मेरे पास दो चश्में हैं। एक चश्मा पहनकर हीरो लगता हूँ तो दूसरा चश्मा पहनकर पढ़ा-लिखा, सीधा-सादा और सभ्य लड़का लगता हूँ।
मैं अपने प्रति आपका नज़रिया ख़ुद तय करता हूँ। मैं अपनी सहूलियत के हिसाब से अपना चरित्र बदल लेता हूँ।
यह सब बातें चश्मों के लिए तो कतई नहीं हैं। आप जो सोच रहे होते हैं वह कभी नहीं होता है बल्कि
शातिर लोग आपको वो सोचने पर मजबूर करते हैं जो सच कभी भी नहीं होता है।