Delighted to share that my article, “India’s AI Governance Crisis Isn’t A Lack Of Law”, has been published in @LiveLawIndia.
It argues that India’s AI challenge is not a lack of law, but fragmented governance.
https://t.co/nMDxboTYaG
Delighted to share my article, “Sacrilege And The State” has been published in @LiveLawIndia. It examines constitutional concerns surrounding Punjab’s anti-sacrilege law,including religious autonomy,State involvement in theology,and limits of criminal law. https://t.co/6bJuixY5gs
शाम भी थी धुआँ धुआँ हुस्न भी था उदास उदास
दिल को कई कहानियाँ याद सी आ के रह गईं
फिर हैं वही उदासियाँ फिर वही सूनी काएनात
अहल-ए-तरब की महफ़िलें रंग जमा के रह गईं
- फ़िराक़ गोरखपुरी
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भारतवर्ष के लिये प्रेरणा का पर्व — वीर बाल दिवस…
गुरु गोबिंद सिंह जी के सुपुत्र बाबा ज़ोरावर सिंह जी एवं बाबा फ़तेह सिंह जी के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण। यह दिवस प्रतिवर्ष वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि उनके अद्वितीय त्याग और वीरता को नमन किया जा सके।
20 दिसम्बर से 27 दिसम्बर का सप्ताह बलिदान सप्ताह के रूप में स्मरण किया जाता है—गुरु गोबिंद सिंह जी एवं उनके परिवार के महान त्याग, अटूट आस्था और अद्भुत धैर्य का साक्षी यह काल, अपार क्षति, बलिदान और विश्वास की गाथा है।
भज मन 🙏
ओ३म् शान्तिश् शान्तिश् शान्तिः
सुंदरकांड पढ़ते हुए 25वें दोहे पर थोड़ा रुक गया । तुलसीदास ने सुन्दर कांड में जब हनुमान जी ने लंका मे आग लगाई थी, उस प्रसंग पर लिखा है |
"हरि प्रेरित तेहि अवसर चले मरुत उनचास
अट्टहास करि गर्जा कपि बढ़ि लाग अकास।।"
अर्थात :- जब हनुमान जी ने लंका को अग्नि के हवाले कर दिया तो --वे उनचासों पवन चलने लगे।हनुमान जी अट्टहास करके गर्जे और आकार बढ़ाकर आकाश मार्ग से जाने लगे।
मैंने सोचा कि इन उनचास मरुत का क्या अर्थ है ? यह तुलसी दास जी ने भी नहीं लिखा। फिर मैंने सुंदरकांड पूरा करने के बाद समय निकालकर 49 प्रकार की वायु के बारे में जानकारी खोजी । तुलसीदासजी के वायु ज्ञान पर सुखद आश्चर्य हुआ, जिससे शायद आधुनिक मौसम विज्ञान भी अनभिज्ञ है ।
यह जानकर आश्चर्य होगा कि वेदों में वायु की 7 शाखाओं के बारे में विस्तार से वर्णन मिलता है। अधिकतर लोग यही समझते हैं कि वायु तो एक ही प्रकार की होती है, लेकिन उसका रूप बदलता रहता है, जैसे कि ठंडी वायु, गर्म वायु और समवायु, लेकिन ऐसा नहीं है।
जल के भीतर जो वायु है उसका शास्त्रों में अलग नाम दिया गया है और आकाश में स्थित जो वायु है उसका नाम अलग है। अंतरिक्ष में जो वायु है उसका नाम अलग और पाताल में स्थित वायु का नाम अलग है। नाम अलग होने का मतलब यह कि उसका गुण और व्यवहार भी अलग ही होता है। इस तरह वेदों में 7 प्रकार की वायु का वर्णन मिलता है।
ये 7 प्रकार हैं- 1. प्रवह, 2. आवह, 3. उद्वह, 4. संवह, 5. विवह, 6. परिवह और 7. परावह।
