उप्र में दिनदहाड़े लुटते ‘सुनारों की सुरक्षा’ की समस्या अभी सुलझी नहीं थी कि तब तक ‘सोनाबंदी’ का व्यापार-चौपट करनेवाला आह्वान आ गया और फिर ‘सोने पर इम्पोर्ट ड्यूटी ढाई गुना बढ़ाने का फ़रमान’।
ज़ेवरात-गहनों के व्यापार में बड़ी कंपनियों के आ जाने से ये छोटे सुनार वैसे ही कम्पटीशन नहीं कर पा रहे थे, अब उन्हें लग रहा है कि शायद बड़ी कंपनियों से एकमुश्त कमीशन लेने के चक्कर में ही भाजपाइयों ने युद्ध के बहाने, सोनाबंदी की बात करी है। भाजपाई जानते हैं कि एक साल में तो लाखों सुनार चौपट होकर अपना काम बंद कर देंगे, तब ये बड़ी कंपनियाँ हर छोटे-बड़े शहर में अपने शोरूम खोलकर मनमाने दाम पर गहने बेचकर जनता को लूटेंगी और भाजपा को अकूत धन कमाकर देंगी। आज भाजपाई नीतियों के मारे सुनार-स्वर्णकार समाज की इन समस्याओं को सुनकर लगा कि सबसे अधिक धन लगाकर व्यापार करनेवाले लोगों के चमचमाते शोरूमों और ज्वेलरी शॉप्स की चमक जब धूमिल हो गई है तो बाक़ी दूसरे काम-कारोबार का क्या। ये लोग कहाँ जाएंगे और कैसे अपने परिवारों को पालेंगे।
भाजपा सरकार की नीतियों ने देश की अर्थव्यवस्था को अनर्थ-व्यवस्था में बदल दिया है।आम लोगों के जीवन को संकट से भर दिया है।
सुनार कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
‘महाराणा’ की वही चेतना फिर से अब जगानी है
नई स्वतन्त्रता के लिए, अब नई कसम उठानी है!
वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी की जयंती की शौर्यपूर्ण अनंत शुभकामनाएँ!
दिल्ली से पर्ची आ गयी क्या?
सुना है यूपी में कैबिनेट का विस्तार हो रहा है या यूँ कहें कि मुख्यमंत्री जी की शक्ति का ‘कटाव छटाव’ हो रहा है। जिनका मंत्रिमंडल है उनसे भी तो कोई पूछ ले। हमारी माँग है कि यूपी के मंत्रिमंडल विस्तार में महिलाओं को आरक्षण दिया जाए।
वैसे ये सवाल भी कुलबुला रहा है : ‘अगल-बगल’ की जोड़ी का कुछ हला-भला होगा या फिर वो ‘अगले-बगले’ ही झांकते रह जाएंगे या सिर्फ़ रील बनाते…
जयपुर, राजस्थान में मिले अपार स्नेह और आतिथ्य के लिए हर एक को धन्यवाद!
सामंजस्य से सौहार्द आता है, सौहार्द से अमन-चैन और अमन-चैन से तरक़्क़ी, तरक़्क़ी से बराबरी और बराबरी से ही सामाजिक न्याय सभंव होता है।
हम ‘सामाजिक न्याय का राज’ लाने के लिए संघर्षरत हैं, इसके लिए चाहे साल लगें या सदी।
Harmonious Past ही Harmonious Future बनाएगा।
हम साम्प्रदायिकता का जबाव सामुदायिकता से देंगे। जिसकी शुरुआत 2024 के लोकसभा चुनाव में सफलतापूर्वक हो चुकी है। अब 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में ये पहली बार होगा कि एक साम्प्रदायिक दल के ख़िलाफ़ कोई समुदाय लड़ेगा और जीतेगा…उस समुदाय का नाम है… PDA!
