मैं और @thekumarshyam बात कर रहे हैं दलित विमर्श, नव-बौद्ध, ब्राह्मण घृणा, UGC, बेटी-रोटी का फ्रॉड से ले कर उनके निजी जीवन, जातिवादी भेदभाव के अनुभव आदि पर: https://t.co/AJxfxijPMc
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वे कौन लोग हैं जो मुझे नाहक ही प्रेम विवाह का विरोधी और किसी की निजी जिंदगी में दखल देने का अपराधी साबित करने पर आमादा हैं।
क्या उन लोगों के पास कोई इतिहासबोध हैं अथवा नहीं ?
शादी, प्रेम, निजी जिंदगी यकीनन निजी स्वतंत्रता के विषय हैं। लेकिन एक गंभीर विषय को सिर्फ इस एकमात्र तर्क से स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि जब व्यक्ति परंपराओं का निर्वाहक, विरासत का नेतृत्वकर्ता और संस्कृतियों के सेतु पर खड़ा हो तो उसके प्रत्येक फैसले पर बहस करने का अधिकार समाज के पास है।
जब चंद्रगुप्त मौर्य का विवाह सेल्यूकस निकेटर की राजकुमारी हेलेना से हो रहा था तब आचार्य चाणक्य ने उसे निजी जिंदगी और निजी स्वतंत्रता जैसे तर्कों से स्वीकार नहीं किया। बल्कि यह शर्ते रखीं कि हेलेना मगध की परंपराओं का नेतृत्व नहीं करेगी। उसका पुत्र मगध का उत्तराधिकारी नहीं होगा और राजकार्यों में उसकी उपस्थिति शून्य होगी। कहने का अर्थ है कि हेलेना को कभी भी मगध के समाज ने चंद्रगुप्त की निजी जिंदगी और चयन की स्वतंत्रता जैसे तर्कों के आधार पर पूर्ण मान्यता नहीं दी थी।
इतिहासबोध हमे यह भी बताता है कि वीरमदेव सोनगरा ने कभी फिरोजा के प्रेम को मान्यता नहीं दी। निजी चयन के तर्क की आड में फिरोजा को मान्यता दी जा सकती थी लेकिन वीरमदेव एक परम्परा के सेतु पर खड़े थे।
और अगर अब भी इतिहासबोध का तनिक भी ज्ञान नहीं है तो यूरोप के हैब्सबर्ग साम्राज्य के पतन के कारणों को खोजिए। यह इतिहास की तार्किक विवेचना है कि हैब्सबर्ग साम्राज्य का पतन उसकी खराब विवाह नीति के कारण हुआ था। व्यक्ति और परंपरा में बस इतना सा ही फर्क है।
अगर दो परम्पराओं में, दो जातियों में, दो समाजों में, दो विरासत में वैवाहिक संबंध अनेक - अनेक कारणों से स्थापित नहीं हो सकते तो आपको कोई हक नहीं है कि आप उन परंपराओं का खंडन करो।
हां, निजी स्वतंत्रता एक कानूनी स्वतंत्रता है। आप उसे अपनाए लेकिन पहले इस परंपरा के सेतु से हट जाइए जिसमें लाखों लोगों की आस्था है और आस्था के तमाम कारण वैज्ञानिक हैं।
मैं स्वर्गीय जसोल साहब की 90 वर्षीय विधवा पत्नी के साथ खड़ा हूं। क्योंकि जसोल साहब सिर्फ एक राजनेता नहीं थे बल्कि ताउम्र परंपराओं के नेतृत्वकर्ता थे।
जो लोग मुझे कानूनी कार्यवाहियों की धमकी दे रहे हैं उनके प्यार भरी पप्पी। जाओ करो जो करना है...
मानवेन्द्र सिंह जसोल की दूसरी शादी को लेकर लगातार अफवाहें हैं। जानिए पूरा सच क्या है ?