1. प्रवह :- पृथ्वी को लांघकर मेघमंडलपर्यंत जो वायु स्थित है, उसका नाम प्रवह है। इस प्रवह के भी प्रकार हैं। यह वायु अत्यंत शक्तिमान है और वही बादलों को इधर-उधर उड़ाकर ले जाती है। धूप तथा गर्मी से उत्पन्न होने वाले मेघों को यह प्रवह वायु ही समुद्र जल से परिपूर्ण करती है जिससे ये मेघ काली घटा के रूप में परिणित हो जाते हैं और अतिशय वर्षा करने वाले होते हैं।
2. आवह :- आवह सूर्यमंडल में बंधी हुई है। उसी के द्वारा ध्रुव से आबद्ध होकर सूर्यमंडल घुमाया जाता है।
3. उद्वह :- वायु की तीसरी शाखा का नाम उद्वह है, जो चन्द्रलोक में प्रतिष्ठित है। इसी के द्वारा ध्रुव से संबद्ध होकर यह चन्द्र मंडल घुमाया जाता है।
4. संवह :- वायु की चौथी शाखा का नाम संवह है, जो नक्षत्र मंडल में स्थित है। उसी से ध्रुव से आबद्ध होकर संपूर्ण नक्षत्र मंडल घूमता रहता है।
5. विवह :- पांचवीं शाखा का नाम विवह है और यह ग्रह मंडल में स्थित है। उसके ही द्वारा यह ग्रह चक्र ध्रुव से संबद्ध होकर घूमता रहता है।
6.परिवह :- वायु की छठी शाखा का नाम परिवह है, जो सप्तर्षिमंडल में स्थित है। इसी के द्वारा ध्रुव से संबद्ध हो सप्तश्रर्षि आकाश में भ्रमण करते हैं।
7. परावह :- वायु के सातवें स्कंध का नाम परावह है, जो ध्रुव में आबद्ध है। इसी के द्वारा ध्रुव चक्र तथा अन्यान्य मंडल एक स्थान पर स्थापित रहते हैं।
इन सातों वायु के सात-सात गण (संचालित करने वाले) हैं जो निम्न जगह में विचरण करते हैं-
ब्रह्मलोक, इंद्रलोक, अंतरिक्ष, भूलोक की पूर्व दिशा, भूलोक की पश्चिम दिशा, भूलोक की उत्तर दिशा और भूलोक कि दक्षिण दिशा। इस तरह 7x7=49, कुल 49 मरुत हो जाते हैं जो देव रूप में विचरण करते रहते हैं।
कितना अद्भुत ज्ञान!! हम अक्सर रामायण, भगवद् गीता पढ़ तो लेते हैं परंतु उनमें लिखी छोटी-छोटी बातों का गहन अध्ययन करने पर अनेक गूढ़ एवं ज्ञानवर्धक बातें ज्ञात होती हैं।
बजरंगबली महाराज की जय!! जय श्री सीताराम!!
सनातन धर्म ज्ञान🚩🚩🚩
@TheVvSingh I will take a few Personal Meets on Zoom.
Duration: 60-90 mins.
Fees: Rs 500
You are allowed to discuss anything with me.
Expect raw and unfiltered truth in return.
DM to fix the call..
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मनुष्य का यथार्थ उद्देश्य संसार को जीतना नहीं,
बल्कि स्वयं को जानना है।
सभी साधन, सभी अनुभव, सभी मार्ग
अंततः हमें उसी एक प्रश्न तक लाते हैं
“मैं कौन हूँ?”
जब साधक इस सत्य का अनुभव करता है,
तो उसका दृष्टिकोण बदल जाता है,
वह संसार में रहकर भी संसार से परे हो जाता है।
वह जान लेता है कि दुःख, सुख, सम्मान या अपमान
केवल तरंगें हैं,
और वह स्वयं सागर है; अचल, शांत, अनंत।
आत्मबोध कोई सिद्धि नहीं,
यह उस मौन की अनुभूति है
जहाँ जानने वाला, ज्ञेय और ज्ञान; तीनों एक हो जाते हैं।
यह वही क्षण है जब साधना साध्य में विलीन हो जाती है,
और शिष्य में शिव प्रकट होता है।
आज का संकल्प,
“मैं बाहरी संसार में नहीं,
अपने भीतर के ब्रह्म में सत्य खोजूँगा; जहाँ सब कुछ एक है, सब कुछ मैं हूँ।”
“अहं ब्रह्मास्मि।”
मैं ब्रह्म हूँ — वही चेतना जो सर्वत्र व्याप्त है।
भज मन 🙏
श्री जगदगुरु: स्वामी संदीपानी
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तुझ में भी वही ख़ताएँ हैं,
जो मुझ में हैं,
फिर उसूलों की दुहाई क्यूँ देता है।
ज़रा मेरी नज़र से ख़ुद को तो देख, ग़ालिब,
मुझे तुझ में — और तुझ में — मैं दिखाई देता है।