं के बाद "टीचिंग एसोसिएट" की संविदा पर भर्ती निकाली जो अभी कोर्ट में साँसे ले रही है। यहाँ बड़ी स्थाई भर्तियों के रास्ते अवरुद्ध है।
4. स्कूलों वाली "विद्या संबल" भी संविदा आधारित भर्ती का मार्ग प्रशस्त करेगी; जो कि युवाओं के सपनों को तोड़ेगा।
5. इसमें आरक्षण नीति का भी पालन नहीं होना , इसको कोर्ट दरवाज़ा खटखटाने के लिए भी मजबूर करेगा।
केंद्र सरकार में भी केंद्रीय विद्यालयों , नवोदय विद्यालयों इत्यादि में "गेस्ट फैकल्टी" लगाती है। उनके नियमों और प्रक्रियाओं पर भी विचार करना चाहिए; क्योंकि वहां इस प्रकार की स्थिति नहीं बनती है।
सरकार को इस पर विचार करना चाहिए। बिना जैक जुगाड़ वाले बेरोजगार इसका पुरजोर विरोध कर रहे।
@RajCMO@BhajanlalBjp@madandilawar@rajeduofficial
#नहीं_चाहिए_विद्या_सम्बल
सरकार विद्या संबल योजना के नाम पर केवल बेरोजगार युवाओं को लॉलीपॉप देने का काम कर रही है इससे ज्यादा कुछ नहीं 🙏
अगर इस योजना के तहत स्कूलों में अस्थाई मास्टरों को ले लिया गया तो,
आने वाले समय में 2027 में शिक्षा विभाग में बड़ी भर्ती को भूल जाना 🙏🙏
#विद्यासंबल_योजना_का_बहिष्कार