जसोल परिवार ने यह महत्वपूर्ण फैसला लिया है और साफ किया है कि इस मामले में परिवार मानवेन्द्र सिंह जसोल के साथ नहीं है।
सबसे पहले तो मैं यह साफ कर देना चाहता हूँ कि मानवेन्द्र सिंह जसोल को लेकर उनकी जिस दूसरी शादी की चर्चाएं होती हैं वह एकदम सच बात है। वे शादी कर चुके हैं और उसी लड़की की सामाजिक, परिवारिक स्वीकार्यता चाहते हैं।
हालही में मानवेन्द्र सिंह जसोल के पुत्र का विवाह समारोह था। उस विवाह में भी वे अपनी दूसरी पत्नी को लेकर पहुंचे थे। लेकिन परिवार ने विरोध किया और जैसे - तैसे बात टल गई। होली के दिन इस कहानी में ऐसा कुछ घटा कि अब जसोल परिवार को खुद आगे आकर मानवेन्द्र सिंह जसोल से अलगाव का रास्ता अख्तियार करना पडा।
मानवेन्द्र सिंह जसोल होली के दिन शराब के नशे में उसी लड़की को जोधपुर स्थित अपने घर लेकर पहुंचे थे। बच्चों को यह बात मालूम हुई तो उन्होंने विरोध किया और स्वर्गीय जसवंत सिंह जसोल की पत्नी को फोन करके बुलाया। जब परिवार इकट्ठा हुआ तो मानवेन्द्र सिंह जसोल की अपनी मां और भाई से हॉट टॉक हो गई। लेकिन परिवार ने उस लड़की को घर से बाहर निकाल दिया।
इस पूरे घटनाक्रम पर वह लडकी जोधपुर के महामंदिर थाना में स्वर्गीय जसवंत सिंह जसोल की 90 वर्षीय पत्नी, मानवेन्द्र सिंह जसोल के भाई और पुत्र हमीर सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए पहुंचती है। लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट लेने से मना कर दिया। इस बात की शिकायत मानवेन्द्र सिंह जसोल मुख्य सचिव वी श्रीनिवास से करते हैं। वी श्रीनिवास जोधपुर कमिश्नर से जानकारी लेते हैं तो कमिश्नर ने सब बात मुख्य सचिव को बता दी। उसके बाद वी श्रीनिवास जसवंत सिंह जसोल की पत्नी से बात करते हैं और वापस मानवेन्द्र सिंह जसोल को बोलते हैं कि जब तक जसवंत सिंह जसोल की पत्नी कुछ नहीं कहेंगी तब तक इस मामले में वे कोई एक्शन नहीं लेंगे और यह मामला पुलिसिया कार्यवाही से बचा रहता है।
अगले दिन स्वर्गीय जसोल साहब की पत्नी भाजपा की लीडरशिप को फोन करके क्लियर करती हैं कि वे मानवेन्द्र सिंह जसोल से अलगाव का रास्ता अख्तियार कर रही हैं क्योंकि उन्होंने मालानी सहित जसोल परिवार की परंपराओं को तारतार किया है। संभव है प्रदेश और देश के बड़े नेताओं को उन्होंने फोन किया हो।
इस कहानी में एक बात यह भी है कि मानवेन्द्र सिंह जसोल स्वर्गीय चित्रा सिंह की मौत के बाद क्लेम में मिले कोई दो - ढाई करोड़ रुपए उस लड़की पर खर्च कर चुके हैं जिसे उनका परिवार स्वीकार नहीं कर रहा है।
अब इतना सबकुछ हुआ तो जसोल परिवार ने स्वर्गीय जसवंत सिंह जसोल की पत्नी के नेतृत्व में आखिर यह फ़ैसला लेकर अपना पक्ष साफ कर दिया है।
स्वर्गीय जसोल साहब की 90 वर्षीय पत्नी का पक्ष यह है कि उनके जिंदा रहते जसोल परिवार में ऐसा कुछ भी नहीं होगा जो सामाजिक मर्यादाओं और मालानी की परंपराओं के खिलाफ है।
प्रतिष्ठित परिवारों में पहले भी ऐसे मामले आए हैं लेकिन यहां एक 90 वर्षीय विधवा क्षत्राणी ने परंपराओं को महफूज रखने के लिए जो हिम्मत दिखाई है वह वंदनीय है।
अब समाज तय करे कि वह मानवेन्द्र सिंह जसोल के साथ है या फिर उस क्षत्राणी के साथ है जो उम्र के इस पड़ाव में अपने पति, परिवार और समाज की परंपराओं को बचाने के लिए लड़ रही है।
मैं स्वर्गीय जसोल साहब की पत्नी को प्रणाम करता हूँ।
~ लोकेन्द्रसिंह किलाणौत
Sunny deol (1990)👽🥵🔥✅
नया रूप पैदा किया (Mass)🐯🥵......
Dialogue का (बादशाह)👽........
Action का( बाप )🥵.......
Emotion 😰💯.......
और ये राजकुमार संतोषी साहब ने सनी के साथ 3 बार साबित किया !
(THIS SCENE/DIALOGUE/EMOTION)
(GHAYAL)🍿🎥🥶🥶🥶
#Sunnydeol
वीडियो कहाँ का है पता नही चला लेकिन इस गाँव के प्रेम भाईचारे ने सबका मन मोह लिया 🥰
होली खेल में दोनों भाभियों ने मिलकर सारे गाँव के देवरों को सटकार दिया। 😀
#Holi
This is how a dance is performed while preserving and nurturing the culture. Pure Class and elegance and not what we saw the other day.
Her father raised a queen 👑🔥