मैं संगठन सृजन अभियान में बतौर पर्यवेक्षक उज्जैन गयी थी।बच्चे-बच्चे की ज़ुबान पर ज़मीन घोटालों की बात थी
खास तौर से 2028 के सिंहस्थ के लिए किए जा रहे 7,379 करोड़ के विकास के संदर्भ में
Indian Express ने भांडा फोड़ किया है कि मोहन यादव और परिवार ने उनके CM बनने के बाद से 253 एकड़ ज़मीन खरीदी है
आज उज्जैन में इनके पास कुल 245 plot और 335 एकड़ ज़मीन है
गौरतलब है कि ये सारी ज़मीन उज्जैन के उन इलाकों में खरीदी गई हैं, जहां मध्यप्रदेश सरकार Infrastructure Development का काम ज़ोर-शोर से कर रही है
मोहन यादव, उनकी पत्नी सीमा यादव , बेटा वैभव यादव, बहू शालिनी यादव बड़े भाई नारायण यादव समेत पूरे कुनबे ने सस्ती जमीनें खरीदकर एक massive Land Bank बना कर भ्रष्टाचार की नयी इबारत लिखी है..
तैयारी है सरकारी खजाने से इलाके के विकास की कई गुना कीमत वसूलने !
Indian Express ने देश के सामने तथ्य रख दिए हैं
देखना ये है कि कितने Media House इस बड़े खुलासे पर मोहन यादव को कठघरे में खड़ा करते हैं ?
कितने एंकर आज इस मुद्दे पर बहस करते हैं ?
(मैंने उज्जैन की अपनी प्रेस वार्ता में भी मुख्यमंत्री और उनके परिवार द्वारा ज़मीन हथियाने का उल्लेख किया था, जो कि ज़्यादातर अख़बारों ने छापने की हिम्मत नहीं दिखायी)
4th पिल्लर आज बेरिकेटिंग के उस पार खड़ा है ,
जिम्मेदारी तय न हो सवाल न पूछे जाए इस लिए मीडिया को 100 मीटर से अधिक दूरी पर ही रोक दिया गया।
@yadavakhilesh जी सही कहते थे बीजेपी वाले लोकतंत्र को खत्म कर देंगे।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का बड़ा भ्रष्टाचार 👇
• दिसंबर 2023 में मोहन यादव जैसे ही मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे, उसके बाद उनके परिवार ने उज्जैन में धड़ाधड़ जमीनें खरीदनी शुरू कर दीं.
• कुल 137 प्लॉट खरीदे गए, जो 168 एकड़ के हैं.
• ये प्लॉट सरकारी प्रोजेक्ट्स के आस पास खरीदे गए. मतलब मोहन यादव प्रोजेक्ट्स की घोषणा करते और उनका परिवार उसके आस पास जमीन खरीदता.
• इस भ्रष्टाचार में मोहन यादव का पूरा परिवार शामिल है - पत्नी, बहू, भाई, भाई की पत्नी, भाई के बेटे, चचेरे भाई - सबके नाम से जमीन खरीदी गई.
ये कोई पहला मामला नहीं है. BJP ने पूरे देश में अपना ये भ्रष्टाचारी मॉडल लागू किया है.
आपको याद होगा, कैसे अयोध्या में मंदिर बनने से पहले जमीन का घोटाला किया गया था.
अब उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ से पहले मुख्यमंत्री का परिवार जमीन की खरीद फरोख्त में लगा है.
चुन-चुनकर जमीनें वहां खरीदी जा रही हैं, जहां सरकारी प्रोजेक्ट हैं या सरकार प्रोजेक्ट लाने का प्लान कर रही है.
ये खूली लूट है, जिसमें खुद मुख्यमंत्री शामिल हैं.
भगवान राम के मंदिर की लूट के बाद….
अब महाकाल उज्जैन में भी मची है लूट,
जो मुनाफा कमा सके तो खुल कर कमाई की छूट !
“सरकार की ज़िम्मेवारी” बनाम “व्यक्तिगत हितों के टकराव” का इससे बड़ा मामला और सबूत क्या हो सकते हैं, जो @IndianExpress की इन्वेस्टीगेशन दिखा रही है ।
👉 श्री मोहन यादव का इस्तीफा कब होगा?
👉 सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से हितों में टकराव की जांच कब होगी?
एक भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था - और उसके कारण होने वाले पेपर लीक ने हमारे अनेक बच्चों की जान ली है। हमें मिलकर ये बदलना है - साथ आकर सुनिश्चित करना है कि देश के बच्चों को दबाव और तनाव नहीं, अवसर और अधिकार मिले।
: नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi जी