हम राजस्थान में पीडीए की पौध लेकर गये, जिसे अभूतपूर्व समर्थन मिला, शुक्रिया जयपुर।
Vision India : Harmonious Heritage Summit @ Jaipur
अयोध्या के निवासियों के बीच ये सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि आख़िरकार अयोध्या का मास्टर प्लान बार-बार क्यों बदला जा रहा है। सच्चाई तो ये है कि ये बार-बार बदला नहीं, कुछ महाभ्रष्ट लोगों द्वारा बदलवाया जा रहा है क्योंकि हर बार कुछ नये लोगों को फ़ायदा पहुँचाने के लिए नई-नई सिफ़ारिशें आ जाती हैं। जिनकी वजह से ‘गरम’ हथेली पुराने मास्टर प्लान के निरस्तीकरण के लिए ‘नरम’ हो जाती है और जिन लोगों को अयोध्या के विकास का काम मिला है वो लगातार नुक़सान सहते हुए, हाथ-पर-हाथ धरे बैठे रह जाते हैं और कुछ लोग लखनऊ में बैठकर मास्टर प्लान को निरस्त करने का खेल खेलते रहते हैं।
भाजपा कम से कम अयोध्या को तो अपने अधर्मी महा-भ्रष्टाचार से मुक्त रखे।
जब गिनती ही गलत होगी तो आरक्षण कैसे सही होगा।
अगर किसी काम को करने की सही मंशा होती है, तो शंका नहीं होती है।
दरअसल महिला आरक्षण बिल का तो आधार ही निराधार है। आरक्षण का आधार अगर कुल सीटों का 1/3 (एक तिहाई) है तो इसका मतलब हुआ कि ये गणित का विषय है और गणित का आधार अंक होते हैं, संख्याएं होती हैं, कोई हवा हवाई बात नहीं। और इस तरह के मामले में संख्या का आधार जनसंख्या होती है, जिसका आधार जनगणना होती है। जब महिलाओं की जनसंख्या के लिए 2011 के पुराने आँकड़ों को आधार बनाएंगे तो महिला आरक्षण की आधारभूमि ही गलत होगी, जब भूमि में ही दोष होगा तो सच्ची फसल कैसे उगेगी।
इसीलिए हमारी सबसे बड़ी आपत्ति यही है कि पहले जनगणना कराई जाए फिर महिला आरक्षण की बात उठाई जाए। जो सरकार महिलाओं को गिनना नहीं चाहती है, वो भला उन्हें आरक्षण क्या देगी। महिलाओं के साथ भाजपा और उनके संगी-साथी जो धोखा करना चाहते हैं, महिलाओं के साथ वो छलावा हम नहीं होने देंगे।
कुल मिलाकर सरकार से हमारा ये कहना है :
जब तक जनगणना नहीं, तब तक महिला आरक्षण पर बहस करना नहीं!
भाजपा सरकार के कहर की वजह से उप्र में पीड़ित लोगों की एक नई श्रेणी बन गई है, जिसका नाम है : ‘प्रीपेड पीड़ित’।
‘प्रीपेड पीड़ित’ का मतलब ये है कि जो लोग बिजली के प्रीपेड मीटर लगाकर बैठे हैं वो स्मार्ट मीटर की ख़ामियों की वजह से बिजली कट जाने पर अंधेरे और गर्मी का संकट झेलने को मजबूर हैं।
जब बिजली खाते में बिजली के इस्तेमाल करने से पहले ही पैसा जमा हो जाता है तो फिर सरकार और कंपनी जनता को क्यों परेशान कर रही है। बिजली कंपनियों को तो पैसा पहले ही मिल जाता है, फिर उन्हें आम जनता की चिंता करने की क्या पड़ी है। बेचारी जनता दर-दर भटकने पर मजबूर है लेकिन सरकार और कंपनियाँ के सामने कोई सुनवाई नहीं है क्योंकि वो पहले से ही मिलीभगत करके पैसे कमा के बैठी हैं।
सच तो ये है कि भाजपा राज में अब जनता ‘उपभोक्ता’ नहीं रह गई है, ‘उपभुगता’ हो गई है क्योंकि वो हेराफेरी से बनी भाजपा सरकार के दुष्परिणामों को ‘भुगतने’ पर मजबूर है।
इसी कारण पीडीए की संख्या भी लगातार बढ़ रही है क्योंकि हम हमेशा कहते हैं और आज भी कह रहे हैं: जो पीड़ित, वो पीडीए!
