चिल्लाते सिर्फ वही लोग करते हैं जो कभी कभी आनंद जी को पसंद नहीं करते हैं और बीएसपी को वोट नहीं देते आकाश पार्टी में ही हैं और रहेंगें पद फिर मिल जाएगा।
सादाबाद की रैली में जब आकाश आनंद ने @yadavakhilesh जी अंकल कहा था तब भी गांव में दर्द हो रहा था।
और अब जब बहन जी ने आकाश भैया को पद मुक्त कर दिया है तब भी सपाइयों के गांव में दर्द हो रहा है।
आकाश भईया जल्द वापसी करेंगे क्योंकि आकाश ही बसपा के भविष्य है।
@AnandAkash_BSP जी
विरोधी दल एवं जातिवादी लोग कभी कहते हैं कि बीएसपी ख़त्म हो गई,कभी कहते हैं कि बीएसपी मैदान में नहीं हैं,तो कभी कहते हैं कि बीएसपी,भाजपा की B टीम है।
कल बीएसपी अध्यक्षा आदरणीया बहन जी ने श्री आकाश आनन्द को राष्ट्रीय समन्यवक के पद से मुक्त कर दिया।
फिलहाल श्री आकाश आनन्द बहुजन समाज पार्टी में एक कार्यकर्ता के तौर पर काम करते रहेंगे।
श्री आकाश आनन्द की पदावनति पर जातिवादी दलों एवं विरोधियों को खुश होने की आवश्यकता नहीं है।
सही समय आने पर श्री आकाश आनन्द जी को राष्ट्रीय समन्यक ही नहीं,बल्कि राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बनाया जाएगा।
आदरणीया बहन कु0 मायावती जी ने जब-जब श्री आकाश आनन्द को बीएसपी से बाहर किया या उन्हें पद से मुक्त किया है,तब-तब आदरणीया बहन जी ने श्री आकाश आनन्द को दोगुनी ताकत देकर मैदान में उतारा है।
कुछ दिन की बात है,फिर आदरणीया बहन जी के निर्देश पर श्री आकाश आनन्द क़ई गुना अधिक ताकत के साथ मैदान में उतरेंगे।
लोगों का दुःखी होने की कोई जरूरत नहीं बहन जी कभी कोई बेवजह फैसला नहीं लेती हैं।
आकाश दुबारा आएंगे और बड़ी जिम्मेदारी के साथ बहन जी के दो चेले हैं दोनों बहुत ही योग्य हैं आकाश
जयप्रकाश।
युवाओं की भाषा यही है, GenZ की भाषा यही है; बॉडी लैंग्वेज बेहतरीन।
सेंटेंस के लास्ट में ली गई चुटकी सुनो-गन्ने का रस😅
रैपिडो ड्राइवर अंकित की भी आवाज उठाकर शानदार काम किया था@AnandAkash_BSP ने।
लाखों अंकितों को उम्मीद जगी थी।
एक आस एक आशा, अपनेपन का रस।
आकाश आनंद जैसे ही युवा जोश के साथ, स्पीच देकर बहुजनों में छा जाते हैं।
वैसे ही इमेच्योर बताकर बिठा दिए जाते हैं।
नेताओं के बच्चों का नेता बनना हमें बिल्कुल अच्छा नहीं लगता मगर @AnandAkash_BSP पर ये बात लागू नहीं होती क्योंकि सिर्फ मुश्किलों में याद किए जाते हैं। निराशा के दौर में ही उम्मीद जगाते हैं।
