(1) ओ भाइयों! पवित्र नाम के हाट में नित्यानंद उपस्थित हैं। जो भी उन्हें देखने के लिए आ रहा हैं, भाग कर आओ ! दो बड़े दुष्ट शैतान, जगाई और माधाई ने हाट लूट लिया हैं और सारी संपत्ति ले ली हैं।
नितार्इ नाम हाटे, ओ के ��ाबिरे भाइ - श्रील भक्तिविनोद ठाकुर द्वारा
(1) O brothers! Lor
(1) ओ भाइयों! पवित्र नाम के हाट में नित्यानंद उपस्थित हैं। जो भी उन्हें देखने के लिए आ रहा हैं, भाग कर आओ ! दो बड़े दुष्ट शैतान, जगाई और माधाई ने हाट लूट लिया हैं और सारी संपत्ति ले ली हैं।
नितार्इ नाम हाटे, ओ के जाबिरे भाइ - श्रील भक्तिविनोद ठाकुर द्वारा
(1) O brothers! Lor
(3) श्री श्री राधा-कृष्ण के हास्य-परिहास-सम्भाषण के समय उनके रूप लावण्य की राशि अमृत बरसा रही है। श्रील नरोत्तम दास ठाकुर कहते हैं ‘‘ये सुखमय नित्यलीलायें मेरे मन में सदा स्फुरित होती रहें। ’’
वृन्दावन रम्यस्थान - श्रील नरोत्तमदास ठाकुर द्वारा
(3) The beauty and sweetness of
(3) श्री श्री राधा-कृष्ण के हास्य-परिहास-सम्भाषण के समय उनके रूप लावण्य की राशि अमृत बरसा रही है। श्रील नरोत्तम दास ठाकुर कहते हैं ‘‘ये सुखमय नित्यलीलायें मेरे मन में सदा स्फुरित होती रहें। ’’
वृन्दावन रम्यस्थान - श्रील नरोत्तमदास ठाकुर द्वारा
(3) The beauty and sweetness of
(2) उस कमल के मध्य में आठ पंखुडियों से घिरा हुआ एक स्वर्ण-पीठ है। उन अष्ट पंखुडियों पर ललिता एवं विशाखा के नेतृत्व में आठ प्रधान नायिकायें स्थित हैं। उसके बीच में स्वर्ण-पीठ पर युगल��ोड़ी विराजमान है। श्यामसुन्दर के साथ राधिका सुंदरी बैठी हैं।
��ृन्दावन रम्यस्थान - श्रील नरोत्त
(2) उस कमल के मध्य में आठ पंखुडियों से घिरा हुआ एक स्वर्ण-पीठ है। उन अष्ट पंखुडियों पर ललिता एवं विशाखा के नेतृत्व में आठ प्रधान नायिकायें स्थित हैं। उसके बीच में स्वर्ण-पीठ पर युगलजोड़ी विराजमान है। श्यामसुन्दर के साथ ���ाधिका सुंदरी बैठी हैं।
वृन्दावन रम्यस्थान - श्रील नरोत्त
हमारी विनती है कि आप सब लोग जिस स्थिति में भी हैं, वही रहें ,चाहे परिवार के साथ हैं, नौकरी कर रहे हैं, फैक्टरी चला रहे हैं, लेकिन कृपया इस महामंत्र का जप करें। महामन्त्र का अर्थ है, पवित्र भगवन्नाम का जप जिसके द्वारा व्यक्ति ,मन में शांति jला सकता है। इस हरे कृष्ण महामंत्र के
हमें आध्यात्मिक पथ का अनुसरण बुद्धिमता व समझदारी से करना चाहिए और भावुकतावश नहीं। हमारे अंदर यह दोष है कि हम लोगों से भावुकतावश आसक्त हो जाते हैं और दर्शन से नहीं। हम भावुकतापूर्ण मोह व आसक्ति द्वारा भगवद्धाम वापस नहीं जा सकते हैं। हम दर्शन - शास्त्र का अनुसरण करते हैं। दर्शन
यदि आपको अपना मन या हृदय साफ ( निर्मल ) रखना है, तो आपको भगवान की आंतरिक इच्छाओं के प्रति शरणागत होना पड़ेगा।
If you have to keep your heart clean, you have to surrender to the inner desires of the Lord.
Если вы хотите, чтобы ваши сердца оставались чистыми, вам нужно принять п
(7) मैं एक छोटे-से-स्वर्ण निर्मित सन्दूक से कर्पूर एवं पुंगीफल (सुपारी) से बना सुगन्धित ताम्बूल उनके मुखारविन्द में अर्पित करूँगी, इस प्रकार उन्हें प्रसन्नचित्त देखूँगी।
कुसुमित वृंदावने, नाचतो शिखिगणे - श्रील नरोत्तमदास ठाकुर द्वारा
(7) When from a golden box will I take be
(7) मैं एक छोटे-से-स्वर्ण निर्मित सन्दूक से कर्पूर एवं पुंगीफल (सुपारी) से बना सुगन्धित ताम्बूल उनके मुखारविन्द में अर्पित करूँगी, इस प्रकार उन्हें प्रसन्नचित्त देखूँगी।
कुसुमित वृंदावने, नाचतो शिखिगणे - श्रील नरोत्तमदास ठाकुर द्वारा
(7) When from a golden box will I take be
(6) कमल-दल से सुशोभित सुन्दर शय्या बिछाकर, मैं उनसे शयन करने का निवेदन करूँगी। तब मैं उनके हेतु श्वेत चामर मृदु-मृदु ढुलाऊँगी।
कुसुमित वृंदावने, नाचतो शिखिगणे - श्रील नरोत्तमदास ठाकुर द्वारा
(6) When will I make a couch of lotus petals for the Divine Couple? When will I gen