2013 भर्ती की जांच का ढोल, राजस्थान विश्वविद्यालय में 2018 भर्ती घोटाले की रिपोर्ट पर चुप्पी?
@LokBhavanJaipur की चुप्पी पर सवाल?
राजस्थान विश्वविद्यालय में इन दिनों 2013 की भर्ती को लेकर जांच समिति गठित करने और पूरे मामले की पड़ताल कराने की बातें जोर-शोर से हो रही हैं। राजभवन के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन सक्रिय दिखने की कोशिश कर रहा है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह वास्तव में पारदर्शिता की दिशा में कदम है या फिर पहले से दबी हुई फाइलों पर पर्दा डालने की नई रणनीति?
यदि विश्वविद्यालय और राजभवन वास्तव में भर्ती प्रक्रियाओं में हुई अनियमितताओं को लेकर गंभीर हैं, तो सबसे पहले जवाब 2018 की भर्ती पर देना होगा। क्योंकि 2018 भर्ती कोई ऐसा मामला नहीं है जिसकी जांच अभी बाकी हो। इस भर्ती को लेकर जांच हो चुकी है, रिपोर्ट तैयार हो चुकी है और कई गंभीर तथ्य सामने भी आ चुके हैं। इसके बावजूद वर्षों बाद भी कार्रवाई का इंतजार बना हुआ है।
तत्कालीन जयपुर संभागीय आयुक्त के.सी. वर्मा की अध्यक्षता में हुई जांच में कई नियुक्तियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे। आरोप यह रहे कि कुछ चयनित अभ्यर्थी विश्वविद्यालय और यूजीसी के निर्धारित मानकों के अनुरूप अनिवार्य न्यूनतम पात्रता तक पूरी नहीं करते थे, फिर भी उन्हें नियुक्ति दे दी गई। इतना ही नहीं, बाद में हुए अन्य परीक्षणों और जांचों में भी पात्रता संबंधी सवालों को खारिज नहीं किया जा सका।
सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि जब जांचों में पात्रता और चयन प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां दर्ज हो चुकी हैं, तब भी संबंधित लोग आज तक विश्वविद्यालय में सेवाएं दे रहे हैं। इससे भी आगे बढ़कर उन्हें महत्वपूर्ण प्रशासनिक और खेल संबंधी जिम्मेदारियां सौंपी जाती रही हैं। आखिर किस आधार पर?
यदि 2018 भर्ती में नियमों की अनदेखी कर नियुक्तियां दी गईं, तो यह केवल एक प्रशासनिक त्रुटि नहीं है। यह उन योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है जिन्हें उनका वैधानिक अधिकार नहीं मिला। यह उन युवाओं के सपनों पर चोट है जिन्होंने पूरी योग्यता के साथ आवेदन किया और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया की उम्मीद की थी।
आज स्थिति यह है कि 2013 भर्ती को लेकर नई जांच समिति बनाने की चर्चा हो रही है, लेकिन 2018 भर्ती की वह जांच रिपोर्ट, जिस पर पहले ही व्यापक पड़ताल हो चुकी है, अब भी कार्रवाई का इंतजार कर रही है। सवाल यह है कि जब एक मामले में रिपोर्ट आने के बाद भी कोई परिणाम नहीं निकला, तो दूसरे मामले में जांच समिति गठित करने का औचित्य क्या है?
क्या 2013 भर्ती की जांच वास्तव में पारदर्शिता की दिशा में कदम है या फिर 2018 भर्ती की असहज करने वाली रिपोर्टों से ध्यान भटकाने की कवायद?
राजभवन और विश्वविद्यालय प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि 2018 भर्ती से जुड़े मामलों में, जहां जांच रिपोर्टें पहले से उपलब्ध हैं और पात्रता संबंधी गंभीर सवाल दर्ज किए जा चुके हैं, वहां कार्रवाई कब होगी? क्या दोष तय होंगे? क्या जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होगी? या फिर यह रिपोर्टें भी फाइलों में धूल खाती रहेंगी?
सवाल केवल 2013 या 2018 भर्ती का नहीं है। सवाल यह है कि क्या राजस्थान विश्वविद्यालय में जांच रिपोर्टों का कोई महत्व है? यदि जांच के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती, तो जांच समितियां न्याय का माध्यम नहीं बल्कि समय बिताने का साधन बनकर रह जाती हैं।
राजस्थान विश्वविद्यालय और राजभवन दोनों को अब यह बताना होगा कि न्याय केवल जांच समिति गठित करने से होगा या फिर पहले से उपलब्ध जांच रिपोर्टों पर भी ठोस कार्रवाई की जाएगी। क्योंकि यदि जांच के निष्कर्षों को वर्षों तक फाइलों में दबाकर रखा जाएगा, तो यह पारदर्शिता नहीं बल्कि व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न होगा।
@LokBhavanJaipur@BagadeHaribhau@DrPremBairwa
#पीटीआई_भर्ती_2022
जांच जांच ये तों चल ही रही है!!