पॉलिटिकल कम्युनिकेशन, लिखने बोलने के एक्सपर्ट के तौर पर बता रहा हूं- ये टॉप 1% ओरेटर में आते हैं।
इतनी छोटी सी उमर में चुपचाप सब विष पी जाते हैं।
सालों साल अपनी बारी का इंतजार करते हैं।
असली मैच्योरिटी इसी को कहते हैं।
#MatureAkash ✊
आनंद स्वरूप जी से ना मेरी कोई रिश्तेदारी है, ना मैं इनका भक्त हूं……. कई जगह कई मुद्दों पर मेरी इनकी असहमति रहती है। कई मुद्दों पर मत भिन्न रहते हैं। महीनों से मिला भी नहीं। ये भी सच है कि ये अपनी स्वयं की राजनीति देख रहे हों।
लेकिन सच यही है भरत तिवारी के न्याय से लेकर जंतर-मंतर में हुए इस आंदोलन को सबसे अधिक गति इनके कारण ही मिली। जिस मुद्दे पर लोग बोलने से डरते थे उस मुद्दे को इन्होंने न्यू नार्मल बना दिया। सरकार अगर बात करनी है तो ऐसे लोगों से करे। नहीं तो बेहतर है कि बात ना ही करें। हर्ष एक बच्चा से अधिक कुछ भी नहीं।
सोशल मीडिया में सर्वाधिक गति अजीत भारती बेबाकी के कारण मिली। नेहा दास जी जैसे लोग सालों से इस पर काम कर रहे हैं। इसलिए कुटिलता छोड़कर बड़े दिल से सरकार को वार्ता सही लोगों से करनी चाहिए।
आरक्षण के खिलाफ BJP है.
जाति जनगणना के खिलाफ BJP है.
इसके बावजूद OBC SC ST की कई जातियां BJP को वोट देती हैं.
सवर्ण BJP को क्यों देता है यह जगजाहिर है. लेकिन इस मुद्दे पर कभी डिबेट नही होती है.डिबेट केवल दलित पिछड़ों पर होती है कि वो जाति देखकर वोट क्यों देता ?
हर्ष दुबे जिसे ठीक लिखना नही आता. आरक्षण के खिलाफ बोलने पर न्यूज़ चैनलों ने सराखों पर बिठा लिया.
अब उसी हर्ष दुबे को BJP नेता जेपी नड्डा जी अहमियत देकर नेता बना रहे हैं.
BJP को आरक्षण पर अपना स्टैंड साफ करना चाहिए.
लाइव कवरेज में हर्ष दुबे से 200 शब्दों का निबंध लिखा लिया जाए. सब पता चल जाएगा कितना काबिल है.
"अछूत" शब्द एससी की सभी उपजातियों को एक वर्ग बनाती है। इसलिए मनुवादी ताकतों के विभाजन योजना से सतर्क रहें।
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प्रश्न : मामला क्या था?
उत्तर : यूजीसी गाइडलाइंस का
प्रश्न : किन वर्गों से सम्बंधित था?
उत्तर : ओबीसी
प्रश्न : टारगेट कौन हो रहा है?
उत्तर : अनुसुचित जाति/जनजाति
प्रश्न : गालिया, अपशब्द किसे दिए जा रहे है?
उत्तर : बाबा साहब व चमार व उसकी उपजातियों को
प्रश्न : क्यो?