अब पीडीए में जुड़े ये नये ‘प्रीपेड पीड़ित’ कह रहे हैं कि चिंता न करें : बुरे दिन जानेवाले हैं।
पीड़ित सरकार आएगी, सबको बिजली दिलवाएगी!
#बुरे_दिन_जानेवाले_हैं
हर दीये तले मिटे अंधेरा और हर ओर ख़ुशियों का उजाला हो, इसी कामना के साथ दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ!
दिवाली यादों को भी रोशन कर जाती है… आज घर के लिए खील ख़रीदी तो बचपन याद आ गया।
जब हम सब मिलकर सबके हर छोटे-बड़े काम-कारोबार को प्रोत्साहन देंगे तो सबकी दिवाली मनती रहेगी।
सबके श्रद्धेय माननीय नेता जी की पुण्यतिथि पर उनको शत्-शत् नमन करते हुए हम संकल्प लेते हैं कि :
- ‘संविधान की रक्षा’ के लिए एकजुट रहेंगे और ‘संविधान ही संजीवनी’ है और ‘संविधान ही ढाल है’ ये संदेश जन-जन तक पहुँचाते रहेंगे।
- आरक्षण को समाप्त करने के लिए जो लोग तरह-तरह के षड्यंत्र कर रहे हैं, उनको हमेशा के लिए हराएंगे।
- ‘न्याय के राज’ से आगे बढ़कर ‘सामाजिक न्याय के राज’ की स्थापना करेंगे।
- हर पीड़ित, दुखी, अपमानित को ‘पीडीए’ के एकसूत्र में बाँधे रखेंगे।
- ’पीडीए के स्वाभिमान और स्वमान’ की चेतना को निरंतर आगे बढ़ाते रहेंगे।
- नाइंसाफी और अत्याचार करनेवाले वर्चस्ववादियों और प्रभुत्ववादियों के दंभ व अहंकार को निर्णायक रूप से पराजित करेंगे।
- जो लोग पीडीए समाज के होते हुए भी, अपने निजी स्वार्थ के लिए पीडीए समाज पर ज़ुल्म करनेवालों के साथ खड़े होकर, अपने ही समाज को धोखा दे रहे हैं, उनकी धोखेबाजी को सबके सामने लाएंगे।
- मानवता से भरे हुए हर समाज के उन अच्छे और सहृदय लोगों को साथ में लेकर आगे बढ़ते रहेंगे जो शोषण को पाप समझते हैं और बिना किसी वर्चस्व की भावना और अहंकार के मानव की सेवा में रत रहते हैं और सामाजिक भेदभाव की समाप्ति के लिए हर तरह से प्रयासरत हैं।
- हर एक पीड़ित, उत्पीड़ित, शोषित, वंचित, दमित, ग़रीब, किसान, मज़दूर, पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक, आदिवासी, असुरक्षित महिला व उपेक्षित युवा के रूप में, पीड़ा के एकसूत्र में बंधे हुए संपूर्ण पीडीए समाज को समान अवसर और सम्मान दिलवाने के लिए लड़ेंगे और अंततः 90% लोगों की जीत दर्ज़ करके दिखाएंगे।
- हम ‘संपर्क, संवाद और सहयोग’ के अपने सिद्धांत के साथ सबकी मदद के हाथ बनते रहेंगे।
- हम अपनी ‘पीडीए सरकार’ बनाकर अपने हक़ और सम्मान की स्थापना करके रहेंगे!