X पर
सबसे ज्यादा तर्क वितर्क करने वाले ही फर्जी निकल रहें।
जब फर्जीवाड़े पर कोई लिख दे तों आ जाते हैं कोन फर्जी कोन फर्जी, फिर पता चला है पुंछने वाले पर पहले से ही एफआईआर दर्ज है फर्जीवाड़े में लिप्त है।
अधिकारी,कर्मचारी, सरकार सौ रहीं। @RajCMO@PMOIndia@EduMinOfIndia@1K_Nazar@1stIndiaNews@alokrajRSSB@rajeduofficial
सरकार को जल्दी हैं स्थाईकरण की
निदेशालय बीकानेर को जल्दी हैं स्थाईकरण की ऐसी क्या मजबूरी है की जांच कॉम्प्लिट नहीं
जो फर्जी है या संदिग्ध है उनकी छंटनी नहीं कि
लेकिन स्थाईकरण करना है
10 बिन्दुओं पर जांच 10 महीने हों गये लेकिन जांच चल रही है, फर्जी नौकरी कर रहे हैं,
पता नहीं किसके भरोसे चल रही है निदेशालय, संकुल, सचिवालय @madandilawar@KumariDiya@DrPremBairwa@ashokshera94
वा बॉस इसके लिए एक शायरी
खुद ही दाग़ लगाकर आईना साफ़ बताता है,
हर महफ़िल में फिर इंसाफ़ का पाठ पढ़ाता है।
अजब किरदार है उसका, अजब उसकी कहानी है,
खुद फरेब का सौदागर, और बात न्याय की करता है।
@DharmveerM68397
"अधूरा काम छोड़कर भी जश्न मनाया जा रहा है,
जिनका अब तक कुछ ना हुआ, उनका दर्द छुपाया जा रहा है।
गले में मालाएं हैं नेताओं के, चेहरे पर मुस्कान,
और जनता का एक हिस्सा आज भी फरियाद सुना रहा है।"😄
गुमनाम शायर........
@mosamali143@premgoliya07
Don't take anything personal......
"फैसला क्या हुआ, ये किसी ने पढ़ा नहीं,
जश्न ऐसा कि जैसे कोई बड़ा ग़म रहा नहीं।
पूछो तो कहते हैं 'बहुत अच्छा हुआ है',
क्या अच्छा हुआ है? ये अभी तक पता नहीं!" 😄
गुमनाम शायर.......
@mosamali143@premgoliya07@MakkhanSinghG
@JaatMohit001@saten_08 वंचितों को उनका हक मिले सर ।
हम हमारे आदरणीय निदेशक महोदय जी से ये निवेदन करते है। जो भी अपात्र हो रहे ह उनकी जगह पात्र वंचित को मौका दिया जाए ।
हर वंचित कंडीडेट भगवान की तरह आपकी पूजा करेगा । प्लीज सर,🙏
पिछले कुछ दिन पहले पूछ रहे थे इसका मतलब जवाब मिल गया या बाकी है
Opjs 139
माधव 116
B.N 70
Sjjtu 33
सिंघानिया + सनराइज रुके
बाकी राजस्थान के कितने थे उनमें से यह कम करके देख लेना कितनों का हुआ है
एक भी फर्जी नहीं बचेगा धरनों में पीछे छुप के बैठने से बचोगे नहीं
साँच को आँच नहीं
सत्य, न्याय और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई में आपके साहस, समर्पण और संघर्ष ने अनगिनत लोगों को प्रेरित करने वाले पीटीआई भर्ती में फर्जीवाड़े के खिलाफ मजबूत आवाज बड़े भाई @premgoliya07 को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं🎂🎉
मां करणी आपको हमेशा उन्नति दे🚩🙏
ख़ैरात में कुछ नहीं चाहिए, अपना हक लेकर रहेंगे,
हर जुल्म का जवाब अब बुलंद आवाज में देंगे।
हम भारत के नागरिक हैं, हमारी ताकत को पहचानो,
अब जो छीना है हमसे, वो सब वापस लेकर रहेंगे!
फर्जीवाड़ा से पीड़ित वंचित PTI 2022
@Kunal_Alwar@RPS_DharmaGila@HANUMANKISAN@BhajanlalBjp
@kamal_kanawaria@saten_08 Report को चेंज करने में पर जोर दिया जा रहा है.... चंदा गैंग के पक्ष में रिपोर्ट तैयार करवाने की वजह से इतना waqt लगाया जा रहा है..
PTI में 939 को और librarian में 201 को अपात्र घोषित करवाने की हठधर्मिता पर अडे है