उत्तर : बाबा साहब के कारण समाज मे फैली असमानता के खिलाफ पहली बार विद्रोह हुआ। जँहा हाथ जोड़कर एससी/एसटी व ओबीसी वर्ण व्यवस्था व अपने निम्न होने, एक निम्न स्तर के या श्रम से जुड़े कार्यो को भगवान का आदेश मानकर स्वीकार करते थे जैसे यादव केवल दूध, मौर्या, सैनी सब्जियां उगाने, निषाद नाँव चलाने, बढ़ई लकड़ी के कार्य व नोनिया नमक निकलाने व अन्य को ही स्वीकार करता था वो बाबा साहब के कारण "हमारे भी मानव अधिकार समान है" कहने लगा। इसलिए बाबा साहब सबसे ज्यादा चुभते है।
बाबा साहब के विचारों को महार समाज ने जिंदा रखा लेकिन महाराष्ट्र से निकालकर सम्पूर्ण उत्तर भारत मे मान्यवर कांशीराम साहब, बहनजी ने घर घर मे पहचाया। रामविलास पासवान जी से लेकर अन्य काफी का भी इसके बाद महत्वपूर्ण रोल रहा है। बाबा साहब के विचारों को फैलाने में श्री रामविलास पासवान जी के योगदान को हमेशा स्मरण किया जाना चाहिए।
बाबा साहब के कारण आरक्षण मिला। लेकिन नेहरू ने इसे जमीनी स्तर पर लागू होने नही दिया बल्कि बकायदा राज्यो को पत्र लिखकर आरक्षण के खिलाफ लिखा। इसलिए इस दौर में केंद्र व राज्यो ने आरक्षित पद भरने की जगह बैकलॉग बनांकर रखा व योजना यह थी कि धीरे धीरे सामान्य से भरकर आरक्षण व्यवस्था खत्म कर दे।।लेकिन नेहरू के जाते ही बाबू जगजीवनराम जी ने इंदिरा गाँधी सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका में आकर "सो सुनार की, एक लोहार की" कहावत पर कार्य करते हुए एक झटके में बैकलॉग खत्म करके भर्तियां पूरी कर दी व सबसे महत्वपूर्ण एससी/एसटी सन्गठन विभागों में बना दिये जैसे रेलवे एससी/एसटी यूनियन बाबूजी की देन है व जिससे एक मिडिल क्लास उतपन्न हुआ व आरक्षण स्थाई हो गया।
इन सभी प्रयासों के कारण दायरा उत्तर भारत से दक्षिण भारत तक फैल गया।
अब;
"संख्याबल के कारण चमार व उसकी उपजातिया बाबा साहब के विचारों की जड़ो को काफी गहरे लेकर चली गयी है, इसलिए सबसे ज्यादा टारगेट की जाती है।
बाबा साहब के संघर्ष के समय कोंग्रेस द्वारा अज्ञानता फैलाने के कारण बाबा साहब के प्रति असहयोग 1935 तक चमार व उनकी उपजातियों का रहा। मेरे पिताजी बताते थे कि बाबा साहब जब सह्यरणपुर आये तब हमारे एरिया तक के उस समय के लोग कोंग्रेस के कहने पर स्टेशन पर काले झंडे लेकर विरोध कर रहे थे लेकिन आगरा के बुद्धिजीवी नेताओ ने जब समझाना शुरू किया तब बाबा साहब के प्रति सोच बदली व बाबा साहब का विरोध बन्द हो गया, व बाबा साहब के सम्मान में आगरा में काफी विशाल रैली अथार्त कई लाखो की भीड़ इकट्ठा करके आयोजित हुई, जिसे देखकर बाबा साहब भावुक हो गए और कहा कि;
1.अगर वास्तव में यह भीड़ कुछ वर्षों पहले मुझे दिख जाती तो में अपनी लड़ाई का केंद्र महाराष्ट्र नही बल्कि आगरा को ही बनाता।
2.दूसरा सबसे महत्वपूर्ण वाक्य इसी रैली में कहा कि "मुझे मेरे ही समाज के उन पढ़े लिखे लोगो ने धोखा दिया, जिन्हें मेने आगे बढ़ाया" वैसे यह वाक्य आज भी कारगर है। लेकिन अब पढ़े लिखे नौकरी करने वालो का अच्छा प्रतिशत Pay back to Society के माध्यम से समाज को आगे ले जा रहा है। मान्यवर साहब के आंदोलन को आगे ही ऐसे सरकारी सेवारत बहुजन अधिकारियो, कर्मचारियों ने आगे बढाया।
अब महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि;
प्रश्न : एससी में कई जातिया है। लेकिन अकेले चमार व उसकी उपजातियों को ही गालिया क्यो मिल रही है?
उत्तर : सँख्या के कारण। क्योंकि उत्तर भारत की सबसे बड़ी जाति होने के कारण अनुसुचित जाति/जनजाति मुद्दों पर मुखर होने के कारण। व इसके कारण सम्पूर्ण एससी जातीयो को मनोबल व सुरक्षा मिल रही है।।एटॉसिटी नही हो पा रही।
लेकिन इसे पॉजिटिव लीजिए। क्योंकि;
प्रश्न : टारगेट कौन होता है?
