मैंने 2014 के बाद रवीश कुमार बस केवल एक सीमित समय के लिये ही पत्रकारिता करते देखा है जब फेसबुक पर ये नौकरी वालों और स्टूडेंट्स की परेशानियों पर लिए कुछ अच्छा लिखता बोलता था।
लेकिन फिर इसने फेसबुक पर अपनी ट्रोल आर्मी पाल ली जो इसके लिये गाली गलौच करते थे।
ट्विटर पर तो खैर इसकी ट्रॉल आर्मी हल्की ही पड़ती थी।
इस आदमी को मैंने याकूब मेमन की फांसी के समय अपूर्वानंद जैसे नक्सली के साथ सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाते देखा कि याकूब मेमन की फांसी गलत हुई, हम क्यों मानें ऐसा आदेश।।
उस दिन के पहले तक मैं इसे सीरियस लेता था।
पर जब मैंने इसे खुलेआम प्राइम टाइम पर एक आतंकी के पक्ष में बोलते देखा, तभी से इससे घृणा हो गई।
टीवी एंकर्स को आजकल आप भाजपा प्रवक्ता के बोलते समय चुप रहते सुनते और विपक्षी के बोलते समय टोकने की जो प्रथा देखते हो, ये ऐसी चीजों रवीश ने ही डिबेट में शुरुआत की थी कि जब भाजपा प्रवक्ता बोलते थे तो ये व्यंग से बीच में टोक के सवाल पूछता था जबकि कांग्रेस और आप वालों की बात तल्लीनता से सुनता था।
मैंने 2010 से 2020 तक टीवी न्यूज़ बहुत देखी हैं, डिबेट भी देखता था, इसलिए मुझे सब अभी तक याद है।
लगभग 2015 तक के रविश कुमार मुझे याद हैं जो सुलझे हुये लगते थे, स्पष्ट बात करते थे, पर धीरे धीरे इनमें पता नहीं क्यों कुंठा बढ़ने लगी थी।
अभी का रवीश कुमार मुझे एक विक्षिप्त और बड़बोला आदमी सा लगता है जिसे लगता है कि वो दुनिया का सबसे जहीन और ईमानदार पत्रकार है, जबकि असलियत ये है कि ये भी अब अमीश देवगन वाली कैटेगरी में पहुंच चुका है।
बुढ़ऊ कभी कभी बहुत कुछ अच्छा लिख देता है
चार पाँच दिन पहले ट्वीट किया था की विदेशी मीडिया अभी तक फीफा और ईरान युद्ध में उलझा हुआ ह जैसे ही ख़त्म होंगे वो गिद्ध ये स्टूडेंट आंदोलन को कवर करना स्टार्ट कर देंगे
और बुढ़ऊ की बात सही लग रही ह
सोशल मीडिया पर सरकारी शिक्षकों का हमेशा ये तर्क होता है कि…
बेईमान कर्मचारी तो हर विभाग में होते है…
लेकिन टार्गेट सबसे ज़्यादा शिक्षक ही क्यों होते हैं..??
शिक्षक टार्गेट इसलिए होते हैं…
क्योंकि शिक्षा एक Noble प्रोफ़ेशन होता है…
शिक्षक के हाथों में बच्चों का पूरा भविष्य निर्भर करता है…
बिजली विभाग वाले अगर बेईमानी करेंगे…
तो ज़्यादा से ज़्यादा दो दिन बिजली नहीं आएगी…
लेकिन शिक्षक अगर बेईमानी करेंगे…
तो बच्चों का पूरा जीवन अंधकार में चला जाएगा…
उम्मीद है उन लोगों को फ़र्क़ समझ आ गया होगा…!!
आगे से ऐसे कुतर्क नहीं करेंगे…!!!
@old_cricketer जयपुर में अमानीशाह नाला नाम से एक नाला हैं
जिसका आजकल नाम बदल दिया है
जिसकी चौड़ाई लगभग 500/800 मीटर थी आज से 20-25 साल पहले ओर आज 100M भी नही है।
अब तेज बारिश होगी तो जलभराव तो होगा ही।
@BasantBaheti3 MY AGE: 35
DAY ACTIVITY: MON TO SUN
4.30 to 5.30am : MILK COLLECTION
5.30 to 6.30 am: ट्रांसपोर्ट
6.30 to 10:15 am: selling
10.15 to 11.15 : पनीर मेकिंग
11:15 to 6:30 pm : shop
6.30 to 7.30 : मिल्क कलेक्शन
7.30 to 9.30pm:sell
09.30pm : बर्तन साफ
10pm sleeping
NOW YOUR TURN?