उत्तर : जो मजबूत होता है।
इसलिए इससे परेशान मत होए। न ही एससी की अन्य जातीयो के प्रति विचार लाये क्योंकि हम सभी एससी में "अछूत" शब्द हमे एक वर्ग में लाकर खड़ा कर देता है।
यह पॉजिटिव है।
विकास कुमार जाटव
यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री और बीएसपी अध्यक्षा आदरणीया बहन जी के आज दिनांक 27 अगस्त 2026 को किए गए ट्विटर पर पोस्ट का सार :
1.उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा अगले छह महीने में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की घोषणा चुनावी कदम और छलावा ज्यादा है।
2.यूपी की भाजपा सरकार एससी,एसटी और ओबीसी वर्गों के आरक्षित पदों की बैकलॉग भर्तियों में पदों के भरने की सरकारी घोषणा कब करेगी?
3.यूपी में भाजपा सरकार में 69000 शिक्षक भर्ती में एससी-एसटी-ओबीसी आरक्षण में गड़बड़ी की गई, इन वर्गों के 6800 अभ्यर्थियों को अविलम्ब उनका संवैधानिक अधिकार देकर जॉइनिंग करानी चाहिए।
4. यूपी में भाजपा सरकार में बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में स्कूली शिक्षा बदहाल स्थिति में है,यह अति निन्दनीय है।
5.यूपी में भाजपा सरकार ने 30000 सरकारी विद्यालय बन्द किए हैं,इन विद्यालयों को अविलम्ब सक्रिय और बहाल किया जाना चाहिए।
6.यूपी की भाजपा सरकार द्वारा बुजुर्ग महिलाओं को बसों में नि:शुल्क यात्रा की घोषणा से देने बेहतर है उन्हें शोषण, अत्याचार से बचाना चाहिए।
7. महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं आत्मनिर्भरता के बारे में भाजपा तथ्या अन्य सरकारों को सही नियत एवं नीति से कार्य करना चाहिए।
@Mayawati@AnandAkash_BSP@bspindia
BSP की रैली में उमड़ा ऐतिहासिक जनसैलाब!
सड़कों पर दिख रहा यह नीला समंदर बता रहा है कि बहुजन समाज की ताकत आज भी पूरी शिद्दत से जिंदा है।
यह सिर्फ भीड़ नहीं—बहुजन एकता, सम्मान और राजनीतिक शक्ति का दमदार प्रदर्शन है। ✊🏽💙
#BSP#MISSION2027
मिशन चले ना चले, हमारा हुकुम चलना चाहिए।”
“पार्टी बढ़े ना बढ़े, हमारा कुटुंब बढ़ना चाहिए।👇👇
पूर्वांचल में बहुजन मिशन बनाम व्यक्तिगत वर्चस्व?
इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि आज जिन वरिष्ठ नेताओं की चर्चा हो रही है, उन्होंने अपने युवावस्था के दिनों में ईमानदारी, संघर्ष और समर्पण के साथ बहुजन आंदोलन तथा बहुजन समाज पार्टी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्हें उस संघर्ष का सम्मान और राजनीतिक अवसर भी भरपूर मिला।
लेकिन आज सवाल यह है कि क्या उनमें से कुछ लोग बहुजन मिशन और पार्टी के मूल उद्देश्य से दूर होकर व्यक्तिगत वर्चस्व की राजनीति करने लगे हैं?
कार्यकर्ताओं के बीच जिस कथित सोच की चर्चा है, वह कुछ ऐसी बताई जाती है—
«“मिशन चले ना चले, हमारा हुकुम चलना चाहिए।”
“पार्टी बढ़े ना बढ़े, हमारा कुटुंब बढ़ना चाहिए।”»
अगर यह सोच वास्तव में संगठन में जगह बना रही है, तो यह बहुजन आंदोलन के लिए बेहद गंभीर चिंता का विषय है।
आरोप हैं कि जो मिशनरी और समर्पित कार्यकर्ता इस सोच का विरोध करते हैं, उन पर पहले दबाव या ब्लैकमेलिंग की कोशिश की जाती है और कथित रूप से बात न मानने पर उन्हें तथा उनके परिवार को डराने-धमकाने का प्रयास किया जाता है।
इन आरोपों की स्वतंत्र और तथ्यात्मक जांच होनी चाहिए।
अब कुछ सवाल जरूरी हैं—
1️⃣ बहन मायावती जी के 2007–2012 के अतुलनीय शासनकाल में बसपा को मिला व्यापक जनसमर्थन बाद के वर्षों में इतना क्यों घटा?
2️⃣ पूर्वांचल और खासकर आजमगढ़, जिसे लंबे समय तक बसपा का मजबूत आधार माना जाता रहा, वहां पार्टी कमजोर क्यों हुई?
3️⃣ यदि संगठन में कुछ सम्मानित नेता वास्तव में
“मिशन से ऊपर हुकुम”
और
“पार्टी से ऊपर परिवार”
की सोच को बढ़ावा दे रहे हैं, तो 2027 के बहन जी के मिशन को मजबूत करने के लिए मिशनरी कार्यकर्ताओं को साथ कैसे जोड़ा जाएगा?
4️⃣ जो कार्यकर्ता वर्षों से बिना किसी पद और स्वार्थ के बहुजन मिशन के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उन्हें विरोधी मानने के बजाय उनकी बात क्यों नहीं सुनी जाती?
आजमगढ़ को कमजोर करने की जिम्मेदारी किसकी?
आजमगढ़ जैसे बहुजन आंदोलन के मजबूत क्षेत्र को कमजोर करने के पीछे किन परिस्थितियों और किन लोगों की भूमिका रही—इस पर गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता है।
व्यक्ति बड़ा नहीं, मिशन बड़ा है।
पद बड़ा नहीं, संगठन बड़ा है।
किसी नेता का हुकुम नहीं, बहुजन समाज का हित सर्वोपरि है।
पार्टी में असहमति रखने वाला हर कार्यकर्ता दुश्मन नहीं होता।
कई बार वही कार्यकर्ता संगठन की कमियों की ओर सबसे पहले ध्यान दिलाता है।
कार्यकर्ताओं को डराकर नहीं, सम्मान देकर जोड़ा जाता है।
ब्लैकमेलिंग से नहीं, विश्वास से संगठन मजबूत होता है।
और सबसे महत्वपूर्ण—
**अभी हमने केवल सच्चाई की तरफ इशारा किया है…
तथ्यों के साथ पूरी सच्चाई सामने आना अभी बाकी है।**
अगर किसी पर लगाए गए आरोप गलत हैं तो संबंधित लोग तथ्यों के साथ अपना पक्ष रखें।
और यदि कहीं कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय हो रहा है, तो बहुजन समाज के सामने उसकी सच्चाई भी आनी चाहिए।
2027 का मिशन किसी व्यक्ति का निजी मिशन नहीं—यह बहुजन समाज के राजनीतिक भविष्य का सवाल है।
Credit : RATNESH KUMAR
सतीश चंद्र मिश्रा आज के बीच कार्यक्रम का वीडियो दो आकाश आनंद को सुनना चाहता है लोग देखना चाहता है आप मीडिया की जिम्मेदारी लेकर क्या कर रहे हो?
सभी साथी फेसबुक पर भी लिखें।।
@Mayawati@satishmisrabsp
चिराग पासवान के कार्यों को देख कर बाबा साहब अम्बेडकर जहां भी होंगे बहुत खुश होंगे।
जिस तरह चिराग़ पासवान उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहे है, दलितों के हक, अधिकार, आरक्षण और सम्मान की लड़ाई लड़ रहे है, बाबा सहाब को गर्व महसूस हो रहा होगा।
इसी समाज की कल्पना कर के गए थे।
जय भीम। 🙏